विपक्षी एकता को मजबूत करने राजनीतिक दल 22 को करेंगे अहम बैठक, मतदाताओं को देंगे संदेश

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता को मजबूत बनाने में लगे राजनीतिक दल 22 नवंबर को राजधानी में अहम बैठक करेंगे। इस बैठक में हिस्सा लेने वाले सभी विपक्षी दल न केवल 2019 में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को रोकने की रणनीति पर चर्चा करेंगे बल्कि इस बैठक के जरिए वे चुनावी राज्यों में विपक्षी एकता का संदेश भी देंगे। विपक्षी दलों की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं।
Political party will make important meeting to strengthen opposition unity, give message to voters
भले ही इन पांचों चुनावी राज्यों में बीजेपी और कांग्रेस की बीच ही सीधी टक्कर दिख रही हो। लेकिन इसके बावजूद एनडीए के विरोध में बनी विपक्षी एकता इन राज्यों के वोटर्स को यह संदेश जरूर देना चाहेगी कि वह आने वाले आम चुनावों में एनडीए के विकल्प के रूप में मजबूती से खड़े हैं। राजनीतिक दलों के दिमाग में अगले साल होने वाली बड़ी लड़ाई (लोकसभा चुनाव) अभी से है। टीएमसी, टीडीपी, एनसी, डीएमके, जेडी (एस), सीपीआई, सीपीएम, आप, एसपी, आरजेडी और आरएलडी जैसे दल ‘लोकतंत्र बचाओ, देश बचाओ’ का लक्ष्य लेकर एकसाथ मैदान में उतरने को तैयार हैं। इन सभी दलों का मानना है कि बीजेपी ही इनकी ‘आम दुश्मन’ मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी है।

बता दें करीब एक साल पहले विपक्षी दलों को एक ही मंच पर लाने की पहल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की थी। ममता ने बीजेपी के सभी विरोधियों को उसके खिलाफ लड़ने के मकसद से एकसाथ एक मंच पर लाने का काम किया था। इसके बाद ममता की इस मुहिम को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इसे आगे बढ़ाया। अब दोनों प्रमुखता से इन मुहिम में ‘समन्वयक’ की भूमिका निभा रहे हैं।

माना जा रहा है कि गुरुवार को होने वाली इस बैठक में दिसंबर-जनवरी के बीच 4 बड़ी रैलियां आयोजित करने की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। भले ही विपक्ष के सभी प्रमुख नेता इस मीटिंग में भाग लेने को तैयार हों, लेकिन इतना साफ है कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती इस बैठक में भाग नहीं लेंगी। इससे पहले मायावती ने अभी हाल ही में चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात की थी।

हालांकि इस मुलाकात के बाद मायावती ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में चुनाव मैदान में अकेले ही उतरने का फैसला किया। अटकलें यह भी हैं कि बीएसपी की तरफ इस बैठक में मायावती संतीश चंद्र मिश्रा को भाग लेने के लिए भेज सकती हैं। इसी बैठक में विपक्ष 11 दिसंबर से शुरू होने जा रहे संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति पर भी चर्चा करेगा।