पीएमओ पहुंचा आवास योजना में दलाली का मामला, नगरीय प्रशासन के अफसर भी आए लपेटें में

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भोपाल। मप्र में प्रधानमंत्री आवास योजना का भुगतान कराने के एवज में ठेकेदार से दलाली वसूलने का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। ट्विटर के जरिए पीएमओ को इस गड़बड़ी की शिकायत की गई है। जिस पर जल्द ही पीएमओ की ओर से राज्य सरकार ने आवास योजना की विस्तार से जानकारी ली जाएगी। इसके लिए दिल्ली की टीम मप्र का दौरा भी कर सकती है।
The case of brokerage, the administration of the urban administration also came in the PMO landed housing scheme.
प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट से जुड़ी योजना में भारी भरकम दलाली का मामला उजागर होने के बाद राज्य सरकार के जि मेदार अफसरों के हाथ-पांव फूल रहे हैं। आवासों का निर्माण कर रहे ठेकेदार नवीन जैन की शिकायत पर इंदौर पुलिस ने जिस कथित दलाल संजय गुप्ता को हिरासत में लिया है, उसने पूछताछ में पौने दो करोड़ की दलाली लेना स्वीकार किया है। जिसमें से 45 लाख रुपए नगरीय प्रशासन विभाग के चीफ इंजीनियर एचएन गुप्ता को भी देना भी बताया है। अब पुलिस यह पता लगाने के लिए कोशिश कर ही है कि दलाल की सरकार के किस अफसर की निकटता है।

जीआरजे ग्रुप के डायरेक्टर नवीन जैन की शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने संजय गुप्ता निवासी आनंदवन (स्कीम 140) को गिर तार किया। नवीन का आरोप है कि संजय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए मकानों के बकाया 136 करोड़ रुपए जारी करवाने का झांसा दिया और 10 लाख रुपए लिए। वह 5 प्रतिशत कमीशन की मांग कर बदनाम करने की धमकी देने लगा।

पुलिस ने संजय को गिर तार कर रिमांड पर लिया तो उसने बताया कि वह नवीन से पौने दो करोड़ रुपए ऐंठ चुका है, जिसमें से 45 लाख रुपए नगरीय विकास विभाग के चीफ इंजीनियर एचएन गुप्ता को दिए थे। पुलिस ने संजय के घर दबिश देकर 15 लाख रुपए बरामद किए। साथ ही चीफ इंजीनियर गुप्ता से भी पूछताछ की है। गुप्ता ने आरोपों को झुठला दिया है। पुलिस संजय और एचएन गुप्ता के बीच हुई चर्चा का रिकॉर्ड भी निकाल रही है। उसका वाट्सएप और मैसेज डेटा रिकवर किया जा रहा है।

इंदौर क्रामम ब्रांच के एएसपी अमरेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी के बयानों और तथ्यों की जांच की जा रही है। फरियादी भी पुलिस से कई जानकारियां छुपा रहा है। जबकि दलाल के आरोपों को चीफ इंजीनियर एचएन गुप्ता ने पुलिस पूछताछ में गलत बताया है। उनके अनुसार काई पैसा नहीं लिया गया।

शिकायतकर्ता पर भी कसेगा शिकंजा
शिकायतकर्ता नवीन भी पुलिस को गुमराह कर रहा है। उसने पुलिस को बताया कि संजय को बतौर कमीशन सिर्फ 10 लाख रुपए दिए हैं, जबकि आरोपी पौने दो करोड़ देना स्वीकार रहा है। अफसरों के मुताबिक नवीन ने आयकर विभाग की कार्रवाई के डर से राशि कम बताई है, जबकि क्राइम ब्रांच आरोपित से 15 लाख रुपए बरामद कर चुकी है।

शिकायत पर लिया संज्ञान
आवेदक नवीन जैन ने बताया कि नगरीय निकायों में लगभग 550 करोड़ के विकाय कार्य किए गए हैं, जिसमें दमोह नगर परिषद में 250 करोड़, शिवपुरी नगर पालिक परिषद में 150 करोड़ व छिंदवाड़ा नगर पालिक निगम से 150 करोड़ के कार्य किए गए हैं। सरकार से उक्त कार्यों के लिए 18 महीने का अनुबंध किया था, लेकिन उन्होंने मात्र 12 महीने में ही कार्य पूर्ण कर दिया। अफसरों ने करीब 136 करोड़ रुपए का भुगतान रोक लिया था। इतनी बड़ी राशि रुकने पर नवीन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया।

इसी बीच संजय ने संपर्क कर कहा कि वह बकाया राशि जारी करवा सकता है। उसने 5 प्रतिशत कमीशन मांगा। सौदा साढ़े तीन प्रतिशत पर तय हुआ और 10 लाख रुपए दे दिए। कुछ दिन बाद नवीन के खाते में स्वत: ही रुपए आ गए। आरोपित ने कहा कि रुपए उसके प्रयासों से जारी हुए हैं। वह बकाया कमीशन की मांग कर बदनाम करने की धमकी देने लगा।