डिजिटल इंडिया: मप्र के 67 हजार स्कूलों में नहीं है बिजली, भोपाल के 883 स्कूलों में नहीं है लाइट

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भोपाल। देश डिजिटल इंडिया की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन मप्र के स्कूलों में सुविधाओं का अभाव है। प्रदेश सरकार जहां 24 घंटे बिजली देने का दावा करती है, वहीं प्रदेश के 67 हजार स्कूल ऐसे हैं,जिनमें बिजली नहीं है। स्कूलों से जुड़े यह आंकड़े मप्र सरकार के सरप्लस बिजली के दावे की पोल खोलते हैं। राजधानी भोपाल में 883 स्कूलों में बिजली नहीं है। जबकि सुदूल अंचल के स्कूलों की स्थिति दयनीय है।
Digital India: 67 thousand schools in MP do not have electricity, 883 schools in Bhopal do not have light
देश भर में डिजिटल इंडिया यानी हर काम आॅनलाइन करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। टेक्नालॉजी के युग में प्रदेश के अधिकतर सरकारी स्कूलों में बिजली कनेक्शन तक नहीं हैं, जहां सरकार सभी स्कूल में कंप्यूटर और इंटरनेट से लेस करने की बात कह रही हैं वहीं अभी तक छात्र अंधेरे में पढ़ने को मजबूर हैं।

राजधानी के हुजूर विस क्षेत्र में आने वाली पंचायत ‘सेवनिया ओमकाराझ् में आने वाले अरेडी के्रसर गांव के वर्ष-1997 में स्थापित किए गए शासकीय प्राथमिक शाला में बिजली कनेक्शन ही नहीं है, यहां 3 रूम में 5 क्लास लगती हैं। विद्यालय की दूरी भोपाल नगर निगम सीमा से मात्र 100 मीटर के लगभग है फिर भी इस विद्यालय की स्थापना के 21 वर्ष बीत जाने के बाद भी विद्यालय में बिजली कनेक्शन नहीं मिला है। यहां 114 छात्रों के इस विद्यालय में छात्र छात्राएं पढ़ रहे हैं।

कोलार क्षेत्र के गेहूखेड़ा शासकीय प्रायमरी स्कूल में पढ़ने वाले करीब 150 बच्चों को उमस और गर्मी के बीच पढ़न पड़ रहा है। सालभर पहले कनेक्शन के लिए शिक्षा विभाग द्वारा आवेदन बिजली कंपनी को दिया गया था, लेकिन कनेक्शन नहीं मिला।

लाइट नहीं होने से ने पीएम को सुन पाते न सीएम को
शिक्षा विभाग से आकाशवाणी का टाई-अप है जिसके तहत शिक्षा के लिए प्रायमरी और मिडिल कक्षाओं में शैक्षणिक कार्यक्रम मीना की दुनिया, इंग्लिश इज फन लेवल 1 तथा इंग्लिश इज फन लेवल 2 के साथ झिलमिल कार्यक्रम का प्रसारण होता है। लेकिन कुछ स्कूलों पर रेडियो नहीं है तो कहीं लाइट नहीं है जिससे बच्चों को एक साथ प्रतिदिन दोपहर 12 से 1 बजे तक आने वाले यह कार्यक्रम बच्चे सुन नहीं पाते। साथ ही प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री द्वारा भी बच्चों को संबोधित किया जाता है, लेकिन इन स्कूलों के बच्चे नहीं सुन पाते।