प्रभात झा : चुनावी गेम में लीड बरकरार रखने की चुनौती

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पंकज शुक्ला

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा मप्र से राज्यसभा सदस्य प्रभात झा को मप्र भाजपा ने अपना मीडिया समन्वयक बनाया है। यूं तो यह पार्टी का अंदरूनी मामला है कि वह अपने किस नेता को क्या जिम्मेदारी देती है, लेकिन चुनावी वर्ष में जब कांग्रेस और भाजपा में बाजी जीतने के लिए हरसंभव चालें चली जा रही हों तब नेताओं की जिम्मेदारियों में फेरबदल को जानना भी जन सरोकार का विषय हो जाता है। भाजपा में हुआ यह परिवर्तन भी ऐसे ही संकेत देता है।
Prabhat Jha: The Challenge of Maintaining Lead in Election Games
प्रभात झा को मीडिया समन्वय का जिम्मा दिया गया है मतलब साफ है कि पार्टी मीडिया में अपनी छवि को लेकर चिंतित और गंभीर है। ऐसे में अब झा पर जिम्मेदारी आ गई है कि वे 2018 में मिली लीड को बरकरार रखने में अपने पाले की भूमिका वैसी ही निभाए जैसी कार्यशैली के लिए वे जाने जाते हैं।

प्रभात झा को हमने कुछ समय पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का कार्य करते हुए देखा है। वे पेशे से पत्रकार रहे हैं तथा भाषा-शब्दों के धनी हैं। उनकी स्मृति भी तेज है और कार्यशैली भी आक्रामक। वे साफ बोलने में यकीं रखते हैं और इस कारण कई बार अपने करीबियों को भी नाराज कर देते हैं। वे जोखिम उठाते हैं और अपनी रेखा बड़ी करने में भरोसा करते हैं। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने प्रदेश को माप डाला था और अपना नेटवर्क खड़ा किया था।

अपनी कार्यशैली के कारण ही वे कोपभाजक भी बने और अब वही कार्यशैली उन्हें एक बार फिर उस भूमिका में ले आई जिसके लिए वे ग्वालियर से भोपाल आए थे। ग्वालियर स्वदेश में काम करने के दौरान मिला पत्रकारिता का अनुभव हर जिम्मेदारी निभाते समय उनके बड़े काम आया है। अब तो मीडिया से समन्वय का ही जिम्मा मिला है जो उनके लिए बाएं हाथ का काम है।

असल में उन्हें न केवल मीडिया में अपनी सरकार और पार्टी की छवि को दमदारी से रखना है, बल्कि पार्टी प्रवक्ताओं और मीडिया पैनलिस्टों की टीम को भी सचेत, सजग और सक्रिय करना है। वे ऐसे कप्तान होंगे जिसकी टीम को अंतिम ओवरों में विपक्ष की हर गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचाना है।

साथ ही, झा को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जुलाई में आरंभ हो रही जनआशीर्वाद यात्रा का प्रभारी भी बनाया गया है। यानि, झा पर दोहरी जिम्मेदारी है। वे भोपाल की गतिविधियों के केन्द्र में तो होंगे ही, शिवराज की यात्रा को जनचर्चा के केन्द्र में लाने के जतन करने का दायित्व भी उन पर ही होगा। झा को अपनी कर्मस्थली मप्र में मिला यह जिम्मा इस बात का भी संकेत है कि काबिलयत को बहुत अधिक किनारे नहीं किया जा सकता। संकटकाल में पार्टी अपने कुशल कार्यकर्ताओं को याद करती ही है।

बीते समय में झा अपने बुरे स्‍वास्‍थ्‍य को मात दे कर राजनीतिक रूप से सक्रिय हुए हैं। उनके समर्थक मानते हैं कि वे कई बार भावुकतावश तीखे शब्दों और व्यवहार का उपयोग कर देते हैं जिससे उनकी छवि नकारात्मक बनती है। ऐसा हो नहीं सकता कि झा अपने व्यक्तित्व के इस पहलू को न जानते हों। उम्मीद की जा सकती है कि वे इस तथ्य पर गौर कर कांग्रेस के लिए तीखे तेवरों के साथ पेश आएंगे। यदि ऐसा हुआ तो कांग्रेस के स्टार प्रचारक और चुनाव अभियान समिति के प्रमुख सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अन्य नेताओं को झा का जवाब जल्द खोजना होगा।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार है