भोपाल। मध्यप्रदेश में सियासी हवा के एक झोके ने 15 साल बाद बदलाव की नींव रखी है, लेकिन इस नींव पर जो इमारत बनी है, उसके मजबूती से खड़े रहने पर संशय है क्योंकि इसके मजबूत पिलर ही मकान को रह रहकर झटके दे रहे हैं। जिससे निपटना कमलनाथ के लिए बड़ी चुनौती है।
How to deal with these challenges, how can CM Nath be able to stay afloat?
बागी-बीहड़ वाले ग्वालियर-चंबल से बगावत की जो आग लगी है, उसके बुझने की गुंजाइश कम दिख रही है क्योंकि इसके पीछे ये कयास लगाये जा रहे हैं कि कहीं इस आग में कोई तो है जो घी डाल रहा है। पिछोर विधायक केपी सिंह के बाद तो जैसे बागियों की बाढ़ आ गयी है, रोजाना कोई न कोई सरकार को आंखें दिखा रहा है, कोई इस्तीफे की धमकी दे रहा है। अब इन सब चुनौतियों से मुख्यमंत्री कमलनाथ को निपटना है।
दरअसल, अब तक जितने भी बागी सामने आये हैं। उनमें ज्यादातर सिंधिया के करीबी हैं, जबकि अजय सिंह मंत्रियों के शपथ सामरोह का बहिष्कार कर अपनी नाराजगी जता चुके हैं। कार्यक्रम से ठीक पहले विधायक केपी सिंह अपने समर्थकों के साथ मंत्री नहीं बनाये जाने से नाराज होकर धरना प्रदर्शन करने लगे, उसके बाद जयस प्रमुख हीरालाल अलावा ने विरोध जताते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार किया।
फिर एदल सिंह कंसाना को मंत्री नहीं बनाये जाने से नाराज उनके समर्थक ब्लॉक अध्यक्ष मदन शर्मा ने इस्तीफा दे दिया था। अब बदनावर विधायक राजवर्धन सिंह ने मंत्री नहीं बनाने से नाराज होकर इस्तीफा देने की धमकी दी है। वहीं, बिसाहूलाल दिग्विजय सिंह से मिलकर फूट-फूट कर रोये थे।
कांग्रेसी विधायकों के बाद अब कहीं न कहीं सपा-बसपा व निर्दलीय विधायकों का आक्रोश भी दिखने लगा है क्योंकि सरकार ने गैर कांग्रेसी विधायकों को सरकार में शामिल नहीं किया है, जबकि उनके समर्थन के बिना सरकार का बने रहना संभव नहीं है। ऐसे में इन विधायको की नाराजगी कांग्रेस को बड़े जोखिम में डाल सकती है। छतरपुर की बिजावर सीट से सपा के टिकट पर चुनाव जीते राजेश कुमार शुक्ला भी अब भौहें ताने हैं, जबकि भिंड से बसपा विधायक संजीव सिंह और पथरिया से रामबाई गोविंद सिंह भी मंत्री नहीं बनाये जाने से नाराज हैं। इसके अलावा चार निर्दलीय विधायक भी खफा हैं।
अब कमलनाथ के सामने बागियों को मनाने की चुनौती है क्योंकि ये बागी कभी भी सरकार के लिए खतरा बन सकते हैं। ऐसे में कमलनाथ के विरोधी भी बागियों को उकसाने में जुटे हैं। इसके पीछे वजह ये भी हो सकती है कि सरकार से उनका काम भी निकलता रहे। हालांकि, कमलनाथ सरकार तलवार की धार पर खड़ी है, जरा सी चूक सत्ता पर सितम कर सकती है।

