सेना के कंधे पर बंदूक रखकर सरकार ने चलाई गोली

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ओआरओपी का पालन दुनिया का कोई भी देश नहीं करता है। सरकार ने चुनाव लाभ के लिए इसको अपनाया। ओआरओपी का वार्षिक बिल सेना के आधुनिकीकरण के लिए आवंटित धन से अधिक है। पिछले साल, ओआरओपी के कारण सरकार पर अतिरिक्त 25,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ा। इसके बाद सरकार को सेना के जवानों की संख्या कम करने पर विचार करना पड़ा। दिलचस्प है कि सरकार के इस विचार को कोविड का साथ मिल गया।
पूरे ढाई साल, जून 2022 तक कोई भर्ती नहीं हुई। भर्ती रैलियां उतनी ही संभव थीं जितनी कि चुनाव या कुंभ मेले जैसी धार्मिक सभाएं आयोजित करना। इस बीच, सरकार बहुप्रचारित अग्निवीर योजना पर काम कर रही थी, जिसका उद्देश्य एक तीर से दो शिकार करना था। पहला- मैनपावर कम करना, दूसरा-पेंशन बिल कम करना। जब पिछले साल अग्निवीर की घोषणा की गई, तो राजनेताओं ने पर्दे के पीछे से सेना के कंधे पर बंदूक रख गोली चलाई। पूरे ढाई साल, जून 2022 तक कोई भर्ती नहीं हुई। भर्ती रैलियां उतनी ही संभव थीं जितनी कि चुनाव या कुंभ मेले जैसी धार्मिक सभाएं आयोजित करना। इस बीच, सरकार बहुप्रचारित अग्निवीर योजना पर काम कर रही थी, जिसका उद्देश्य एक तीर से दो शिकार करना था। पहला- मैनपावर कम करना, दूसरा-पेंशन बिल कम करना। जब पिछले साल अग्निवीर की घोषणा की गई, तो राजनेताओं ने पर्दे के पीछे से सेना के कंधे पर बंदूक रख गोली चलाई।

3, सेना में बदलाव का साल है। वर्तमान में 1,80,000 सैनिकों की कमी है। आने वाले समय में 1,00,000 और जवानों को कम किया जाएगा। पिछले महीने, इंटीग्रल डिफेंस स्टाफ के हेडक्वार्टर ने फोर्स में अतिरिक्त 10 प्रतिशत कटौती का आदेश दिया है। सेना में जवानों की संख्या कम करने का एक कारण जम्मू और कश्मीर, विशेष रूप से बनिहाल के दक्षिण में उग्रवाद की स्थिति में काफी सुधार होना भी है। दिसंबर 2022 में, डीजी जम्मू-कश्मीर पुलिस दिलबाग सिंह ने दावा किया कि एक जिले को छोड़कर जहां तीन से चार आतंकवादी हैं, जम्मू के सभी जिलों को आतंकवाद से मुक्त कर दिया गया है।

भारत को गोरखा रेजीमेंट पर हमेशा गर्व रहा है पर अब उसे भी धीरे-धीरे मिटाया जा रहा है। जिसने कई युद्धों में अपनी वीरगाथाएं लिखी है। नागरिक मानते हैं कि कोई युद्ध नहीं होगा। मैनपावर की कमी ने गोरखा रेजीमेंट को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है क्योंकि इस साल भी उनकी कोई भर्ती नहीं हुई है। दरअसल, नेपाल की सरकार अग्निवीर योजना पर निर्णय लेने में असमर्थ है। वहां की सरकार पुरानी व्यवस्था को तरजीह देती है, जिसके तहत 15 साल की नौकरी और पेंशन मिलता था। इस मामले पर अंतिम निर्णय को नेपाली प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल की 31 मई को भारत यात्रा तक के लिए टाल दिया गया है। दहल द्वारा पीएम मोदी से नेपाल को अग्निवीर से छूट देने का आग्रह करने की संभावना है। नेपाल से गोरखा भर्ती के निलंबन या समाप्ति के गंभीर रणनीतिक परिणाम होंगे।