शिवराज सिंह की नयी फिल्म टाइगर अभी जिंदा है

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ब्रजेश राजपूत

वो उनका उस घर में आखिरी दिन था जिस घर में वो पिछले तेरह सालों से रह रहे थे। बहुत भावुक हो रहे थे इस घर से उनकी ना जानें कितनी अच्छी यादें जुडी हुयीं थीं। और ये वो घर था जो प्रदेश में सत्ता का प्रतीक है जी हां मुख्यमंत्री निवास छह शामला हिल्स। शिवराज बोल रहे थे कल शाम हमने नये मुख्यमंत्री जी को बुलाकर सब दिखा दिया पीछे वाला मंदिर तक ले गये, वहां भी फूल चढवा दिये। अब कुछ दिन लिंक रोड के बंगले पर फिर बाद में सुषमा जी वाले बंगले में रहने चला जाउंगा। मैंने कहा आप भावुक हो रहे हैं तो उनका जबाव था अरे नहीं जैसे आये थे वैसे चल दिये। अब आपसे नये घर में मुलाकात होगी बैठकर गप्पें करेंगे आते रहियेगा।
Shivraj Singh’s new movie Tiger is still alive
मगर सच तो ये था कि उस नबावकालीन बंगले से निकलते समय मैं भावुक था और मेरे दिमाग में इस बंगले से जुडी अनेक यादों की तस्वीरें घूम रहीं थीं। पूर्व मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ला के समय से सीएम हाउस में तब्दील हुये भोपाल की बेइंतहा खूबसूरत झील के किनारे बसे इस बंगले में मैंने दिग्विजय सिंह को सीएम रहते हुये एक साथ फाइलों पर साइन करते हुये और क्रिकेट मैच देखते हुये देखा तो और रात में दो बजे तक लोगों से मिलते और हम टीवी वालों को बाइट देते हुये देखा, 2003 में उनकी विदाई और इसी बंगले के लान में खडे होकर हार की जिम्मेदारी लेते हुये भी दिग्गी राजा को देखा तो उमा भारती को भारी बहुमत से यहां शान के साथ आते देखा, इसी बंगले में उमा भारती का जनता दरबार और उसमें उमडी भीड देखी थी जिसे देखकर उमा रो पडीं थीं बाद में उमा की विदाई और बाबूलाल गौर की इस बंगले में अगवानी देखी थी, बाबूलाल गौर का पलटना भी देखा था जब उमा को पार्टी से हटाया गया तो गौर ने इसी बंगले में टीवी कैमरों के सामने उमा को डूबता जहाज कह कर हंसी उडायी थी।

सीएम गौर के आतिथ्य में तत्कालीन सीएम नरेद्र मोदी की बैठक भी हमने इसी बंगले में देखी थी जब हम मीडिया वालों ने मोदी से पूछा था कि कूनो पालपुर में कब गिर के शेर भेजोगे तो उन्होंने पलटकर कहा था कि पहले आप सब गिर आकर शेर को देखकर जाइये भेजने की बात बाद में करेंगे। मोदी गांधी नगर से दिल्ली पहुंच गये मगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी कूनो पालपुर अब तक शेर नहीं पहुंचे। हमने इसी बंगले के कैंपस में बारह महीने तना रहने वाला टेंट देखा तो इसी घर की बालकनी से पिछले तीन चुनावों में लगातार जीत के बाद शिवराज सिंह के परिवार से हाथों की विक्टी साइन बनाकर प्रफुल्लित मुद्रा में फोटो खिचवाते देखा था दूर क्यों जाये ठीक पांच साल पहले पिछले विधानसभा चुनावों में शिवराज की जीत के बाद हमने यहीं पर सीएम के साले संजय सिंह मसानी का अपने कारोबारी मित्रों के साथ विजयी नृत्य देखा था। मगर अब सब कुछ बदल गया है संजय सिंह की प्रतिबद्वता से लेकर शिवराज सिंह का समय तक।

शिवराज सिहं अब स्वामी दयानंद नगर के बंगले बी आठ में है। जहां उनसे पहले दिन मिलने आये किसानों से वो जमीन पर बैठ कर मिले और कहा कि बंगला जरूर छोटा है मगर आपकी जगह दिल में है। इसमें कोई शक नहीं कि शिवराज सिंह ने जनता के दिलों में अपनी जगह बनायी है। वो बेशक प्रदेश के सबसे लोकप्रिय राजनेता है। जिस जमाने में नेता मंत्री अपनी कुसी पर लगे टावेल तक पर धूल नहीं लगने देते उस दौर में शिवराज अपने से मिलने आये लोगों को गले लगाने को बेताब दिखते हैं। इसी सीएम हाउस के उस बारमासी पंडाल में जो आखिरी कार्यक्रम हुआ वो सिहोर से आये बीजेपी कार्यकर्ताओं और महिलाओं का था।

जो शिवराज से मिलकर जाते हुये रो रहीं थी और शिवराज उनको अपने सीने से लगाकर बडे भाई समान ढाढस बंधा रहे थे। इसी भीड को संबोधित करते हुये शिवराज ने वो डायलाग मारा जो लोगों को माई के लाल के समान लंबे समय तक याद रहेगा घबराना नहीं टाइगर अभी जिंदा है। विदाई के भारी पलों को भी कैसे हल्के व्यंग्य से हंसी खुशी में बदल देना शिवराज को बेहतर आता है हर चीज में वो आनंद खोजते हैं ये अलग बात है कि उनके आनंद विभाग का नयी सरकार बोरिया बिस्तर बांधने के मूड में है।

सीएम हाउस खाली करने वाले दिन ही दोपहर में शिवराज सिंह पठानकोट एक्सप्रेस से बीना गये तो रास्ते भर उनके साथ सेल्फी और स्वागत का दौर चलता रहा। शिवराज का चार्म सीएम पद गंवाने के बाद भी कम नहीं पडा है। उनके किसी आलोचक ने कहा कि फूल डाली से टूटने के बाद भी कुछ वक्त तक खशबू तो बिखेरता ही है। अब शिवराज के सामने चुनौती अपनी खुशबू को लंबे समय तक बरकरार रखने की है। और वो खुशबू शिवराज के मामा बनकर बने रहने में ज्यादा रहेगी टाइगर बनकर गुर्राने में नहीं।
एबीपी न्यूज, भोपाल