भोपाल। होशंगाबाद जिले में पंचायत को सौंपी गई खदानों की आड़ में चल रहे रेत के अवैध उत्खनन पर एनजीटी ने संज्ञान लिया है। जिले में पंचायतों द्वारा आवंटित रेत खदानों में हो रही अवैध खनन पर एनजीटी ने रोक लगा दी है। इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है। बताया जा रहा है कि यह रोक पंचायत खदान की आड़ में हो रहे अवैध खनन और पर्यावरण के नियमों के उलंघन के चलते लगाई गई है। इस कार्रवाई के बाद माफियाओं में हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई है।
Illegal excavation under the control of panchayats, NGT stops the sand mines set up
दरअसल मप्र शासन द्वारा नई रेत नीति 2017 के अतंर्गत पंचायतों को खदानें आवंटित की गई थी, लेकिन होशंगाबाद जिले में पंचायतों को आवंटित रेत खदानों की आड़ में रेत माफियाओं द्वारा धड़ल्ले से उत्खनन किया जा रहा था। इसके साथ ही माफियाओं द्वारा कार्रवाई करने वालों के साथ गुंडागर्दी भी की जा रही थी। इसकी शिकायत ठेकेदार शिवा इंटरप्राइजेस द्वारा कलेक्टर से लेकर खनिज विभाग तक की गई थी, लेकिन केवल आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं किया गया। जब इसकी शिकायत एनजीटी से की गई तो संज्ञान लिया ।
शिवा इंटरप्राइजेज के मैनेजर ने शिकायत में बताया था कि खदानों से माफियाओं जरुरत से ज्यादा खुदाई कर रहे है, जिससे रेत का अभाव हो रहा है। इस संबंध में कलेक्टर से लेकर खनिज विभाग तक शिकायत की गई है लेकिन उनके द्वारा कोई कार्रवाई नही की गई है। उनका कहना है कि नई रेत नीति के अंतर्गत जिला खनिज विभाग को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है, वही पुलिस को भी किसी भी अवैध डंपर को रोककर पूछने का अधिकार नही है।
जिस कारण रेत माफिया बिना रॉयल्टी के धड़ल्ले से अवैध उत्खनन और परिवहन करते है। एनजीटी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए इस पूरे प्रकरण की जांच करवाई और खदानों पर किसी भी प्रकार के उत्खनन पर रोक लगा दी गई। इसकी शिकायत कंपनी के मैनेजर रमेश पैठे द्वारा की गई थी।

