वो सब कुछ जानती है
वो जानती है …..
बेटी से बहू बनने का हुनर ।
कोई नहीं समझाता है उसे अपनेपन की परिभाषा ।
वो जानती है….
दोस्त से जीवनसंगिनी
बन जाने की कला ।
कोई नहीं बतलाता है उसे
समर्पण का मतलब ।
वो जानती है…
झटपट बहन से भाभी बन जाने की करामात ।
कोई नहीं सिखाता है उसे
स्नेह का अर्थ ।
वो जानती है ….
छुटकी से छुटकी की माँ बन जाने का सलीका ।
कोई नहीं समझाता है उसे
ममत्व के मायने ।
वो जानती है…
माँ से सास में बदल जाने का तरीका।
कोई नहीं बतलाता है
उसे त्याग की व्याख्या ।
हाँ वो सब कुछ जानती है।
पर बावली हैं औरतें ,
नहीं जानती तो बस ……
अधूरी ममता का अर्थ ,
और आधे स्नेह की परिभाषा।
वो जानती है…
अर्धांगिनी का अर्थ ,
इसलिए कभी-कभी भूल जाती है अपने अधपके ख्वाबों को पकाना।
हाँ वो सब कुछ जानती है
सब कुछ …..
पर बावली है औरतें
नहीं जानती तो बस ,
अधूरे त्याग के मायने ,
और आधे समर्पण की व्याख्या….
नित्या शुक्ला
जयपुर
