10 फीसदी से ज्यादा नहीं बढ़ाया कोटा, पिछली बार 32 महिला विधायक पहुंची थी विधानसभा

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भोपाल। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की मांग का सियासी दल सार्वजनिक तौर पर समर्थन तो करते हैं लेकिन धरातल पर इसकी पहल नजर नहीं आती। प्रदेश के पिछले छह विधानसभा चुनावों को देखें तो किसी भी दल ने आधी आबादी (महिलाओं) को दस फीसदी भी उम्मीदवार नहीं बनाया।
More than 10 per cent quota, 32 women legislators had reached the assembly
2008 में सर्वाधिक 221 महिलाएं चुनावी मैदान में किस्मत अजमाने उतरीं थीं। 2013 में कांग्रेस, भाजपा, बसपा सहित अन्य दलों ने 200 महिला प्रत्याशी उतारे। इनमें से 30 के सिर जीत का सेहरा भी बंधा। इसमें उपचुनाव के नतीजों को भी शामिल कर लिया जाए तो चौदहवीं विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या 32 हो गई है। इस बार भी भाजपा-कांग्रेस में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर टिकट के लिए दावेदारी तो पेश कर दी है पर कितनी कामयाब होती हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।

राज्य में महिला और पुरुष मतदाताओं के बीच लगभग बीस लाख का अंतर है पर टिकट के हिसाब से देखें तो खाई काफी गहरी है। किसी भी चुनाव में भाजपा हो या कांग्रेस, 10 फीसदी से ज्यादा महिलाओं को उम्मीदवारी नहीं दी। जबकि, मध्यप्रदेश के निकायों (नगरीय निकाय और पंचायत) में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।

भाजपा इसका क्रेडिट भी लेती है पर विधानसभा या लोकसभा चुनाव में फामूर्ला बदल जाता है। यही बात कांग्रेस पर भी लागू होती है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो पुरुषों की तुलना में महिलाओं का ट्रेक रिकॉर्ड बेहतर रहा है। 2003 के चुनाव नतीजों पर नजर दौड़ाएं तो 199 महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में थीं।

इनमें कुल 18 (14 भाजपा, 3 कांग्रेस और 1 जनता दल यूनाईटेड) ने जीत दर्ज कराई। 2008 में 221 उम्मीदवारों में से 21 (14 भाजपा, 6 कांग्रेस, 1 समाजवादी पार्टी) के सिर जीत का सेहरा बंधा। वहीं, 2013 में 200 महिला प्रत्याशी मैदान में थीं। भाजपा ने सर्वाधिक 28 महिलाओं पर भरोसा जताया। इनमें से 22 ने जीत हासिल कर पार्टी के फैसले को सही साबित किया। बीच में देवास व नेपानगर विधानसभा के उपचुनाव हुए।

इनमें पार्टी ने महिलाओं को ही उम्मीदवार बनाया और वे जीत कर आईं। वहीं, कांग्रेस ने 23 महिला प्रत्याशी उतारे। इनमें छह ने जीत हासिल की। महिलाओं को टिकट देने में बसपा भी बाकी दलों के साथ कदमताल करती नजर आई। पार्टी ने 22 महिलाओं को सियासी मैदान में किस्मत आजमाने का मौका दिया और दो ने जीत दर्ज की।

हर जिले में चाहिए एक टिकट
प्रदेश में महिला कांग्रेस ने हर जिले में एक महिला को टिकट देने की मांग की है। प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष मांडवी चौहान ने बताया कि 80 से ज्यादा बायोडाटा आए थे, जिन्हें संगठन को सौंप दिया है। संगठन की ओर से हर जिले में कम से कम एक महिला को उम्मीदवार बनाने की मांग रखी है। वहीं, भाजपा महिला मोर्चा ने 40 से ज्यादा टिकट मांगी है। इसके पीछे तर्क यह है कि पिछले चुनाव में 28 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया था, जिसमें 22 ने जीत का परचम लहराया था।

इन्होंने जीत की थी दर्ज
भाजपा- माया सिंह, यशोधराराजे सिंधिया, ममता मीणा, पारुल साहू, अनिता नायक, ललिता यादव, रेखा यादव, उमादेवी खटीक, कुसुम महदेले, नीलम मिश्रा, प्रमिला सिंह, मीना सिंह, प्रतिभा सिंह, नंदनी मरावी, योगिता बोरकर, अर्चना चिटनिस, निर्मला भूरिया, रंजना बघेल, नीना वर्मा, उषा ठाकुर, मालिनी गौर, संगीता चारेल। उपचुनाव में जीती- गायत्री राजे पवार, मंजू राजेंद्र दादू।
कांग्रेस- झूमा सोलंकी, हिना कांवरे, इमरती देवी, शकुंतला खटीक, चंदा गौर, सरस्वती सिंह।
बसपा- ऊषा चौधरी और शीला त्यागी।