सियासत में संजय… सुर्खियां भी और मुसीबत भी

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बाखबर/ राघवेंद्र सिंह
महाभारत से लेकर सियासत तक में संजय के जलवे भी रहे हैं, वो सुर्खियों में भी हैं और सच लिखने और बोलने वाले मुसीबत पैदा करने वालों में शुमार हैं। चुनाव के महाभारत में हमें कुछ संजय ऐसे दिखे हैं, जिन्होंने सुर्खियां भी बंटोरी हैं और समस्याएं भी खड़ी की हैं। सबसे पहले हम बात करेंगे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी के भाई संजय सिंह मसानी की।
Sanjay in politics … headlines and trouble too
तेजतर्रार ये संजय जब तक भाजपा में रहे वारासिवनी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के लिए मुसीबत बने। मगर अब सीन बदला हुआ है और कांग्रेस में शामिल होने के बाद वे उस भाजपा के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं, जिसके लिए वे कम से कम पिछले 13 साल से मध्यप्रदेश में काम कर रहे थे। कई सारे संजयों में संजय मसानी चर्चा के हिसाब से पहले क्रम पर आते हैं।

हम जिन संजयों की बात कर रहे हैं उसमें मसानी साब का जलवा और काम करने की गति अगर वे बुरा न मानें तो कांग्रेस के संजय गांधी से भी कर सकते हैं। मेहनत करने और जोखिम भरे निर्णय लेने में उनका कोई सानी नहीं है। यही वजह है कि अपने जीजा साहब जो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं, कल तक उनकी ताकत बढ़ाने के िलए दिन-रात एक करते थे।

लेकिन अब वो जो भी कुछ कर रहे हैं उसमें कम से कम शिवराज सिंह चौहान का कोई लाभ नहीं है, सिवाय नुकसान के। राजनीति की उलटबासियों में कहने वाले कह सकते हैं कि संजय मसानी कांग्रेस में मुख्यमंत्री के द्वारा प्लांट किए गए हैं। ऐसा कहने-सुनने वाले संजय और शिवराज दोनों के साथ न्याय नहीं करेंगे। हम सिर्फ इतना कहेंगे कि जीजा मुख्यमंत्री की पद-प्रतिष्ठा का ‘सदुपयोग’ करते हुए गोंदिया के संजय वारासिवनी विधानसभा सीट के सितारे बन गए हैं, जहां भाजपा के सितारे उनकी वजह से गर्दिश में जा सकते हैं।

इसके बाद दूसरे संजय विजयराघवगढ़ से ताल्लुक रखते हैं। ये संजय पाठक कांग्रेस और भाजपा के घाट का पानी पीते रहे हैं। अभी वे भाजपा के घाट पर ही चुनाव लड़ रहे हैं। इनकी खास बात यह है कि उन्हें राजनीति के ऐसे गुर पता हैं जिसमें उनका दोस्त और दुश्मन कौन होगा, ये वो खुद तय करते हैं। कांग्रेस में रहे तब भी वह सुर्खियों में थे, इसके बाद भाजपा में आए और मंत्री बने, प्रधानमंत्री के साथ मंच शेयर करने का गौरव भी हािसल किया और अब भाजपा से कांग्रेस में शामिल होकर उनके खिलाफ उम्मीदवार बने पदमा शुक्ला को लेकर भी वह सुर्खियों में हैं।

ऐसे ही संजय में तेंदूखेड़ा के विधायक संजय शर्मा भी शरीक हैं। माननीय के सियासत का सफर कांग्रेस से होते हुए भाजपा तक आ पहुंचा है। ये संजय भी विजयराघवगढ़ के संजय पाठक की तरह राजनीति के जादूगर हैं। अभी तक पराजय इनके पास नहीं फटकी है। सियासत की शतरंज में ये दूसरे की चालें खुद तय करते हैं। मसलन, पहले ये कांग्रेस में थे, फिर भाजपा में आए और विधायक बने।

अब बतौर भाजपा विधायक पार्टी छोड़ी और फिर कांग्रेस में चले गए। कमाल की बात ये है कि यह जनाब अब तेंदूखेड़ा से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। इनकी जादूगरी यहीं नहीं रुकती है बल्कि भाजपा में इनके खिलाफ जो उम्मीदवार बनाए गए हैं मुलायम सिंह पटेल ये भी पहले कांग्रेस में थे और कुछ दिन पहले ही पटेल साब भाजपा में शामिल होते हैं और चौंकाने वाली बात ये है कि भाजपा इन्हें अपना उम्मीदवार घोषित कर देती है। अब भला ये संजय शर्मा कैसे हार सकते हैं और कौन इन्हें हरा सकता है।

चौथे संजय शर्मा बड़नगर विधानसभा से जुड़े हैं। ये हैं तो भाजपा के, लेिकन कमाल ये है कि इन्होंने भाजपा के जितेंद्र पांडे को बी फॉर्म मिलने के बाद उम्मीदवारी से बेदखल करा दिया। चौंकाने वाली बात ये है कि पांडेजी का पत्ता काटकर भाजपा ने इन संजय शर्मा को अपना उम्मीदवार बना दिया। भाजपा में ऐसा बहुत कम होता कि बी फॉर्म किसी को दें और उम्मीदवार कोई और बन जाए।

हैं ना ये सब कमाल के संजय, जो सियासत में सुर्खियां भी बंटोर रहे हैं, चुनाव भी लड़ रहे हैं और जीत गए तो पांचों उंगलियां घी में और सिर कढ़ाई में होगा। इसके अलावा मीडिया में भी ऐसे संजय हैं जो सच लिखने, पढ़ने और बोलने का काम करते हैं। इन्हें हम महाभारत के संजय की तरह मान सकते हैं जो राजनीति के रण में बिना किसी पाले में बैठकर सच बताने की कोशिश में लगे हैं। कुल मिलाकर इस चुनाव में संजय सुर्खियों में, मुसीबत में और कुछ मजे में भी…