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TIO गुरुग्राम

दिल्ली ब्लास्ट में फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी का कनेक्शन सामने आने के बाद अब इसके फाउंडर जावेद अहमद सिद्दीकी भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। जांच एजेंसियों की तरफ से खुलासा किया गया है कि यूनिवर्सिटी को संचालित करने वाली चैरिटेबल ट्रस्ट में सिद्दकी ने अपनी वाइफ, बेटी और भाइयों को ट्रस्टी बना रखा है। साथ ही दुबई में रहने वाली एक रिश्तेदार भी ट्रस्टी है।
यूनिवर्सिटी के संचालन में विदेशी फंडिंग के शक के चलते अब ED फंडिंग पैटर्न की जांच कर रही है। कैंपस में पुलिस से लेकर एनआईए, एसटीएफ और एनएसजी के पहुंचने के बाद मैनेजमेंट ने यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबपोर्टल भी बंद कर दी है। साथ ही इंटरनेट से यूनिवर्सिटी से जुड़ी डिटेल्स हटाई जा रही हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों का शक और गहरा गया है।
राजनीतिक पहुंच का सहारा लेकर यूनिवर्सिटी बनाने का आरोप जांच एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जावेद सिद्दीकी ने राजनीतिक कनेक्शन का फायदा उठाकर इस यूनिवर्सिटी को साल 2014 में तैयार किया गया था। मान्यता दिलाने में सत्तारूढ़ पार्टी के नेता की मदद मिली। अल फलाह यूनिवर्सिटी की मान्यता से जुड़े मामले में जल्द ही हरियाणा सरकार भी एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाली है।
जानिए कौन है जावेद अहमद सिद्दीकी…
- मध्यप्रदेश के रहने वाले जामिया में लेक्चरर रहे: जावेद अहमद सिद्दीकी का जन्म 15 नवंबर 1964 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ। इंदौर की देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से बीटेक करने के बाद वे जामिया मिलिया इस्लामिया में 1992 से 1994 तक लेक्चरर रहे।
- भाई के साथ मिलकर इंवेस्टमेंट कंपनी बनाई: भाई साऊद अहमद सिद्दीकी के साथ मिलकर उन्होंने 1992 में अल फलाह इन्वेस्टमेंट कंपनी शुरू की। अब यह कंपनी शिक्षा, सॉफ्टवेयर, ऊर्जा और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में फैली नौ कंपनियों की पेरेंट है। इनमें अल फलाह मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन, अल फलाह डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और अल फलाह एजुकेशन सर्विसेज शामिल हैं। अधिकांश कंपनियां दिल्ली के जामिया नगर स्थित एक ही पता यानि अल फलाह हाउस पर रजिस्टर्ड हैं।
- राजनीतिक संबंधों का फायदा उठाया: सिद्दीकी ने राजनीतिक संपर्कों का खुलकर फायदा उठाया। 1997 में इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में शुरू हुई अल फलाह मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन को 2014 में हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत मान्यता मिली। सूत्रों के मुताबिक सिद्दीकी के सभी पार्टी के नेताओं से अच्छे रिलेशन थे। जिन्होंने जमीन खरीद और मंजूरी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा कराया।
- फाइनेंशियल फ्रॉड के आरोप: सिद्दीकी पर फाइनेंशियल फ्रॉड के भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। नई फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में दर्ज एक एफआईआर में जावेद और सहयोगियों पर धारा धोखाधड़ी, विश्वासघात, जालसाजी और षड्यंत्र के आरोप लगे थे। शिकायतकर्ता केआर सिंह ने आरोप लगाया कि अल फलाह ग्रुप ने फर्जी निवेश योजनाएं चलाकर लोगों से 7.5 करोड़ रुपए ऐंठे हैं। इससे पहले महू में भी इनके खिलाफ चिट फंड स्कीम चलाकर फ्रॉड करने के आरोप लगे थे।
- जमानत खारिज, तीन साल जेल में रहे: साल 2003 में दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत खारिज कर दी और वे तीन साल जेल में रहे। 2004 में निवेशकों को रिफंड करने पर बेल मिली और बाद में केस सेटल कर लिया गया। साल 2007 में साकेत कोर्ट में एक और शिकायत आई, जिसमें शमीमा, सुफयान और मोहम्मद तारिक को भी नामजद किया गया।
ट्रस्ट का संचालन परिवार के हाथ में अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन और मैनेजिंग ट्रस्टी जावेद के अलावा उनकी पत्नी शमीमा सिद्दीकी, बेटी आलिया सिद्दीकी, भाई सुफयान अहमद सिद्दीकी और साऊद अहमद सिद्दीकी ट्रस्टी हैं। रिश्तेदार उस्मा अख्तर और शीमा सिद्दीकी भी जुड़ी हुई हैं। यह पारिवारिक नियंत्रण ट्रस्ट को मजबूत बनाता है।
दुबई से यूनिवर्सिटी का लिंक ट्रस्ट से जुड़ी उस्मा अख्तर अल-फलह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग की गवर्निंग बॉडी की सदस्य हैं। वह वर्तमान में दुबई में रह रही हैं। उनके LinkedIn प्रोफाइल के अनुसार, वह इंटीरियर फिटिंग और कपड़ा व्यवसाय से जुड़ी हैं। एजेंसियां जांच कर रही हैं कि कहीं वित्तीय लेन-देन और नेटवर्किंग के माध्यम से दुबई में बैठकर भारत में गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश तो नहीं की गई।


