क्रूड आयल के भाव में शुरू हुई ट्रेडिंग, क्या फिर बढ़ेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें

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नई दिल्ली। सोमवार को ब्रेंट क्रूड आॅइल में 70.69 डॉलर प्रति बैरल के भाव से ट्रेडिंग शुरू हुई। इससे पहले, शुक्रवार को यह 70 डॉलर प्रति बैरल के नीचे ट्रेड कर रहा था। ब्रेंट के प्रति बैरल 70-71 डॉलर के आसपास रहने से ग्राहकों में पेट्रोल-डीजल के दाम घटते रहने की उम्मीद जगी है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट ईरान पर अमेरिकी पाबंदी के बहुत प्रभावी नहीं होने की वजह से आ रही है।
Trading starts in the price of crude oil, what will the prices of petrol and diesel increase?
अमेरिका ने भारत, चीन, जापान समेत आठ देशों को ईरान से तेल आयात को लेकर पाबंदी में ढील दी है। साथ ही, अमेरिका, सऊदी अरब और रूस ने तेल उत्पादन बढ़ा दिया है। लेकिन, अगर कुछ तेल उत्पादक देश मनमर्जी पर उतर आए, तो पेट्रोल-डीजल पर मिल रही राहत कभी भी काफूर हो सकती है।

नवंबर महीने में 7 तारीख को छोड़कर अब तक हर दिन पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटी हैं। लेकिन, ध्यान रहे कि जितना सस्ता पेट्रोल-डीजल आपको मिल रहा है, तेल उत्पादक देशों की आमदनी उसी अनुपात में घट रही है। यही वजह है कि सऊदी अरब अब तेल उत्पादन घटाने की सोच रहा है। हालांकि, उसने पहले उत्पादन बढ़ाने का भरोसा दिया था।

सऊदी अरब, इराक और ईरान जैसे तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक एवं रूस जैसे अन्य तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन घटाने पर चर्चा को लेकर अबू धाबी में मीटिंग की। उन्हें इस बात की चिंता है कि अगर तेल की कीमतें घटती रहीं तो 2014-16 वाली स्थिती उत्पन्न हो जाएगी जब अमेरिकी शेल आॅइल के उत्पादन की वजह से कीमतें 70% गिर गई थीं।

इस गिरावट का तेल उत्पादक देशों पर गहरा असर पड़ा था। तब सऊदी अरब का वित्तीय घाटा बढ़कर जीडीपी का 16% हो गया था। इससे सऊदी के शासक के पास बुनियादी संरचनाओं, रक्षा एवं नागरिकों को मुफ्त दवाइयां उपलब्ध करवाने जैसी सामाजिक परियोजनाओं पर खर्च में कटौती करनी पड़ी। इस बार सऊदी अरब ने वित्तीय घाटे को जीडीपी के 7.3 प्रतिशत तक रोकने का लक्ष्य रखा है।

ओपेक के सदस्यों एवं इसके 10 सहयोगी देशों की प्रमुख चिंता अमेरिकी द्वारा तेल उत्पादन बढ़ाना है। लेकिन, वे अमेरिका पर उत्पादन घटाने का दबाव नहीं बना सकते। इसलिए, वे अपने वादे के उलट तेल उत्पादन घटाने पर विचार कर रहे हैं। अभी अमेरिका हर दिन 1 करोड़ 14 लाख बैरल तेल उत्पादन कर रहा है।

मई महीने से ओपेक देशों का तेल उत्पादन बढ़कर 8 लाख 20 हजार बैरल प्रति दिन पर चला गया है। वहीं, रूस ने भी मई महीने में हर दिन 44 हजार बैरल तेल उत्पादन किया था जो अब अक्टूबर में बढ़कर 1 करोड़ 14 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया। तेल उत्पादक देश रूस की असहमति के बावजूद तेल उत्पादन घटाकर मई या अक्टूबर में उत्पादित मात्रा तक सीमित करने पर सहमत हो सकते हैं। अगर मई महीने में उत्पादित मात्रा में ही तेल उत्पादन हुआ, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया जरूर आएगी।

हालांकि, रविवार को ओपेक देशों की बुलाई बैठक आधिकारिक नहीं थी। इसलिए, इसे फैसले से पहले विचार-विमर्श की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन, 6 दिसंबर को होनेवाली अगली ओपेक मीटिंग और रविवार को हुए मंथन के अनुरूप ही आगे का अजेंडा तय होगा। इसका मतलब है कि जब देश में लोकसभा चुनाव होंगे, उस वक्त तेल की कीमतें एक बार फिर से चर्चा में आ सकती हैं।