राकेश दुबे
Cash: Unofficial transaction increased
देश में बेंको से जुड़े अर्थशास्त्री इसे सरकार की सफलता मान रहे है | उन का मानना है कि सरकार सेवा एवं वस्तु कर प्रणाली (जीएसटी) को लागू करने में नरमी बरत रही है, जिसकी वजह से नकद कारोबार बढ़ा है| उन्होंने यह भी रेखांकित किया है कि इस प्रणाली से अधिक व्यवसायों द्वारा कर भुगतान करने की अपेक्षा पूरी होने में देरी हो रही है| यह भी ध्यान में रखा जाना चाहिए कि सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) के अनुपात में नकदी की बढ़त पहले से बहुत अधिक नहीं है|
नोटबंदी से पहले यह आंकड़ा ११.९ प्रतिशत था, जो मार्च,२०१७ में घटकर ८.८ प्रतिशत हो गया था| पिछले साल मार्च में यह अनुपात १०.९ प्रतिशत हुआ और चालू वित्त वर्ष के अंत में इसके ११.४ प्रतिशत रहने का अनुमान है| विकसित अर्थव्यवस्थाओं में भी जीडीपी और चलन में नगदी का अनुपात कमोबेश इसी स्तर पर है|
कुछ समय पहले रिजर्व बैंक के एक अध्ययन में बताया गया था कि लोग सामान्य लेन-देन के लिए घरों में नकदी रखना पसंद करते हैं| ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साधनों से भुगतान पर जोर देकर नकदी के इस्तेमाल को कम करने की कोशिशों को तेज किया जाना चाहिए| इन साधनों को सुरक्षित और सस्ता बनाया जाना चाहिए| तभी इनका समुचित लाभ लिया जा सकता है |
यह भी सर्व ज्ञात तथ्य है कि छोटे और मध्यम स्तर के उद्यम अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग हैं| यदि बैंकों से उन्हें कर्ज लेने और भुगतान करने की बेहतर सुविधाएं मुहैया करायी जायें, तो इससे भी नकदी के चलन को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी| ये उद्यम अनौपचारिक कर्जदाताओं और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों से पैसा उठाते हैं| नकदी की बढत पर रोक चुनाव सुधारों को लागू करने तथा भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के बहुत जरूरी है| सरकार चाहे तो लगातार कोशिशों से अर्थव्यवस्था के बही-खाते को दुरुस्त करे इज्स्से नकदी की बढ़त पर अंकुश लगाया जा सके |

