सरकार आज राज्यसभा में पेश करेगी तीन तकाल बिल, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने की तैयारी

0
385

नई दिल्ली। लोकसभा से पारित हो चुके तीन तलाक बिल को केंद्र सरकार आज राज्यसभा में पेश करेगी। संसद में राजनीतिक घमासान का कारण बने इस विधेयक को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों ओर से पूरी तैयारी है। इस विधेयक में एक साथ तीन तलाक बोलने वाले शख्स को तीन साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है। विपक्षी दलों की मांग है कि इस बिल को सदन में पेश किए जाने से पहले सेलेक्ट कमिटी को भेजा जाना चाहिए। इससे पहले बीजेपी की तरफ से विजय गोयल ने राज्यसभा में तीन तलाक विधेयक पारित करने के लिए सभी दलों से संपर्क साधा है।
Government will present in the Rajya Sabha, three takal bills, both the ruling party and the opposition are prepared
कांग्रेस और बीजेपी ने सांसदों को विप जारी कर सोमवार को सदन में मौजूद रहने का आदेश दिया है। इसके अलावा अन्य दलों ने भी सांसदों से कहा कि वे इस महत्वपूर्ण बिल को पेश किए जाने के मौके पर मौजूद रहें। टीडीपी ने भी इसके लिए विप जारी किया है। कांग्रेस ने इस संबंध में चर्चा के लिए सांसदों की मीटिंग भी बुलाई। सभी दल यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि सदन में उनकी मौजूदगी 100 फीसदी रहे।

सुबह रणनीति बनाने को जुटेंगे विपक्षी सांसद
इस मुद्दे पर अपनी रणनीति बनाने के लिए कई विपक्षी दलों के सांसद राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद के चेंबर में जुटेंगे। उच्च सदन में मोदी सरकार बहुमत में नहीं है और विपक्षी दल इस विधेयक को सेलेक्ट कमिटी को भेजने की मांग पर अड़े हुए हैं। ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि सदन में इस पर तीखा घमासान देखने को मिल सकता है।

एक सीनियर विपक्षी लीडर ने बताया, ‘विरोधी दल सोमवार को मिलेंगे और बिल को लेकर रणनीति तैयार करेंगे। लेकिन, हम सभी इस बात पर सहमत हैं कि इसे सेलेक्ट कमिटी को भेजा जाना चाहिए। इसे जस का तस पास नहीं किया जा सकता है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दल पूरी तरह एकजुट हैं।’

वेंकैया नायडू नहीं रहेंगे, हरिवंश करेंगे सदन का संचालन
यह बिल राज्यसभा के चेयरमैन वेंकैया नायडू की गैरमौजूदगी में ही पेश किया जा सकता है। इसकी वजह यह है कि उनकी मदर-इन-लॉ का देहांत हो गया है। ऐसे में डेप्युटी चेयरमैन हरिवंश ही कार्यवाही का संचालन करेंगे। कांग्रेस का कहना है कि वह मुस्लिम महिला ( विवाह अधिकार संरक्षण) बिल, 2018 को मौजूदा स्वरूप में पारित नहीं होने देगी।