सरकार चाहती है टाटा समूह करे जेड ऐयरवेज का अधिग्रहण, बची रहे लोगों की नौकरी

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नई दिल्ली। टाटा समूह द्वारा संकटग्रस्त जेट एयरवेज के अधिग्रहण पर सरकार भी दिलचस्पी ले रही है। सरकार चाहती है कि टाटा देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन को संकट से उबार ले। आखिर इसके पीछे वजह क्या है? दरअसल 2019 में आम चुनाव होने जा रहे हैं और सरकार नहीं चाहती है कि जेट एयरवेज की वजह से लोगों की नौकरी जाए। इससे एक बुरा संदेश लोगों के बीच जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार टाटा से लगातार संपर्क कर रही है और जेट के कुछ बकाए को राइट आॅफ करने का भी आॅफर दे रही है।
Government wants Tata group to acquire Z Aire’s, job of survivors
बता दें कि टाटा ने 1932 में भारत की सबसे पहली एयरलाइन की शुरूआत की थी। बाद में टाटा एयरलाइन ही एयर इंडिया हो गई। वर्तमान में टाटा दो एयरलाइन्स (विस्तारा और एयरएशिया इंडिया) का संचालन करती है। इन दोनों एयरलाइन्स का सम्मिलित मार्केट शेयर 8.2 प्रतिशथ है। जेट के अधिग्रहण के बाद यह 24 फीसदी हो सकता है। इसके साथ ही टाटा इंडिगो के बाद सबसे बड़ी एविएशन कंपनी बन जाएगी।

शुक्रवार को टाटा संस की तरफ से कहा गया कि जेट एयरवेज के अधिग्रहण के लिए अभी तक कोई पुख्ता पेशकश नहीं की है और अभी इस संबंध में उसकी बातचीत प्रारंभिक अवस्था में ही है। इस तरह की चर्चा थी कि टाटा समूह नरेश गोयल की अगुआई वाले जेट एयरवेज का सिंगापुर एयरलाइंस के साथ मिलकर पूर्ण अधिग्रहण करने की योजना बना रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे समूह ने शुक्रवार को बोर्ड आॅफ डायरेक्टर्स की बैठक के बाद स्पष्ट किया कि जेट एयरवेज के अधिग्रहण से संबंध में सिर्फ शुरूआती बातचीत हुई है। अभी किसी तरह का कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है।

जेट एयरवेज के उप-मुख्य कार्यकारी और मुख्य वित्त अधिकारी अमित अग्रवाल ने इसी सप्ताह इस बात की पुष्टि की थी कि उनकी कंपनी निवेश के इच्छुक कई पक्षों से बातचीत कर रही है। इसके अलावा एयरलाइन अपने 6 बोइंग-777 विमान तथा लॉयल्टी कार्यक्रम जेट प्रिविलेज में हिस्सेदारी बेचने जा रही है। जेट एयरवेज में गोयल और उनके परिवार की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत और संयुक्त अरब अमीरात की एतिहाद एयरवेज की 24 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

इस बार सितंबर में समाप्त तिमाही में जेट एयरवेज को 1,261 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। एक साल पहले समान तिमाही में उसने 71 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। यह लगातार तीसरी तिमाही है जबकि जेट एयरवेज को घाटा हुआ है। मीडिया की खबरों में कहा गया है कि विस्ताराा एयरलाइन का परिचालन कर रही कंपनी टाटा सिंगापुर एयरलाइंस चाहती है कि जेट एयरवेज उसके साथ शेयरों के आधार पर विलय कर ले। शेयर बाजारों को भेजी सूचना में जेट एयरवेज ने गुरुवार को इस तरह की खबरों को अटकलबाजी बताया था।