सूबे का सियासी घमासान हुआ दिलचस्प, अपनी सीट में बचाने में उलझे स्टार प्रचारक

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भोपाल। सूबे के सियासी घमासान अपने आखिरी चरण में दिलचस्प हो गया है. बीजेपी और कांग्रेस ने अपने स्टार प्रचारकों को चुनावी मैदान में प्रचार के लिए उतार दिया है. इस सूची में दोनों ही पार्टी के कई नेता ऐसे हैं, जिनके कंधों पर दूसरी विधानसभाओं में भी प्रचार का जिम्मा था, लेकिन वे अपनी ही सीट बचाने में जुटे हुये हैं. चिलचस्प यह भी है कि दोनों ही पार्टी के एक-एक बड़े स्टार प्रचारक आखिरी वक्त में पार्टी से ही बाहर हो गए.
The political turmoil of the province is interesting, the star campaigner involved in saving his seat
कांग्रेस ने चुनाव मैदान में दम दिखा रहे उम्मीदवारों के प्रचार के लिए स्टार प्रचारकों की सूची में देश और प्रदेश के कई नेताओं को शामिल किया था. इसमें अरुण यादव, सुरेश पचौरी, अजय सिंह, कांतिलाल भूरिया, शोभा ओझा के नाम भी शामिल थे. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव बुधनी से सीएम शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ कांग्रेस के उम्मीदवार हैं.

कांग्रेस ये स्टार प्रचारक निकल ही नहीं अपनी सीट से बाहर
अरुण यादव बुधनी के चुनाव में वे ऐसे उलझे कि अपनी सीट बचाने के लिए किसी दूसरे विधानसभा क्षेत्र में कदम भी नहीं रख पाए. यही हाल पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी का भी रहा. पचौरी भोजपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. अपने राजनीतिक कैरियर में चुनावी जीत का खाता खोलने के लिए पचौरी, जी-तोड़ मेहनत करने में जुटे हैं, लिहाजा उन्होंने प्रचार के लिए भोजपुर के अलावा किसी दूसरी विधानसभा का रुख ही नहीं किया. नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह चुरहट से उम्मीदवार हैं, लेकिन वे आस-पास के सीटों के अलावा प्रदेश के दूसरे हिस्सों में प्रचार के लिए ही नहीं गए.

बीजेपी के स्टार प्रचारक भी अपने क्षेत्र में घिरे
शिवराज सरकार के संकटमोचक मंत्री माने जाने वाले नरोत्तम मिश्रा अपनी दतिया विधानसभा सीट बचाने में जुटे हैं. कांग्रेस प्रत्याशी राजेन्द्र भारती एक बार फिर नरोत्तम के सामने हैं. वहीं बसपा उम्मीदवार ने आखिरी वक्त में कांग्रेस में शामिल होकर नरोत्तम की चुनौती बढ़ा दी है. नरोत्तम चुनाव में ज्यादातर अपनी ही सीट पर चुनाव में व्यस्त दिख रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री और टिकट के लिए बगावती तेवर दिखा चुके बाबूलाल गौर अपनी पुत्रवधु कृष्णा गौर की चुनावी नैया पार लगाने गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में ही व्यस्त हैं. यही हाल यशोधरा राजे, माया सिंह का भी है. हालांकि, माया सिंह चुनावी मैदान में नहीं है.

स्टार प्रचारक बनाया फिर बाहर रास्ता दिखाया
दिलचस्प तथ्य यह भी है कि कांग्रेस और बीजेपी के एक-एक कद्दावर नेता को पार्टी ने पहले स्टार प्रचारक बनाया, लेकिन दोनों ही बगावत के बाद पार्टी से बाहर हो गए. बीजेपी के कद्दावर नेता रहे रामकृष्ण कुसमरिया पार्टी के स्टार प्रचारक थे, लेकिन निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने के बाद बीजेपी ने इन्हें पार्टी से बाहर कर दिया. यही हाल कांग्रेस के सीनियर लीडर सत्यव्रत चतुवेर्दी का भी रहा. बगावती तेवर अपनाने के बाद कांग्रेस ने सत्यव्रत को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया.