चेन्नै। सरकार कई शहरों में निम्न और मध्यम आयवर्ग के लोगों के लिए सस्ते मकान पर काम कर रही है। हाउजिंग पर डिवेलपर्स के इनपुट टैक्स क्रेडिट के फायदे में बिना इजाफा किए जीएसटी घटाकर 5 फीसदी करने से इन मकानों की कीमत में इजाफा हो जाएगा। हालांकि मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों के हाई वैल्यू अपार्टमेंट के दाम कम होंगे। इनपुट टैक्स क्रेडिट वह छूट है जो मकान बनाने में लगने वाले सामान के टैक्स पर दी जाती है।
GST rates will decrease, middle-income people will suffer loss, home prices will increase
जानकारों के मुताबिक अगर जीएसटी को घटाकर 5 फीसदी किया जाता है तो भी आईटीसी न मिलने की वजह से सस्ते मकानों की कीमत में इजाफा होगा। अगर 3,250 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से घर खरीदा जाता है तो इसकी कुल कीमत जीएसटी (8 प्रतिशत की की दर से) 260 रुपये प्रति वर्ग फुट होगी। लेकिन जीएसटी में कटौती के बाद यह 163 रुपये रह जाएगा।
हालांकि डिवेलपर इनपुट टैक्स का बोझ भी खरीदारों पर डाल देंगे। इसलिए बायर्स पर 324 रुपये का अतिरिक्त बोझ भी पड़ेगा। इसलिए कुल मिलाकर एक वर्ग फुट पर 227 रुपये कीमत बढ़ जाएगी। इतने कम मार्जिन पर काम करने वाले डिवेलपर इस झटके को खुद बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे।
टैक्स के जानकारों का कहना है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट के हिसाब से जीएसटी का मूलभूत रूप ही बदल जाता है। अगर कम आउटपुट टैक्स रेट की बुनियाद पर आईटीसी को नजरअंदाज किया जाता है तो जीएसटी कम होने का फायदा लोगों को नहीं मिल पाएगा। एक एक्सपर्ट ने बताया कि लगता है सरकार ने रेस्तरां की तर्ज पर मकानों के जीएसटी को कम किया है। लेकिन रेस्तरां में सब्जियों और खाद्य सामग्री पर लगने वाला जीएसटी भी कम है। इसके विपरीत मकान बनाने में उपयोग होने वाली सामग्री पर जीएसटी ज्यादा लगता है और इसका बोझ भी बायर्स को उठाना पड़ता है।
नवीन्स डिवेलपर के सीएमडी आर कुमार के मुताबिक पारदर्शी लेनदेन के लिए जीएसटी लागू किया गया। इनपुट टैक्स क्रेडिट ने अनरजिस्टर्ड डीलर्स से बिजनस करना मुश्किल बना दिया। अगर इनपुट टैक्स क्रेडिट को हटा लिया जाता है तो गैरकानूनी गतिविधियां फिर से शुरू हो जाएंगी। महंगे घरों पर जीएसटी कम होने के बावजूद डिवेलपर्स को अच्छी बचत होगी इसलिए उनके लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का बोझ सहना आसान रहेगा। इस लिहाज से महंगे घरों के खरीदारों को अतिरिक्त बोझ भी नहीं उठाना पड़ेगा।

