जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बुजुर्ग दंपत्ति के घर से बेटे और बहू को करो बाहर

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जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर के सुहागी क्षेत्र अंतर्गत इंदिरा नगर निवासी बुजुर्ग दंपती के घर से उनके बेटे-बहू को बाहर निकाले जाने का आदेश जारी किया। न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की एकलपीठ ने बुजुर्ग दंपती को दो हजार रुपए प्रतिमाह की दर से खानाखर्चा दिए जाने का निर्देश भी जारी किया। यह व्यवस्था एसडीएम और कलेक्टर के पूर्व आदेशों को उचित पाते हुए दी गई। इसी के साथ आदेश बेटे-बहू की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका खारिज कर दी गई।
Jabalpur High Court decides to make sons and daughter-in-law out of elderly couple
बुजुर्ग दंपती की ओर अधिवक्ता शिव कुमार कश्यप ने पक्ष रखा। उन्होंने अवगत कराया कि इंदिरा नगर सुहागी निवासी 80 वर्षीय ओमकार प्रसाद रैकवार और 75 वर्षीय रमा बाई को 25 मई 2014 को उनके बेटे संतोष रैकवार और बहू रजनी रैकवार ने घर से निकाल दिया। इसके बाद उनके मकान पर कब्जा कर लिया।

बुजुर्ग दंपती ने जनसुनवाई में कलेक्टर को आवेदन दिया। कलेक्टर ने आवेदन एसडीएम जबलपुर के पास सुनवाई के लिए भेज दिया। 15 अप्रैल 2015 को एसडीएम जबलपुर ने आदेश पारित किया कि बेटे-बहू मकान खाली करें और बुजुर्ग दंपती को दो हजार रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण दें।

आदेश के खिलाफ कलेक्टर के पास अपील की गई। कलेक्टर ने आदेश को यथावत रखा। एसडीएम और कलेक्टर के आदेश के खिलाफ बेटे-बहू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 31 मई 2016 को आदेशित किया कि बेटे-बहू 15 दिन के भीतर भरण की राशि प्रदान करें और इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में जमा करें।

तब तक आदेश के क्रियान्वयन पर रोक रहेगी। एकलपीठ को बताया कि बेटे-बहू ने एकलपीठ के आदेश के अनुसार अभी तक बुजुर्ग दंपती को भरण-पोषण की राशि नहीं दी है। अपने ही घर से निकाल दिए जाने के कारण बुजुर्ग दंपती पिछले साढ़े चार साल से दर-दर की ठोंकरे खाने के लिए विवश है। सुनवाई के बाद एकल पीठ ने राज्य शासन को आदेशित किया कि बुजुर्ग दंपती के घर से बेटे-बहू को बाहर किया जाए। इसके साथ ही बुजुर्ग दंपती को भरण-पोषण की राशि दिलाने का भी आदेश दिया है।