ब्रजेश राजपूत की ग्राउंड रिपोर्ट
हमारे आस पास राजनीति उफान पर है इन दिनों। हर कोई राजनीति में डूब उतरा रहा है। क्या उम्मीदवार क्या उसका वोटर और क्या हम रिपोर्टर। हर कोई यही कह रहा है ये चुनाव नहीं आसान एक छूत की बीमारी है और संक्रमित होकर जाना है। पहले टिकट बंटवारे को लेकर भोपाल से दिल्ली तक कलह रही तो अब गली गली प्रचार का शोर है। मजे की बात ये है कि कल तक जो टिकट मिलने के बाद सीट निकालने का दम भर रहे थे वो मैदान में प्रचार पर आते ही सांस फुलाकर कहते हैं यार मामला थोडा टाइट है नजरे इनायत बनाये रखना।
It’s not easy to ask for votes, to scold
टिकटों के बंटवारे के बाद बागियों को बैठाने और लिटाने की चर्चा एक पार्टी दफतर में चल रही थी। पार्टी के अध्यक्ष जी हम कुछ पत्रकारों के सामने विराजमान थे और तमाम जिज्ञासाओं का समाधान कर रहे थे उसी दौरान मैंने एक अबोध सवाल पूछ मारा कि आप इतने लोगों को टिकट बांटते या टिकट काटते हो तो उनको पहले बता दिया जाये तो ये बगावत और विद्रोह कम होगा। तब राजनीति में तपे अध्यक्ष जी ने जो कहा उसे सुनकर हम हैरान रह गये।
उनके मुताबिक तीन महीने पहले हम टिकट बांटने वाले तमाम जानकारों ने एकमत होकर एक व्यक्ति को बता ही दिया था कि आप टिकट पा रहे हो। प्रचार का दफतर खोल लो और उस भले आदमी ने दफतर खोल भी लिया मगर देखिये वक्त की बलिहारी उसी व्यक्ति का टिकट ऐन वक्त पर हमें काटना पडा। ऐसी होती है राजनीति और उसके गुणा भाग जो पल पल बदलते हैं। मगर टिकट मिलना जितना मुश्किल है उससे दोगुना मुश्किल हो गया है चुनाव प्रचार, जिसमें किसी भी प्रत्याशी को उसकी नानी याद दिला देती है आजकल जनता।
बुधनी से आ रहे वीडियो देख कर लग रहा है कि अब जनता सीएम शिवराज सिंह के परिवार के लोगों को ही खरी खरी सुना देते हैं और सामान्य उम्मीदवारों का क्या होता होगा। ये सच है कि किसी भी विधानसभा की सारी समस्याएं हल करना आसान नहीं होती मगर जो बच रह जातीं है जनता उनकी ही गांठ बांध कर रखती है और प्रत्याशी को सामने देखकर ही खोल देती है। सडक नहीं बनी नाली नहीं बनी इतने दिन कहां थे महाराज वगैरह वगैरह।
हमारे एक मित्र चुनाव मैदान में है कहते है कि दिन भर के प्रचार के बाद रोज रात में कमर की मालिश करानी पडती है दिन भर मे इतनी बार झुक झुक जो सामने मिलता है पैर छूने पडते हैं कि पूछो मत। कमर ही टेढी हुयी जा रही है। हाल में एक उम्मीदवार को एक फोटो वाइरल हुआ था जिसमें वो घर के सामने अकेली खडी छोटी लडकी के सिर रखकर पैर छू रहे होते हैं, पता चला कि उन्होने घर के लोगों को आवाज दी मगर निकली सिर्फ छोटी कन्या तो उसी के पैर छुये और चल दिये।
पैर छूने पर ही याद आया कि अभी इंदौर में टीवी की डिबेट में एक बडी उमर के उम्मीदवार से उसके खिलाफ खडे हुये उम्मीदवार ने टीवी एंकर की फरमाइश पर पैर छूकर आशीर्वाद मांगना चाहा तो पहला वाला उम्मीदवार उठकर भागा। बिलकुल वैसा ही सीन बन गया जैसा संसद में मोदी और राहुल के बीच बन पडा था कि राहुल मोदी के गले लिपटे थे ओर मोदी दोनों हाथ दूर कर अवाक भाव से देख रहे थे कि ये माजरा क्या है। यहां भी वो उम्मीदवार पैरों में पडकर जीतका आशीर्वाद मांगे ओर दूसरा बार बार भागा जाये।
प्रचार के दौरान रोना धोना भी खूब पडता है। गुजरे जमाने की टीवी आर्टिस्ट और कैबिनेट मंत्री स्मृति ईरानी पिछले दिनों भोपाल में दो प्रत्याशियों के प्रचार के लिये आयीं तो दोनों को जनता के सामने ही रूला गयीं। पहले पहुंची वो भोपाल उत्तर जहां बीजेपी की इकलौती मुसलिम प्रत्याशी फातिमा सिददीकी के पिताजी की याद दिलायी और बताया कि वर्तमान कांग्रेस के उम्मीदवार ने फातिमा के पिताजी पर हमला करते थे। बस फिर क्या थी फातिमा सुबकने लगीं और सहानुभूति की लहर में सामने बैठी पब्लिक डूबने उतराने लगी।
इमोशन क्वीन स्मृति फिर पहुंची नरेला में जहां विश्वास सारंग की सभा के संबोधित करते करते कह बैठीं कि विश्वास के पिताजी अस्पताल मे बीमार चल रहे हैं उसके बाद भी विश्वास इतनी जीवटता से प्रचार में जुटे हैं बस फिर क्या था पिताजी की बात सुनते ही विश्वास भावुक हो उठे और झुककर आंखों से आंसू पोंछने लगे इस सभा में भी वही सहानुभूति की लहर बह चली। अब ये सहानुभूति की लहर वोटों की सुनामी में बदलती है या नहीं ये तो परिणाम आने पर ही पता चलेगा मगर वोट के लिये सब कुछ करना पडता है ये साफ हैं।
मगर इस चुनाव का सबसे यादगार फोटो तो वो है जिसमें रायपुर में कांग्रेस के नेता आरपीएन सिंह ने प्रेस वार्ता में गंगा जल की छोटी बाटल से गंगा जल निकाल कर हथेली पर रखा और कहा कि हम गंगा मैया की कसम खाते हैं कि सरकार आने पर दस दिन में किसानों का कर्जा माफ करेंगे, उन्होने साथ बैठे नेताओं से भी गंगा जल हाथ में लेकर वचन लेने को कहा तो साब बहुत कठिन है डगर चुनाव जीतने की वोटर को मनाने के लिये गंगा जल की कसम खाने से लेकर पैर तक छूना पडता है,,, तभी तो कहते हैं ये चुनाव नहीं आसान एक आग का दरिया है और वोटर की डांट खाना है,,,
एबीपी न्यूज, भोपाल

