गरीबी से जूझ रहे पाक पर नया संकट, आर्मी को बलूच सैनिकों की बगावत का डर, सोशल मीडिया पर लगाई रोक

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नई दिल्ली। आंतकवाद, गरीबी से जूझ रहे पाकिस्तान में अब नया खतरा मंडराने लगा है। पाकिस्तान आर्मी ने अपने सभी जवानों, अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया बैन कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान आर्मी को बलूच सैनिकों की बगावत का डर है। इसे रोकने के लिए पाकिस्तान ने सोशल मीडिया बैन करने जैसा कदम उठाया है। पाकिस्तान आर्मी के हेडक्वॉर्टर से जारी किए गए नोटिफिकेशन में कहा गया है कि कई नोटिस के बावजूद अलग-अलग सोशल मीडिया ग्रुप में सेंसेटिव जानकारी लीक हो रही है जो पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
New crisis on Pakistan suffering from poverty, Army fears rebellion of Baloch soldiers, prevention on social media
इसमें कहा गया है कि चेतावनी के बावजूद आधिकारिक पत्राचार के लिए सोशल मीडिया नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है जो बहुत रिस्की है। इसलिए सभी ऐक्टिव और रिटायर्ड फौज के लोगों को यह निर्देश दिए जा रहे हैं कि वह सोशल मीडिया ग्रुप, पेज और किसी भी ऐसे प्लेटफॉर्म में ना रहें, जहां मिलिटरी से जुड़ी कुछ भी जानकारी हो। 30 जनवरी तक ऐसे प्लेटफॉर्म को बंद करने को कहा गया है ,नहीं तो ऐडमिन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

बगावत का डर
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान आर्मी का यह कदम बलूच बगावत को लेकर उनके डर की वजह से उठाया गया है। उन्हें डर है कि पाकिस्तान आर्मी में बूलच कहीं बगावत पर ना उतर जाएं। पाकिस्तान में बलूचिस्तान को आजाद करने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है और बलूची नेता सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने पाकिस्तान आर्मी के खिलाफ एक नारा दिया था, ‘ये जो दहशतगर्दी है इसके पीछे वर्दी है।’ यह नारा सोशल मीडिया में बहुत चर्चा का विषय भी बना। बलूची ऐक्टिविस्ट सोशल मीडिया में लगातार इस तरह के विडियो पोस्ट करते रहते हैं, जिसमें वह दिखाने की कोशिश करते हैं कि पाकिस्तान आर्मी बलूचिस्तान के लोगों पर कितना जुल्म कर रही है। सुरक्षा एजेंसी सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान आर्मी में बलूचिस्तान के लोग भी हैं और उन्हें डर है कि कहीं वह बगावत पर ना उतर आएं। इसलिए अब उन्हें सोशल मीडिया से दूर रखने की कोशिश हो रही है।

पाकिस्तान की दुखती रग
बलूचिस्तान पाकिस्तान की दुखती रग भी बन गया है। जब कभी पाकिस्तान कश्मीर की बात उठाता है तो भारत की तरफ से भी अब बलूचिस्तान की बात उठाई जाती है। 2016 में तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से अपनी स्पीच में बलूचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन का मसला उठाया था। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक पिछले महीने पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने बलूचिस्तान के चीफ मिनिस्टर से मुलाकात कर कहा कि पाकिस्तान की आर्म्ड फोर्स का एक अहम मकसद बलूचिस्तान में कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रखना है, क्योंकि पाकिस्तान की प्रगति शांति और स्थिरता से जुड़ी है। जनरल बाजवा पहले भी बलूचिस्तान के युवाओं को आर्मी से जोड़ने के लिए कई प्रयास करते रहे हैं। बलूचिस्तान में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, ‘बलूचिस्तान के 20 हजार बेटे आर्मी में हैं। जिसमें 603 आॅफिसर्स हैं। वह दिन दूर नहीं जब आप में से कोई मेरी जगह पर खड़ा होगा और यहां के युवाओं से बात कर रहा होगा।’