भोपाल। विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में अंधाधुंध घोषणाएं की हैं. कांग्रेस किसानों के कर्ज माफी के साथ ही पुलिस कर्मियों का महंगाई भत्ता बढ़ाने, संविदा कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को नियमित करने की घोषणा कर चुकी है तो वहीं बीजेपी ने भी संविदा कर्मियों को नियमित करने की घोषणा कर दी है.
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इन घोषणाओं के बाद सवाल यह उठता है कि इन्हें पूरा करने के लिए सरकार पैसा कहां से लाएगी. खास बात तो यह कि किसी भी पार्टी ने आय के साधन बढ़ाने को लेकर कोई योजना सामने नहीं रखी है. मार्च 2018 के आंकड़ों पर गौर करें तो मध्यप्रदेश पर 1 लाख 87 हजार 637 करोड़ रुपए का कर्ज है. इस लिहाज से प्रदेश का हर नागरिक 23 हजार 454 रुपए के कर्ज से दबा हुआ है. इन तथ्यों की अनदेखी कर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही मुख्य पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र में कई लुभावनी घोषणाएं की हैं.
कांग्रेस के घोषणा पत्र में की गई घोषणाएं
कांग्रेस ने अपने 112 पेज के वचन पत्र में 973 घोषणाएं की हैं. इसमें दूध डेयरी संचालकों को प्रति लीटर 5 रुपए का बोनस, 17 फसलों पर बोनस और छोटे किसानों की बेटियों की शादी में 51 हजार रुपए देने जैसी कई घोषणाएं शामिल हैं. कांग्रेस ने ऐलान किया है कि सभी किसानों का 2 लाख तक का लोन भी माफ किया जाएगा. इस घोषणा से 81 लाख किसान लाभांवित होंगे, जिसके लिए सरकार को 94 हजार करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी. इसी तरह प्रदेश की 23 हजार पंचायतों में गौशालाओं के लिए 700 करोड़ रुपए का बोझ आएगा. वहीं पुलिसकर्मियों को 5 हजार रुपए महंगाई भत्ते के लिए करीब 600 करोड़ रुपए के राजस्व की जरूरत पड़ेगी.
बीजेपी के दृष्टि पत्र में की गई घोषणाएं
बीजेपी ने समर्द्ध मध्यप्रदेश दृष्टि पत्र नाम से 80 पेज के अपने घोषणा पत्र में कई लुभावने वादे किए हैं. जिसमें वादा किया गया है कि युवा उद्यमियों को हर साल एक हजार करोड़ दिए जाएंगे. कल्याणी को 1 हजार रुपए की पेंशन, आशा वर्कर को स्मार्ट फोन, 12वीं में 75 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने वाली बच्चियों को स्कूटर दिया जाएगा. इसके साथ ही 4 हजार करोड़ की लागत से मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना बनाने और ढाई हजार करोड़ की लागत से छोटे शहरों की आधारभूत संरचना को विकसित किया जाएगा.
बीजेपी ने वादा किया है कि सरकार किसानों पर 60 हजार 600 करोड़ रुपए खर्च करेगी, इसमें फसलों पर लोन, सब्सिडी और किसानों के लिए स्पेशल फंड शामिल रहेगा. इसका मतलब यह है कि बीजेपी अगर सरकार में आई तो राजस्व का एक चौथाई हिस्सा कृषि क्षेत्र पर खर्च करेगी. इसके साथ ही बीजेपी ने वादा किया है कि 100 विटनरी हॉस्पिटल और सभी गांवों में गौ शालाएं खोली जाएंगी, जिस पर करीब 18 सौ करोड़ का खर्च सरकार करेगी. इसी तरह 65 हजार आशावर्कर को स्मार्टफोन देने में 6 हजार करोड रुपए के बजट की जरूरत पड़ेगी और 16 लाख विधावाओं को एक हजार हर माह पेंशन देने में 2 हजार करोड़ रुपए हर साल खर्च होंगें.
यहां सवाल यह उठता है कि मौजूदा वित्तीय हालातों में बीजेपी-कांग्रेस अपने चुनावी वादे कैसे पूरे कर सकेंगे. प्रदेश की आर्थिक सेहत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चुनावी गहमागहमी के बीच भी प्रदेश सरकार ने 2 हजार करोड़ रुपए का लोन लिया है. पूर्व वित्तमंत्री राघवजी कहते हैं कि प्रदेश की मौजूदा आर्थिक हालत बहुत ज्यादा कर्ज लेने की स्थिति में नहीं है. ऐसी स्थिति में घोषणाएं पूरी करने के लिए सरकार को अपनी आय बढ़ानी पड़ेगी, उसके बाद ही घोषणाओं पर अमल करना संभव होगा. इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि ये घोषणाए अगर सरकार पूरी करेगी भी तो विकास कार्यों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा. सिंचाई और सड़कों के विकास पर ये सीधा असर डालेंगी.

