उप्र और बिहार की लोक अदालतों का खर्चा दिल्ली से 200 गुना ज्यादा

0
77

TIO नई दिल्ली

दिल्ली की तुलना में उत्तर प्रदेश और बिहार की स्थायी लोक अदालतों (पीएलए) में प्रति मामले निपटान का खर्च लगभग 200 गुना अधिक है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में प्रति मामले औसत निपटान खर्च मात्र 500 रुपये है, जबकि हरियाणा में यह 766 रुपये। इसके उलट, उत्तर प्रदेश में यह राशि 1,10,895 रुपये और बिहार में करीब 1,06,000 रुपये पहुंच जाती है। राष्ट्रीय औसत प्रति मामले निपटान खर्च 2,650 रुपये है। स्थायी लोक अदालतों की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। वर्ष 2016-17 में केवल 93 हजार मामलों का निपटारा हुआ था, जो 2024-25 में बढ़कर 2.37 लाख से अधिक हो गया। यह 155 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्शाता है, जो न्याय प्रणाली की तेजी और पहुंच में मजबूती का संकेत है।
इससे स्पष्ट है कि दिल्ली के मुकाबले उत्तर प्रदेश और बिहार में खर्च 200 गुना से ज्यादा, जबकि हरियाणा की तुलना में 140 गुना अधिक है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि संसाधनों का बेहतर उपयोग करके खर्च को तर्कसंगत बनाया जाए, ताकि दक्षता और परिणामों में सुधार हो। साथ ही, प्रत्येक बैठक पर औसतन 17 हजार रुपये खर्च होने की बात सामने आई है।रिपोर्ट में स्थायी लोक अदालतों में रिक्त पदों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। बिहार, पंजाब, तमिलनाडु, राजस्थान और ओडिशा जैसे राज्यों में अध्यक्षों व सदस्यों की नियुक्ति में बड़ी कमी है, जिससे संस्थान का कामकाज प्रभावित हो रहा है। समाधान के लिए मजबूत नियुक्ति और निगरानी व्यवस्था लागू करने की अनुशंसा की गई है, जिससे इन अदालतों की पहुंच व प्रभावशीलता बढ़ सके। 2015 से 2025 के बीच देशभर में 1.61 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की गई। इसके परिणामस्वरूप पीड़ितों को कुल 2,354 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला। इसी अवधि में राष्ट्रीय लोक अदालतों के जरिए 40 करोड़ से ज्यादा मामलों का निपटारा हुआ, जबकि स्थायी लोक अदालतों में 13,11,345 मामलों का समाधान किया गया।