भोपाल। लोकसभा चुनाव के लिए मध्यप्रदेश कांग्रेस की घोषित पांच समितियों में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समर्थकों की संख्या सबसे ज्यादा है लेकिन सबसे सशक्त समन्वय समिति में उन्हें अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी नहीं सौंपे जाने से तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त है। जबकि विधानसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह ने समन्वय समिति अध्यक्ष के नाते प्रदेश में ग्वालियर-चंबल को छोड़कर सभी 43 जिलों के दौरे किए थे। लोकसभा चुनाव की समितियों में मुख्यमंत्री कमलनाथ और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों की संख्या भी खासी है।
Digvijay decreed, the coordination committee did not get the responsibility of the Lok Sabha elections
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए समितियों का ऐलान कर दिया जिनमें समन्वय समिति की भूमिका सबसे ज्यादा प्रभावी मानी जाती है। विधानसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह ने समिति अध्यक्ष के रूप में दौरे कर दावेदारों व कार्यकर्ताओं के बीच प्रदेश के दूसरे नेताओं से अधिक निकटता बना ली थी। जबकि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद से सिंह संगठन में धीरे-धीरे किनारे किए जाने लगे हैं। एक बार फिर एआईसीसी ने दिग्विजय सिंह को विधानसभा चुनाव में समन्वय समिति के अध्यक्ष की जो जिम्मेदारी सौंपी थी, उससे लोकसभा चुनाव में अलग कर दिया है। यह जिम्मेदारी राहुल गांधी के विश्वस्त साथी और प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया को सौंपी है जिन्होंने मप्र के अपने करीब डेढ़ साल के कार्यकाल में पूरा प्रदेश नाप लिया है।
समितियों में गुटीय संतुलन का प्रयास
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्यों को छोड़कर 60 नेताओं को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री नाथ और दिग्विजय समर्थक 10-10, सिंधिया के सात, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी के पांच, प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया के चार, पीसीसी के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव के तीन और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के दो समर्थकों को समितियों में लिया है। पचौरी समर्थकों शोभा ओझा और राजीव सिंह सहित विधानसभा उपाध्यक्ष हिना कांवरे, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, कमलेश्वर पटेल सहित मीनाक्षी नटराजन, राजमणि पटेल, चंद्रप्रभाष शेखर, मृणाल पंत, रामनिवास रावत, महेंद्र जोशी, जेपी धनोपिया व योगेंद्र सिंह परिहार तो दो या इससे ज्यादा समितियों में शामिल किए गए हैं। वहीं, पांच समितियों में चार अल्प संख्यकों और पांच महिलाओं को लिया है।
समिति में स्थान नहीं मिलने से नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनावों की समितियों में कुछ नेताओं को शामिल नहीं किए जाने पर नाराजगी भी जताई जा रही है। पूर्व मंत्री राजा पटौरिया, पीसीसी के पूर्व संगठन प्रभारी महामंत्री चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी, साजिद अली एडवोकेट, भोपाल की पूर्व महापौर विभा पटेल जैसे नेताओं के नाम सामने आए हैं। हालांकि इनमें से केवल साजिद अली और विभा पटेल ने बाबरिया से मिलकर अपनी बात रखी है। साजिद अली ने अल्प संख्यकों को पर्याप्त संख्या में स्थान नहीं मिलने का मुद्दा उठाया था।

