चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी…

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शशि कुमार केसवानी, बातें फिल्मी

नमस्कार दोस्तो ! आइए आज बात करते है एक ऐसी अभिनेत्री की जिसने बचपन बड़ी गुरबत में गुजारा । सभी हालातों से गुजरते हुए अपने पैर फिल्म इंडस्ट्री में जमाए। हालांकि इसके पीछे महान अभिनेता महमूद का बड़ा रोल रहा। 70-80 के दशक में लगभग सभी फिल्मों में छाई रहती थी। ये बात अलग है आजकल के युवा उन्हें भूल गए है। मेरी मुलाकात उनसे मुंबई के एक कैफे में अक्सर होती थी। कई बातें होती थी लेकिन ये बात जरूर होती थी कि आप ईरानी पारसी है पर आप सभी धर्मों में इतना विश्वास कैसे रख पाती है। वे हर बार कहती थी मुझे सब जगह एक ही भगवान नजर आते है। इसलिए मुझे मंदिर जाना, चर्च जाना सब पसंद है। मुझे याद है ऋषिकेश मुखर्जी उन्हें कहानी लिखवाते समय ही अरूणा ईरानी का रोल फिक्स कर लेते थे। उन्होंने लगभग हर पिक्चर में जगह दी। गुरबत के गुजारे हुृए दिन उनकी एक्टिंग में साफ झलकते थे। जब उन्हें गरीबी का सीन करना होता था तो वे उस रोल में वैसे ही ढल जाती थी। जब कभी चुड़ैल टाइप का रोल होता था तो उसमें वैसी ही नजर आती थी। वे हर रोल में अपने आपको ढाल लेती थी। हाल ही उनसे मुलाकात जब हुई तो उनसे दो बार कैंसर को हरा चुकी थी। किडनी की परेशानी को जमींदोज कर दिया था। 80 साल की उम्र में भी उनके चेहरे का नूर अलग ही झलकता है। उनकी जिंदादीली अलग नजर आती है। सारी परेशानियों के बावजूद हर समय मालिक ्रका धन्यवाद देते हुए नहीं थकती। हालांकि कुछ फिल्मों में काम कर रही है। पर सबका एक दौर होता है। अरूणा की सबसे अच्छी बात ये है कि पुराने रिश्ते आज भी निभाती है। आपको ये भी बता दूं कि फिल्म अभिनेत्री बिंदू की स्टेप सिस्टर है। पर मुझे उनसे मिलना और बात करना हमेशा बहुत अच्छा लगता है तो आइए आज कुछ फिल्मी बातें करते है ।
18 अगस्त 1946 को पैदा हुई अरुणा अपने आठ भाई बहनों में सबसे बड़ी थीं। एक्ट्रेस ने पढ़ाई केवल छठवीं क्लास तक ही की थी। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़नी पड़ी, क्योंकि अरुणा के परिवार के पास तब इतने पैसे नहीं थे कि वह अपने सभी बच्चों को पढ़ा सकें। अरुणा ईरानी बचपन से ही माता-पिता के साथ बाल कलाकार के रूप में पिता के नाटक मंडली में काम करती थी कम ही फैंस जानते हैं कि अरुणा ईरानी के पिता एक थिएटर कंपनी चलाते थे और इसी वजह से अरुणा का झुकाव भी शुरू से ही रंगमंच की तरफ रहा है। हालांकि, जब थिएटर में कमाई खत्म होने लगी, तब अरुणा के परिवार की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ने लगी। ऐसे में छोटी अरुणा को मदद के लिए आगे आना पड़ा। शुरूआती दिनों में उन्हें चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर छोटो मोटे रोल मिलते थे। उन्हें फिल्मों में ब्रेक दिलीप कुमार ने दिया था। वह 1961 में रिलीज हुई फिल्म ‘गंगा जमुना’ में पहली बार दिखी थीं, जिसके बाद उन्हें फिल्मों के आॅफर मिलने लगे। इन्होंने नृत्यकी, जहांआरा जैसी फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में अभिनय किया । इसके बाद इस एक्ट्रेस ने हिंदी मराठी सहित 500 से भी अधिक फिल्मों में काम किया। इसके अलावा अरुणा ने बॉलीवुड को कई सुपरहिट गाने दिए हैं, जो आज भी सदाबहार हैं।
टीवी अभिनेत्री के रूप में करियर : अरुणा ईरानी ने 2000 के बाद टीवी अभिनेत्री के रूप में अपने करियर की शुरूआत की जहां पर इन्होंने रब्बा इश्क ना होवे, मेहंदी तेरे नाम की, देश में निकला होगा चांद जैसे टीवी सीरियल में काम किया इनको 2008 में नागिन डेली सोप के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार प्राप्त हुआ।
मां नहीं बनना चाहती थीं अरुणा : बहुत कम लोग ही ये जानते हैं कि अरुणा ने 40 की उम्र में फिल्म डायरेक्टर संदेश कोहली से शादी की थी। हालांकि, वो पहले से ही शादी शुदा थे और ये उनकी दूसरी शादी थी। शादी के बाद अरुणा ईरानी ने फैसला किया था कि वो मां नहीं बनेंगी। बच्चों को लेकर अरुणा ने एक इंटरव्यू में कहा था, जब मैं अपने भतीजे-भतीजी को देखती हू तो लगता है, अच्छा है मेरे बच्चे नहीं है। घर में कोई मेहमान आए और बच्चे हंगामा करें तो मैं परेशान हो जाती हूं। मां बनने को लेकर अरुणा ने बताया था कि डॉक्टरों ने उन्हें समझाया था कि बच्चे और उनके बीच उम्र और जेनरेशन का बड़ा गैप होगा, उससे बच्चों को संभालने में दिक्कत होगी। इसलिए आज तक वो मां नहीं बनीं।
शानदार एक्ट्रेस के साथ धांसू डांसर : बॉलीवुड अभिनेत्री अरुणा ईरानी किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। वह बेशक अब सिनेमा में सक्रिय नहीं हैं लेकिन आज भी उनके द्वारा निभाए गए दमदार किरदार फैंस की जुबां पर चढ़े रहते हैं। वह फिल्मों में सिर्फ हीरोइन के किरदार में ही नहीं बल्कि खलनायिका के रूप में भी दिखीं और इसी वजह से सिनेमा जगत में हर किसी ने उनकी एक्टिंग की तारीफ की। अरुणा ईरानी ने सिर्फ हिंदी ही नहीं बल्कि कन्नड़, मराठी और गुजराती फिल्मों में भी काम किया है। आज की भाषा में कहें तो अभिनेत्री किसी पैन स्टार से कम नहीं हैं। वह ‘जहां आरा’, ‘फर्ज’ , ‘उपकार’, ‘आया सावन झूम के’, ‘कारवां’ जैसी सफल फिल्मों में काम कर चुकी हैं। एक्टिंग के अलावा, अभिनेत्री ने अपने डांस से भी फिल्मों में चार चांद लगाने का काम किया। अरुणा ने ‘थोड़ा रेशम लगता है’, ‘चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी’, ‘दिलबर दिल से प्यारे’, जैसे कई हिट गाने से बॉलीवुड की फिल्मों को यादगार बनाया है। इन गानों ने अरुणा को एक मशहूर डांसर की पहचान दी।
अरुणा का हाथ पकड़ने से शर्माते थे अमिताभ : कहा जाता है कि महानायक अमिताभ बच्चन अरुणा का हाथ पकड़ने में भी शरमाते थे। खबरों की माने तो अमिताभ बच्चन शुरूआती दिनों में जब संघर्ष कर रहे थे तो महमूद ने ही उन्हें लंबे समय तक अपने घर पर पनाह दी थी। इतना ही नहीं उन्हें फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ में लीड हीरो के तौर पर काम दिया। उस फिल्म के दौरान महमूद और अरुणा ईरानी के बीच रोमांस भी चल रहा था। इसलिए अमिताभ बच्चन हीरोइन अरुणा ईरानी का हाथ पकड़ने में बहुत शरमाते थे।
अरुणा ईरानी का महमूद के साथ जुड़ा था नाम : बहुत कम लोग जानते हैं कि अरुणा ईरानी का नाम दिग्गज अभिनेता महमूद से भी जुड़ा था। काफी पहले एक इंटरव्यू में अरुणा ईरानी ने अपने और महमूद के रिश्ते के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा कि फिल्म कारवां (1971) के बाद मुझे दो सालों तक कोई काम नहीं मिला। कारवां और बॉम्बे टू गोवा (1972) काफी हिट साबित हुई। यह दोनों फिल्में लगभग एक समय के आस-पास रिलीज हुई थीं। यह दोनों फिल्में हिट साबित हुईं, लेकिन कुछ लोगों को गलतफहमी हो गई थी कि मैंने उसी समय महमूद से शादी कर ली हैं। उन्होंने कहा कि मैंने सार्वजनिक रूप से चीजों को समझाने की कोशिश भी नहीं की और लगभग ढाई साल तक मुझे कोई काम नहीं मिला, गनीमत इस बात की रही कि दो सालों बाद मेरे पास राज कपूर का कॉल आया और उन्होंने मुझे फिल्म बॉबी आॅफर की। मैंने उनके आॅफर को तुरंत स्वीकार कर लिया सौभाग्य से फिल्म बॉबी ब्लाकबस्टर निकली। उन्होंने कहा था, हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। इसे दोस्ती, आकर्षण या कुछ और भी कह सकते हैं लेकिन हम कभी प्यार में नहीं थे। अगर प्यार में होते तो रिश्ते को जरूर आगे बढ़ाते। प्यार कभी खत्म नहीं होता है। वो हमेशा रहता है। मैं अपने बीते कल को अब भूला चुकी हूं।
ड्डश्र्।द्ध॰ त्र्दक्कञ्चक्क ष्ठद्ध ूऽर्वड्ढिं र्ड्ढि ख्न्छख्र्ञ्चक्कक्क : खबरों के मुताबिक अरुणा ईरानी को पॉपुलर विलेन प्राण से बहुत डर लगता था। दरअसल, फिल्म ‘जोहर महमूद इन हांगकांग’ की शूटिंग के दौरान अरुणा और प्राण साथ में रह रहे थे। उस वक्त अरुणा की उम्र बहुत कम थी। शूटिंग हांगकांग में हो रही थी और अरुणा को बाहर निकले काफी लंबा वक्त हो गया था। वह मुंबई अपने घर वापस जाना चाहती थी। उनका और प्राण का शूटिंग शेड्यूल बाकी लोगों से पहले पूरा हो गया। प्राण और अरुणा मुंबई के लिए निकल गए लेकिन हांगकांग से उनकी फ्लाइट डिले हो गई। अगली सुबह उन्हें फ्लाइट पकड़नी थी। पूरी रात अरुणा और प्राण को एक ही होटल में रुकना पड़ा। उस वक्त अरुणा काफी बहुत डर गई थी क्योंकि प्राण पर्दे पर हमेशा विलेन का रोल निभाते थे। उस रात प्राण ने अरुणा से कहा- ‘दरवाजा अंदर से बंद कर लो। मैं बगल वाले कमरे में रुका हूं। अगर कोई दस्तक दे तो दरवाजा मत खोलना। मुझे फोन पर बताना। उनकी इस बात ने मेरे दिल को छू लिया। उस दिन मुझे पता चला कि पर्दे का खूंखार विलेन असल में कितना अच्छा इंसान है।”


सपोर्टिंग एक्ट्रेस बनकर रह गईं अरुणा : अरुणा ने इंडस्ट्री में आने वाले नए अभिनेता और अभिनेत्रियों की काफी मदद की। उन्होंने ‘फर्ज’ में जितेंद्र, ‘बॉबी’ में ऋषि कपूर और डिंपल कपाडि?ा, ‘सरगम’ में जयाप्रदा, ‘लव स्टोरी’ में कुमार गौरव और ‘रॉकी’ में संजय दत्त की काफी हेल्प की थी, लेकिन उनका दुर्भाग्य ये रहा कि ये सभी सुपरस्टार बन गए और अरुणा सपोर्टिंग एक्ट्रेस बनकर रह गईं। हालांकि, उन्हें शानदार अभिनय के लिए ‘पेट प्यार और पाप’ (1985) और ‘बेटा’ (1993) के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग अवॉर्ड मिल चुका है। 2012 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। अपने करियर के दौरान अरुणा कई मराठी फिल्में भी कर चुकी हैं। इतना ही नहीं उन्होंने बड़े पर्दे के साथ छोटे पर्दे पर भी किस्मत आजमाई। 2000 में उन्होंने धारावाहिक ‘जमाना बदल गया’ से छोटे पर्दे पर अभिनय की शुरूआत की। ‘कहानी घर घर की'(2006-2007), ‘झांसी की रानी’ (2009-2011), ‘देखा एक ख्वाब’ (2011-2012), ‘परिचय’ (2013-2013), ‘संस्कार धरोहर अपनों की’ (2013-14) जैसे कई टीवी शोज में अरुणा अहम किरदार निभा चुकी हैं।
अरुणा ईरानी को हो चुका है दो बार ब्रेस्ट कैंसर : अरुणा ईरानी ने लेहरेन रेट्रो को इंटरव्यू दिया है। इसमें उन्होंने बताया कि वह एक बार नहीं दो बार ब्रेस्ट कैंसर का शिकार हो चुकी हैं। पहली बार जब उन्हें कैंसर का पता चला था तो वह शूटिंग कर रही थीं। उन्हें अचानक लगा कि कुछ सही नहीं है। डॉक्टर ने पहले इसे मामूली गांठ बताया, लेकिन उन्होंने रिस्क नहीं लिया और तुरंत उसे फिर चेक करवाया तो पता चला कैंसर हैं। उन्होंने उसे निकलवा दिया। डॉक्टर ने अरुणा को कीमोथेरेपी लेने की सलाह दी थी, लेकिन बाल झड़ने और स्किन खराब होने के डर से उन्होंने मना कर दिया था। अरुणा ने कहा, “डॉक्टर ने कहा था कि दवाई लेनी होगी, तो मैंने वही चुना क्योंकि मैं काम कर रही थी। सोचिए, अगर बाल झड़ जाते तो शूटिंग कैसे करती?

अरुणा ईरानी बोली-जीवन के अंत तक काम करना चाहती हैं

अरुणा इरानी ने कहा, जीवन के आखिरी दिन तक मुझे सिर्फ काम करना है। काम रहता है तो शरीर भी ठीक रहता है। कोई बीमारी नहीं लगती। बैठे-बैठे रहने से बीमार पड़ जाते हैं, इसलिए कभी रुकना नहीं चाहिए। मैं कभी घर नहीं बैठी। कुछ न कुछ करती रहती हूं। असल जिंदगी में मैं हमेशा खुश रहती हूं।
मेरे मुताबिक खुशी बाहर नहीं, बल्कि हमारे अंदर होती है। हम संतोष नहीं करते हैं, इसलिए निराश रहते हैं। खुशी रुपए से नहीं मिलती। जिंदगी में कहीं न कहीं हमें इच्छाओं पर काबू करना होगा। इच्छाएं तो हमेशा बढ़ती रहती हैं। उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करना चाहिए, लेकिन पूरी न होने पर डिप्रेस भी नहीं होना चाहिए। मुझे जिंदगी में किसी चीज के न होने का गम नहीं है। बहुत पॉजिटिव हूं। गरीब परिवार से थी, जहां दो वक्त का खाना तक नसीब नहीं होता था। पढ़ने के पैसे न होने की वजह से सिर्फ छठी क्लास तक ही पढ़ सकी। उसके बाद भी प्रभु ने इतना कुछ दिया। अगर दिल में लगन और गोल अचीव करना है, तो मेहनत करना होगी। जो मेहनत करता है, अड़चनें भी उसे ही आती हैं। उन्हें फेस करना ही होगा। अरुणा ने कहा, वर्तमान दौर में उन्हें आलिया भट्ट, रणवीरसिंह और वरुण कपूर बहुत पसंद हैं। अपने किरदार के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, मेरी भूमिका की सबसे अच्छी बात यह है कि वह हर छोटी-छोटी चीजों में खुशियां तलाश लेता है। आखिरकार जिंदगी बहुत मुश्किल होती है। खासतौर से उन लोगों के लिए जो इस बात से कभी संतुष्ट नहीं होते हैं कि उनके पास क्या है और हमेशा ही ज्यादा पाने की चाहत रखते हैं। अक्सर लोग छोटी-छोटी चीजों की बजाय, बड़ी-बड़ी चीजों में खुशियां ढूंढते हैं। खुशियां चुनना हम पर निर्भर करता है और मंजिल सफर से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।