मी टू- विनता को याद नहीं रेप की तारीख और महीना, अभिनेता आलोक को मिली अग्रिम जमानत

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मुंबई। पर्दे पर संस्कारी बाबूजी का किरदार निभाने के लिए मशहूर एक्टर आलोक नाथ पर लेखिका-निर्देशक विनता नंदा ने मी टू- कैंपियन के तहत रेप और सेक्सुअल हैरेसमेंट के आरोप लगाए थे। इस मामले में मुंबई सत्र न्यायालय ने हालही में अभिनेता आलोक को अग्रिम जमानत दे दी है। जमानत की घोषणा करते हुए, अदालत ने कहा कि विनता नंदा ने ‘अपने लाभ के लिए कथित घटना के तुरंत बाद रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी।’ अदालत ने यह भी कहा है कि, इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि आलोक नाथ को इस आरोप में जबरन ही फंसाया जा रहा है।’
I do not remember the date and month of rap, the advance bail granted to actor Alok
कोर्ट ने कहा है कि, आलोक नाथ पर आरोप लगाने वाली महिला ने उनके खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज नहीं कराई थी, ऐसे में आरोपों का स्वरूप बदलने का खतरा है। बता दें कि, 62 वर्षीय आलोक नाथ पर प्रोड्यूसर विनता नंदा ने 20 साल पुराने मामले में बलात्कार के आरोप लगाए थे। साल 2018 के अक्टूबर महीने में विनता ने फेसबुक पोस्ट पर नाम न लिखते हुए अपने शो ‘तारा’ में मुख्य किरदार निभा रहे अभिनेता पर यौन उत्पीड़िन और बलात्कार के आरोप लगाए थे।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि, शिकायतकर्ता ने एफआईआर में देरी की वजह बताई कि वह अपने दोस्तों से इस संबंध में सलाह ले रही थीं, ‘उनके दोस्तों ने कहा था कि आलोकनाथ बहुत पहुंच वाले व्यक्ति हैं ऐसे में उनके खिलाफ शिकायत करना आसान नहीं होगा।’

विनता को याद नहीं तारीख और महीना
कोर्ट ने आलोक के वकील द्वारा की गई दलीलों को ध्यान में रखा है, जिसमें कहा गया है कि नंदा ने जो शिकायत दर्ज की थी उसमें कई विसंगतियां थीं। अदालत ने कहा कि नंदा को ‘पूरी घटना याद है लेकिन उन्हें घटना की तारीख और महीना याद नहीं था।’ इसलिए, कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला है कि “संभावना है कि आलोक नाथ पर अपराध का झूठा आरोप लगाया जा रहा हो।’

अदालत ने यह भी कहा है कि, कथित यौन शोषण नंदा के घर पर ही हुआ था, इसलिए सबूत नष्ट करने की कोई संभावना नहीं थी। घटना के सालों बाद, जबकि दोनों विनता और आलोक नाथ दोनों ने अपने-अपने पार्टनर्स से शादी कर ली है, इसलिए घटना के संबंध में मेडिकल परीक्षण कराना मात्र औपचारिकता होगी।