ऐसे किया कालाधन सफेद

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TIO NEW DELHI

आठ नवंबर, 2016 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रात आठ बजे नोटबंदी का एलान कर रहे थे, उस वक्त कुछ लोग अपने कालेधन को सफेद करने में लग गए थे। नोटबंदी के एलान के चार घंटे बाद ही हैदराबाद की तीन ज्वैलर्स कंपनियों ने 111 करोड़ रुपये मूल्य के 500 और 1,000 के पुराने नोटों को फौरन अपने बैंक खातों में जमा करा दिए।

इन्होंने फटाफट फर्जी नकद रसीद और बिक्री की रसीद बैंकों के सामने यह कहकर दिखाई कि आठ नवंबर, 2016 को रात आठ बजे से लेकर मध्यरात्रि तक 6,000 ग्राहकों ने उनके कई शोरूमों में सोने-चांदी और आभूषणों की भारी खरीदारी की। यह खुलासा मनी लॉन्ड्रिंग से जुडे़ मामलों की जांच करने वाली केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को की है।

दरअसल, ईडी ने नोटबंदी के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित वित्तीय अनियमितता के इस मामले में हैदराबाद के ज्वैलर्स हाउसों और उनके प्रमोटरों की 130 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। ईडी के अनुसार, मुसुद्दीलाल जेम्स एंड ज्वेल्स प्राइवेट लिमिटेड, वैष्णवी बुलियन प्राइवेट लिमिटेड और मुसुद्दीलाल ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ यह कार्रवाई की गई। एजेंसी ने इस मामले में बीते साल सितंबर को ही दो आरोपपत्र दायर किए हैं।

सीए ने बताया था जुगाड़, फर्जी रसीद तैयार करने में की मदद
ईडी के अनुसार, जो संपत्तियां जब्त की गई हैं, उनमें 41 अचल संपत्ति और बाकी शेयरों, सोने-चांदी और ज्वैलरी में निवेश के रूप में हैं। इनका कुल मूल्य 130.57 करोड़ रुपये है। ईडी का दावा है कि मुसुद्दीलाल जेम्स के प्रमोटरों कैलाश चंद गुप्ता और उनके बेटों की कंपनियों ने अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) संजय शारदा से मिलकर आय के नकली स्रोतों और बड़ी मात्रा में जमा की गई रकम को सही ठहराने के लिए फर्जी रसीद तैयार किए। शारदा ने उन्हें सलाह दी कि फर्जी रसीद की राशि दो लाख रुपये से कम रखें, ताकि ग्राहकों के केवाईसी या पैन के रिकॉर्ड को रखने की जरूरत नहीं पड़े। इस सलाह के बदले सीए को मोटी रकम दी गई।