गुना
आजाद भारत की एक ऐसी तस्वीर, जिसमें बच्चे पढ़ने के लिए हर रोज जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं। गोचापुरा के 60 परिवारों के बच्चे नदी को पार करने के लिए रस्सी का सहारा लेते हैं, क्योंकि गोचा नदी पर आज तक पुल नहीं बनाया गया है। जबकि इस गांव के सहरिया और बंजारा समुदाय के लोग पिछले 30 साल से आवेदन दे रहे हैं, उसके बाद भी पुल का निर्माण नहीं किया गया। उधर जब जिला शिक्षाधिकारी को जब इस बात की खबर लगी तो उन्होंने इस मामले में आला अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगने की बात कही।
जिला मुख्यालय से करीब 70 किमी दूर राघोगढ़ ब्लाक की गोचा आमल्या पंचायत में गोचापुरा में सहरिया-आदिवासी और बंजाराओं की बस्ती है। जहां 60 घर बने हुए है। गुरुवार की सुबह इस गांव से जगदीश बंजारा अपनी बेटी पूजा भील और पत्नी बनीबाई के साथ निकले। इस दौरान गोचा नदी के दोनों ओर पेड़ से बंधी एक रस्सी को उसने पकड़ा तो दूसरी रस्सी पर वह चलने लगी। जगदीश अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर दूसरे छोर पर खड़ा था, तो वहीं मां बनीबाई दूसरे छोर पर टकटकी लगाकर बेटी को देख रही थी। साथ ही बेटी से कह रही थी कि रस्सी को अच्छे पकड़ना बेटी पैर न फिसल जाए। हालांकि इस गांव के बच्चे हर रोज खतरों से खेलकर जामनेर और दूसरे गांव में पड़ने के लिए जाते है।
सीएम के गृह जिले में बच्चों का स्कूल जाना बंद
यहीं हाल सीहोर जिले के श्यामपुर तहसील के ग्राम दुपाड़िया दांगी की काकड़ कॉलोनी के है यहां 40 घर के लोग रहते है , लेकिन नदी में पुल और सड़क नहीं होने से अभी बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे है। वहीं सरकार कहती है कि बच्चों को स्कूल भेजो, लेकिन सरकार की नाकामी और विधायक सुदेश राय द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने से यह सड़क नहीं बन पा रही है। इसका प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग भोपाल पहुंच गया लेकिन विधायक और अफसरों की लापरवाही के कारण यह सड़क मंजूर नहीं हो पा रही है।