TIO BHOPAL
मध्य प्रदेश के लिए अच्छी खबर है। अब संक्रमितों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। 24 घंटे में 8,970 नए पॉजिटिव केस मिले हैं। ये पिछले 25 दिनों में सबसे कम हैं। वहीं, 11 मई को 10,324 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है। 6 दिन बाद स्वस्थ होने वालों की संख्या नए संक्रमितों से ज्यादा है, लेकिन कोरोनो से हो रही मौतों का आंकड़े में ज्यादा कमी नहीं आ रही।
प्रदेश में पिछले 14 घंटे में 84 लोगों की कोरोना से जान गई है। इसके साथ ही मौतों का कुल आंकड़ा 6,679 पहुंंच गया है। कोरोना से मई के 11 दिनों में 867 मौतें हो चुकी हैं। हालांकि पॉजिटिविटी रेट लगातार कम होता जा रहा है। 11 मई को यह 14% हो गया है। जो 10 मई को घट कर 15% दर्ज किया गया था। जो मई के शुरुआत में 25% तक पहुंच गया था।
प्रदेश में एक्टिव केस 1,09,928 हुए
मध्य प्रदेश में एक्टिव केस की संख्या 1,09,928 पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर में 1,597, भोपाल में 1,304, ग्वालियर में 492 और जबलपुर में 666 नए संक्रमित मिले हैं। प्रदेश में पिछले 24 घंटे में 84 मौतें हुई। इसमें भोपाल और इंदौर में 5-5 और ग्वालियर व जबलपुर में 7-7 लोगों ने कोरोना के कारण जान गंवाई, जबकि छोटे शहर रायसेन में 6, रतलाम व बैतूल में 5-5 व कटनी में 4 मरीजों ने दम तोड़ा।
कोरोना को हरा कर ठीक होने वाले मरीजों के लिए ब्लैक फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ गया है। प्रदेश में ब्लैक फंगल इंफेक्शन के सक्रिय मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। कोरोना संक्रमण के बीच ब्लैक फंगल इंफेक्शन को लेकर सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। इस फंगल इंफेक्शन की रोकथाम के लिए बुधवार को चिकित्सा शिक्षा मंत्री, हमीदिया अस्पताल के डॉक्टर ने अमेरिका के वरिष्ठ संक्रामक बीमारी के चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. मनोज जैन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की। इसमें बीमारी के कारण, फैलाव के आधार, प्राथमिक लक्षण की पहचान, इलाज और उपचार को लेकर चर्चा की गई। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि म्यूकोर (ब्लैक फंगस) के बारे में आमजन एवं मरीजों में जागरूकता के प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में देश के पहला म्यूकोर यूनिट की स्थापना होगी। प्रथम चरण में भोपाल और जबलपुर के मेडिकल कॉलेज में यूनिट की स्थापना होगी। यहां पर 10-10 बेड के वार्ड बनाए जाएंगे। संक्रमितों और संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों के लिए अलग-अलग ऑपरेशन थिएटर भी बनाए जाएंगे। सारंग ने कहा कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए रोडमैप तैयार किया गया है। ब्लैक फंगल इंफेक्शन से पीड़ित कुछ मरीजोें की सर्जरी कर इंन्फेक्टेड अंगों को निकालना पड़ा है। इसमें सबसे ज्यादा खतरा डायबिटीज के मरीजों को है। इसके कोरोना से रिकवरी के समय और बाद भी इंफेक्शन के मामले सामने आ रहे है।
क्या है ब्लैक फंगस?
ये एक फंगल डिसीज है, जो म्यूकर माइकोसिस नाम के फंगल से होता है। ये ज्यादातर उन लोगों को होता है, जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो या वो ऐसी मेडिसिन ले रहे हों, जो बॉडी की इम्युनिटी को कम करती हों या शरीर की दूसरी बीमारियों से लड़ने की ताकत कम करती हों। ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है।
ये शरीर में कैसे पहुंचता है और इसका असर
ज्यादातर सांस के जरिए वातावरण में मौजूद फंगल शरीर में पहुंचते हैं। अगर शरीर में किसी तरह का घाव है या शरीर कहीं जल गया, तो वहां से भी ये इंफेक्शन शरीर में फैल सकता है। अगर इसे शुरुआती दौर में ही डिटेक्ट नहीं किया जाता, तो आंखों की रोशनी जा सकती है। या फिर शरीर के जिस हिस्से में ये फंगल फैला है, शरीर का वो हिस्सा सड़ सकता है।
ब्लैक फंगल कहां पाया जाता है?
ये गंभीर, लेकिन रेयर इंफेक्शन है। ये फंगल वातावरण में कहीं भी रह सकता है। खासतौर पर जमीन और सड़ने वाले ऑर्गेनिक मैटर्स में। जैसे पत्तियों, सड़ी लड़कियों और कम्पोस्ट खाद में ब्लैक फंगल पाया जाता है।
इसके लक्षण क्या हैं?
शरीर के किस हिस्से में इंफेक्शन है, उस पर इस बीमारी के लक्षण निर्भर करते हैं। चेहरे का एक तरफ से सूज जाना, सिरदर्द होना, नाक बंद होना, उल्टी आना, बुखार आना, चेस्ट पेन होना, साइनस कंजेशन, मुंह के ऊपर हिस्से या नाक में काले घाव होना, जो तेजी से गंभीर हो जाते हैं।

