गिरगिट के भी बाप!

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व्यंग्य
डॉ. कीर्ति काले
दिल्ली से
एक टीवी चैनल पर जोरदार बहस चल रही थी।एंकर जरूरत से ज़्यादा आक्रोशित होकर गले की समस्त छोटी बड़ी नसों को प्रमोशन की चाहत और टीआरपी बढ़ाने की भरसक कोशिश के अनुपात में तानती हुई  हड़कम्प मचाने का सीन क्रिएट कर रही थी। विपक्षी दल के नेता भी खाली बादलों की तरह जोर जोर से गरज रहे थे।
किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री को क्या यह शोभा देता है?
आज मैं  आपके चैनल के माध्यम से देश की जनता से कहना चाहता हूँ कि इनका मुख्यमंत्री पद पर बने रहना लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है।
इस घटना के बाद तो इन्हें नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए। लेकिन नैतिकता हो तब न?
त्यागपत्र नहीं दिया तो जनता जनार्दन स्वयं इन्हें कुर्सी से खींचकर पटक देगा।
बोलने की तो तमीज ही नहीं है इन्हें। इतनी अमर्यादित भाषा का प्रयोग किसी सभ्य व्यक्ति को शोभा देता है क्या? फिर ये तो मुख्यमंत्री हैं।
जिस जनता ने इन्हें कुर्सी पर बिठाया है उसकी समस्याएं सुनने तक के लिए इनके पास समय नहीं है।जब हम जैसे लोगों को मिलने के लिए चार चार घण्टे प्रतीक्षा करनी पड़ती है तो आम जनता का क्या हाल होता होगा ये आप समझ सकते हैं।
इनके शासनकाल में गरीबों की हालत बद से बदतर होती जा रही है।
कानून व्यवस्था की स्थिति तो ये है कि दिन में भी आम आदमी को सड़क पर चलते हुए डर लगता है।महिलाएँ ,बच्चे सुरक्षित नहीं हैं।
किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। मजदूर भूखों मर रहे हैं। महंगाई आकाश छू रही है।
शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग तो घोटालों का अड्डा बन गए है।भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। नेताजी (अति उत्साह में अपनी कुर्सी से खड़े होकर हाथ में कागजों का मोटा पुलिन्दा दिखाते हुए )मेरे पास 350 पेज के सबूत हैं। इन्हें मैं हमेशा अपने हाथ में रखता हूँ। पता नहीं कहाँ मीडिया मिल जाए और ये सबूत दिखाने पड़ जाएं।
और तो और चार दिन पहले वो पुल गिर गया जिस पुल का दो दिन पहले माननीय ने उद्घाटन किया था।
सड़कों की हालत इतनी खराब है कि कोई गर्भवती स्त्री इस पर चले तो अस्पताल पहुँचने से पहले ही डिलिवरी हो जाए।
एक राजनेता को मृदुभाषी होना चाहिए लेकिन इनके जैसी खुर्राट शख्सियत दूसरी नहीं है। किसी से सीधे मुँह बात ही नहीं करते।
इतनी बड़ी घटना के बाद तो इन्हें त्यागपत्र देना ही चाहिए। इन्होंने लोकतंत्र का गला घोंटा है।
मैं आपके चैनल के माध्यम से कहना चाहता हूँ कि जरा सी भी गैरत बाकी है तो अविलम्ब त्यागपत्र दे दें।
तभी खबर आयी कि मुख्यमंत्री जी का देहान्त हो गया है।
एंकर ने  तत्काल अत्यन्त दुखी मुखमुद्रा बना ली। आवाज को भारी कर लिया।
हमारा चैनल सबसे तेज, सबसे आगे है। हमें खुशी है कि हमारे चैनल पर ही  माननीय मुख्यमंत्री जी के निधन का समाचार  सबसे पहले प्रसारित हो रहा है।
वही विपक्षी नेता
आँखों में आँसू भरकर
चेहरा लटकाकर
अत्यन्त दुःखी स्वर में
ओह
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शान्ति प्रदान करे।
आज हमारे देश ने एक महान नेता,गहन विचारक खो दिया है।
उनके जाने से भारतीय राजनीति की अपूर्णीय क्षति हुई है।
भारतीय राजनीति में एक महा शून्य निर्मित हो गया  है। मैं समझता हूँ इस  शून्य का भर पाना सम्भव नहीं है।
वे अत्यन्त मृदुभाषी एवं व्यवहार कुशल व्यक्ति थे।दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उन्होंने जनता की भलाई के लिए जो निर्णय लिए वो भारतीय राजनीति के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखे जाने योग्य हैं।
वे सभी दलों में समान रूप से लोकप्रिय थे।
प्रदेश के मुख्यमंत्री होते हुए भी उनसे मुलाकात करने में किसी को कभी कोई दिक्कत नहीं आयी।आम जनता के लिए उनके घर और दफ्तर के दरवाज़े हमेशा खुले रहते थे।
ईश्वर ने बहुत जल्दी उन्हें अपने पास बुला लिया। मुख्यमंत्री तो वो थे ही लेकिन मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूँ कि उनमें प्रधानमंत्री बनने की अकूत क्षमता थी।
उनके शासनकाल में विकास के जितने कार्य हुए उतने पहले कभी नहीं हुए।
वो कुछ साल और रहते तो पूरे प्रदेश का नक्शा ही बदल देते।
उनकी अनुशासन प्रियता अनुकरणीय थी।
मैंने व्यक्तिगत रूप से उनसे बहुत कुछ सीखा है। मेहमानों का आदर सत्कार करना,सभी से प्रेम और अपनेपन से मिलना उनके ऐसे गुण थे जो बहुत कम राजनेताओं में देखने को मिलते हैं।
 दुख की इस घड़ी में हम सब उनके परिवार के साथ हैं। ईश्वर उनकी पुण्य आत्मा को अपने चरणों में स्थान दे एवं परिजनों को यह दारुण दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करे।
ॐ शान्ति शान्ति शान्ति।
तभी खबर आयी कि मुख्यमंत्री जी के निधन की  न्यूज़ फेक थी।
एंकर अचानक दुगुने जोश के साथ
अभी अभी विश्वस्त सूत्रों से यह जानकारी प्राप्त हुई है कि मुख्यमंत्री जी का निधन नहीं हुआ है।उनकी साँसें  अभी थोड़ी थोड़ी चल रही हैं।
सबसे पहले हमारा चैनल  ही यह एक्सक्लूजिव न्यूज़ दे रहा है क्योंकि हमारा चैनल है सबसे तेज सबसे आगे ।
 हमें खेद है कि मुख्यमंत्री जी का निधन नहीं हुआ है।
वही नेता
तत्काल डबल अटैकिंग मुद्रा में
जेई मैंने कही इतने हो हल्ले के बावजूद इन्होंने मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ा तो ये इतनी जल्दी जान कैसे छोड़ देंगे ? ये तो लोकतंत्र की जान लेकर ही जान छोड़ेंगे। जब तक देश में गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, महंगाई की समस्या है तब तक हम चुप नहीं बैठेंगे। ये भले ही अपनी जान छोड़ना चाहें  लेकिन हम इनकी जान को इतने सस्ते में नहीं छोड़ेंगे।इनकी अन्तिम साँस तक हम लड़ेंगे। हमारा यही कहना है कि पहले त्यागपत्र सुपुर्द करें फिर चाहे चुल्लू भर पानी में डूब मरें।
बाबूमोशाय सब टीआरपी का चक्कर है। मीडिया और नेता का डब्लू डब्लू ई ड्रामा देखकर बेचारी जनता घनचक्कर है। दोनों की नूरा कुश्ती कन्टाप है।
रंग बदलने के मामले में तो  ये गिरगिट के भी बाप हैं।
लेखिका जानी मानी कवियत्री है