शशी कुमार केसवानी
आज जिन्दगी का एक और बरस खत्म हो चला!!!
कुछ पुरानी कुछ नई कड़वी यादें पीछे छोड़ चला..
बहुत कुछ ख्वाहिशें दिल की दिल में रह गई हैं..
कुछ बिन मांगे मिल मिल गई हैं ..
कुछ नई ख्वाहिश जुड़ी
कुछ पुरानी ख्वाहिश टूटी
सफर में बहुत अपने छोड़ कर चले गये….
नयो से जुड़ न सके इस सफर में…
कुछ मुझसे बेवजह खफा हो गये
कुछ मुझसे बेवजह खुश हो गये
कुछ मुझ से मिल के मुझे ही भूल गये..
कुछ मुझे बेवजह याद करते रहे….
कुछ को मेरा हमेशा इंतजार रहता हैं..
कुछ का मुझे हमेशा इंतजार रहता है..
कुछ लाइटें जो जल न सकीं…
कुछ लाईट बेवजह जलती रहीं…
कुल सालभर का जमा खर्च ये रहा खोया बहुत कुछ…
पाया दर्द दुख अकेलापन जीवन भर का…
अब बस इंतजार है एक नई सुबह का…
एक नई उम्मीद का जो कुछ बेहतर हो जिन्दगी जीने के लिये

