रिसर्च सोसायटी फार द स्टी आफ डायबिटीज इन इंडिया के मप्र चैप्टर की मधुमीत 2019 कान्फ्रेंस में डॉ. शैलेष लोढ़ा ने कहा
भोपाल। डायबिटीज के पेशेंट यदि अपने भोजन में फ्रूट्स, ग्रीन वेजिटेबल्स और ड्राय फ्रूट्स ज्यादा खाएं और रोजाना 3 से 5 किमी वॉक करें तो यह बीमारी खत्म भी हो सकती है। अभी तक यह माना जाता था कि यह लाइफ लॉन्ग डिसीज है, लेकिन मेडिकल साइंस में अब यह धारणा बदल रही है। हाल ही में एक नई रिसर्च आई है, जिससे यह उम्मीद बढ़ी है कि अब डायबिटीज को रिवर्स भी किया जा सकता है। यह जानकारी रिसर्च सोसायटी फॉर द स्टडी आॅफ डायबिटीज इन इंडिया के मप्र चैप्टर की मधुमीत-2019 कॉन्फ्रेंस में जयपुर से आए डायबिटिक एक्सपर्ट डॉ. शैलेष लोढ़ा ने दी। उन्होंने कहा- आज स्कूलों में प्ले ग्राउंड्स नहीं है। बच्चे को साफ सुथरा रखें, लेकिन जरूरत से ज्यादा हाईजीनिक होने पर बच्चे डायबिटीज का शिकार भी हो सकते हैं।
इस अवसर पर पधारे भोपाल के डॉ. सुशील जिंदल ने भी अपने विचार रखें तथा डायबिटीज से बचाव के कई तरीके बताए। साथ ही साथ समय-समय पर चेकअप कराने की सलाह दी, यह भी बताया कि अपनी मर्जी के बजाय डॉ. से सलाह लेकर ही इलाज करें, डॉ. गूगल से बचें, कहीं और मुश्लिक में न फंस जाएं।
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ऊंटनी का दूध पीने से नहीं होती डायबिटीज
डॉ. शैलेष लोढ़ा ने बताया कि बीकानेर में ऊंटनी के दूध से कई प्रयोग किए गए हैं। एक कम्युनिटी रायडा है। उस कम्युनिटी के लोगों में डायबिटीज नहीं है। ऐसा माना जाता है कि इस कम्युनिटी में इसलिए डायबिटीज नहीं है, क्योंकि यहां के लोग ऊंटनी का दूध पीते हैं और उसमें इंसुलिन ज्यादा होता है। हालांकि इसकी कभी पुष्टि नहीं हुई और न ही किसी रिसर्च जर्नल में यह प्रकाशित हुआ है।
आयुर्वेद हमेशा कारगर नहीं
मुंबई से आए एंडोक्रायनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म एक्सपर्ट डॉ. एचबी चंडालिया ने कहा- आजकल डायबिटीज को लेकर इंटरनेट सहित व्हाट्सएप मैसेज पर कई तरह की भ्रामक जानकारियां शेयर की जाती हैं। इतना ही नहीं अक्सर देखने में आता है कि पेशेंट पहले एलोपैथिक दवाइयां लेते हैं, लेकिन अचानक से आयुर्वेद की तरफ डायवर्ट हो जाते हैं। कई बार आयुर्वेदिक दवाएं भी कारगर नहीं होती हैं। लोग करेला जूस, मेथी पावडर खाते हैं। लेकिन यदि पेशेंट का शुगर लेवल 400 एमजी है तो ऐसे में मेथी पावडर का उपयोग कारगर नहीं होगा। जरूरी है कि पांच किमी घूमें और एक्सरसाइज जरूर करें। नहीं तो आंखों, न्यूरोपैथी, किडनी में प्रॉब्लम हो सकती है।
इंसुलिन का प्रभाव
डॉ. चंडालिया ने कहा- टाइप-2 डायबिटीज होने की पहली वजह जेनेटिक और दूसरी मोटापा है। डायबिटीज के लिए कोई एक जीन नहीं, बल्कि 17 से 20 जीन जिम्मेदार होते हैं। इन सबको ठीक नहीं किया जा सकता। यदि कोई एक जीन रिस्पॉन्सिबल होता तो उसे मोडिफाई किया जा सकता था। उन्होंने आगे कहा- लोगों में भ्रम है कि इंसुलिन चालू करने से किडनी खराब होती है। जबकि 10 या 20 साल की डायबिटीज के बाद मरीज को इंसुलिन दिया जाता है। वहीं नई मेडिसिन आई हैं, जिनके साइड-इफेक्ट्स बहुत कम हैं।