इंदौर। सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम (सीजीएसटी) ने जीएसटी फर्जी टैक्स क्रेडिट लेने के मामले का सिरा पकड़ लिया है। शनिवार को घोटाले से जुड़ी पहली गिरफ्तारी हुई। मुंबई निवासी जगदीश कानानी को सीजीएसटी ने घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया। जगदीश फर्जी फर्में खड़ी कर रहा था, जिनके जरिए फर्जी टैक्स क्रेडिट हासिल कर जीएसटी घोटाले का ताना-बाना बुना जाता था।
First arrest in CGST scam, fake firms opened, stole tax of 32 crores
वाणिज्यिक कर विभाग और सीजीएसटी ने मिलकर दिसंबर में जीएसटी घोटाला पकड़ा था। अनुमान लगाया गया था कि फर्जी फर्मों और कंपनियों के जरिए बोगस बिलों से सैकड़ों करोड़ की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट शासन से हासिल कर ली गई। 13 दिसंबर से ही सीजीएसटी की टीम मामले की जांच में जुटी थी।
इंदौर, ग्वालियर, छतरपुर के अलावा गुजरात और महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में छापे मारे गए। शुरूआती जांच में जो भी लोग जांच टीमों के हाथ लगे, वे या तो मजदूर थे या जरूरतमंद गरीब। घोटाले के मास्टरमाइंड ने इन लोगों से उनकी पहचान के दस्तावेज खरीदकर फर्जी फर्में खड़ी की और टैक्स चोरी की। तब से जांच अधिकारी घोटाले में शामिल असल आदमी को ढूंढ रहे थे। टीम के हाथ कानानी के रूप में घोटाले का पहला आरोपित लगा है।
मुंबई से पकड़ाया
सीजीएसटी के आयुक्त नीरवकुमार मल्लिक, अपर आयुक्त राजीवकुमार अग्रवाल और संयुक्त आयुक्त वीरेंद्र जैन के मुताबिक जगदीश ने गरीबों के दस्तावेज हासिल कर छह से ज्यादा बोगस फर्में बनाई थीं। बाद में इनके फर्जी बिल आदि का उपयोग कर टैक्स चोरी की गई और फर्जी आईटीसी हासिल की गई। प्रारंभिक तौर पर बोगस बिलों के जरिए 32 करोड़ की टैक्स चोरी सामने आ चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक गोपनीय सूचना के आधार पर जगदीश को मुंबई से पकड़ा गया।
आठ जनवरी तक रिमांड पर
सीजीएसटी अधीक्षक कमलसिंह डाबी ने आरोपित को कोर्ट में पेश किया। शासन के वकील चंदन ऐरन ने कोर्ट से कहा कि जगदीश के तार मप्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, दिल्ली, पश्चिम बंगाल से भी जुड़ रहे हैं। इससे पूछताछ में घोटाले की भूमिका बनाने वाले मास्टर माइंड सामने आ सकते हैं। विभाग की मांग और दलील पर कोर्ट ने उसे आठ जनवरी तक रिमांड पर सौंप दिया।

