मध्य प्रदेश चुनाव: कभी चंबल का आतंक रहे डाकू भी मानते हैं, ‘हाइटेक डकैत हैं कई नेता’

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ग्वालियर। जब 16 साल का हुआ, तो ‘डाकू’ मलखान सिंह पहले 6 फीट 2 इंच लंबा था। वह याद करते हैं, ‘मेरी मां कहती, लड़का खाता नहीं है लेकिन शरीर मानो स्टील का बना है।’ आज, पूर्व डाकू जिसे एक समय ‘चंबल का आतंक’ कहा जाता था, 74 साल का है और एक मजबूत आवाज, लंबे बालों और माथे पर लाल तिलक के साथ स्वागत करता है। वह बताते हैं, ‘मैंने पूरी जिंदगी, शराब नहीं पी, पान-तंबाकू नहीं खाया। यही वजह है कि मुझे चश्मे या नकली दांतों की जरूरत नहीं है।’
Madhya Pradesh Election: Chadm’s panic gangs also believe that “High-Tech Dacoits Are Many Leaders”
डाकू मलखान सिंह ने 1982 में आत्मसमर्पण कर दिया था। अब वह अपने परिवार के साथ गुना में अपने खेत पर एक शांत जीवन जीते हैं। चूंकि मध्य प्रदेश में इन दिनों चुनावी हलचल तेज है, मलखान सिंह कहते हैं कि आज के कुछ नेता असली ‘डाकू’ हैं, वे ‘हाइटेक डाकू’ हैं। उन्होंने कहा, ‘हम बागी थे, विद्रोही, डाकू नहीं। हमारी ईमानदरी की लड़ाई थी।’ मलखान स्थानीय अधिकारियों द्वारा भूमि विवादों में परेशान किए जाने और अत्याचार के कारण बागी बन गए थे।

नेताओं के धोखे से ही बना बागी
मलखान सिंह ने कहा, ‘हम मजदूरों और किसानों के अधिकारों और जाति के चलते अपमानित लोगों के अधिकारों के लिए लड़े। आज नेताओं के पास इतना पैसा है मानो उनके घरों में मशीनों से नकदी प्रिंटिंग होती है।’ मलखान डाकू बनने से महाकाली के उत्साही भक्त थे और देवी मंदिर बनाना चाहते थे, लेकिन जातीय भेदभाव के कारण उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया। वह मानते हैं कि तब नेताओं और अधिकारियों से धोखा खाने के बाद ही लोग बागी बने थे।

1981 में एक पुलिस मुठभेड़ में एक अन्य कुख्यात चंबल डकैत पान सिंह तोमर की हत्या के बाद उनके भतीजे बलवंत सिंह तोमर अपने चाचा के गिरोह के सरदार बने। पुलिस उन्हें बलवंता बुलाती थी। उनके भी राजनेताओं को लेकर ऐसे ही विचार हैं। वह कहते हैं, ‘किसानों के लिए कोई न्याय नहीं है क्योंकि पटवारी और थाना प्रभारियों के पास बहुत अधिक शक्ति है। मंडी अध्यक्ष (किसान बाजार के प्रमुख) हमेशा राजनेताओं से संबंधित होते हैं और किसानों का पैसा मार देते हैं।’