TIO ममता पंडित
राष्ट्रीय पार्टियों कईं ईमानदार कार्यकर्ता मात्र ट्विटर पर एक लाइन में अपना विरोध दर्ज करा कर चुप बैठ जाते हैं।
एक जमाना था राज्यसभा के लिए मनोनीत होना या चुना जाना गर्व का विषय होता था । कईं बढ़े बढ़े नाम हैं जिन्होंने राज्यसभा की शोभा बढ़ाई है । संविधान के अनुसार राज्यसभा में विशेषज्ञ व बुद्धिजीवी वर्ग के व्यक्तियों को जगह मिलेगी जो उनके सम्मुख लाये गए मसलों को किसी पार्टी विशेष की विचारधारा से ऊपर उठकर देखेंगे अपनी राय रखेंगे । क्या हम यह उद्देश्य पूरा कर पा रहे हैं ? नहीं । आज राज्यसभा भी संख्या गणित का एक हिस्सा बन कर रह गई है । यही हाल विधानपरिषद का हो गया है ।
निचले सदन जो भी पार्टी बहुमत में है उसकी यही कोशिश होती है किसी तरह ऊपरी सदन में भी वे बहुमत में हो ताकि किसी बिल को पास कराने में कठिनाई न हो ।
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र होने का दावा करने वाले इस देश में आज ऊपरी सदन की गरिमा की भी ठेस पहुंचाई जा रही है । फिर भी कुछ कहानियां हैं जो अपवाद हैं । संलग्न तस्वीर राष्ट्रीय जनता दल की एक कार्यकर्ता मुन्नी रजक की की है जिसे लालू प्रसाद यादव विधानपरिषद का उम्मीदवार बनाया है । इस कार्यकर्ता ने राबड़ी देवी के घर के बाहर ही रही उनकी समर्थन रैली में हिस्सा लिया था । मुन्नी देवी पटना स्टेशन पर कपड़े धोने और इस्त्री का काम करती हैं । इनके पास अपना फोन भी नहीं है । ये बदलाव की तस्वीर है , वह बदलाव जिसकी देश को सख्त जरूरत है ।
बाँधिए मज़मून संजीदा तो फिर
आप की नाज़ुक-ख़याली जाएगी…..
वक़्त आ गया है कि संजीदा मसलों पर देशव्यापी बहस छेड़ी जाए और नाज़ुक ख्याली से दौर से बाहर आकर कुछ मजबूत फैसले लिए जाएं ।

