भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में विपक्षी दलों को एकजुट कर मतों का बिखराव रोकने की पहल कमजोर पड़ने लगी है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और समाजवादी पार्टी महागठबंधन के दायरे से बाहर हो चुके हैं। महागठबंधन के नाम पर 5 दल ही एकजुट हैं। ज्यों-ज्यों चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है इन दलों के बीच तालमेल और सीटों के बंटवारे की कवायद तेज हो गई है।
Due to the exit of Gondwana and SP, the weak drill in MP
मध्यप्रदेश में गैर भाजपाई दलों के महागठबंधन को लेकर समन्वयक की भूमिका निभा रहे गोविंद यादव ने चुनावी रणनीति बनाने के लिए मंगलवार को बैठक बुलाई है। यादव ने बताया कि प्रारंभ में समाजवादी पार्टी से उनकी चर्चा हुई थी, तब वह महागठबंधन के लिए तैयार भी थी पर बाद में सियासी परिस्थितियां बदल गईं और सपा ने अलग राह पकड़ ली।
गोंडवाना और सपा के बीच विधानसभा चुनाव के लिए सीटों का समझौता हो चुका है। इसलिए गोंडवाना भी महागठबंधन में शामिल नहीं हुई, जबकि पहले गोंगपा ने भी एकजुटता दिखाई थी। दोनों ही दल पहले राजी थे, लेकिन फिर पीछे हट गए। महागठबंधन में अब पांच दल बचे हैं।
इनमें शरद यादव का लोकतांत्रिक जनता दल, भाकपा, माकपा, बहुजन संघर्ष दल और प्रजातांत्रिक समाधान पार्टी शामिल है। मंगलवार को पांचों दल आपस में बैठकर सीटों का फैसला करेंगे। लोजद के यादव ने बताया कि आगे भी गैर भाजपाई महागठबंधन के लिए उनके प्रयास जारी रहेंगे।
बताया जाता है कि सपा और बसपा के बीच कुछ सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट” को लेकर सहमति के संकेत हैं। इसलिए ये दोनों दल एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान कर रहे हैं। कांग्रेस से गठबंधन के प्रस्ताव को पहले बसपा ने ठुकराया उसके बाद सपा ने भी वही निर्णय लिया। सियासी सूत्रों का दावा है कि दोनों ही दल 2019 के आम चुनाव की रूपरेखा बना रहे हैं। आम चुनाव के दौरान उत्तरप्रदेश में सपा-बसपा के बीच नए राजनीतिक समीकरण भी सामने आ सकते हैं।

