यूपी में ताकत दिखाने उद्धव ठाकरे कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचेगे अयोध्या

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लखनऊ। शिवसेना ने 1991 में उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़े थे। उस वक्त राम मंदिर मुद्दा बेहद गर्माया हुआ था। तब से लेकर अब तक पार्टी 27 साल में 14 चुनाव लड़ चुकी है, लेकिन यहां अपनी राजनीतिक जड़ें नहीं जमा सकी। इस बार शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अयोध्या पहुंच रहे हैं। वह अपने इस दौरे में राम मंदिर निर्माण के लिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे साथ ही, राज्य में अपनी पार्टी के लिए जमीन तैयार करने की भी कोशिश करेंगे।
Uddhav will reach Uddhav with workers
पार्टी के नारे ‘पहले मंदिर, फिर सरकार’ से यह बात साफ हो जाती है कि पार्टी की रणनीति क्या है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी को मंदिर के मुद्दे पर सीधे-सीधे घेरने और सवालों के घेरे में खड़ा करने से शिवसेना मंदिर को लेकर किए जा रहे दावों के बीच खुद को सबसे बड़ा दिखाना चाहती है। उसके पास यूपी में तो ताकत नहीं है, इसलिए वह महाराष्ट्र से शिवसैनिक लेकर आई है। माना जा रहा है कि विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की धर्मसभा चलने तक शिवसेना बीजेपी से राम मंदिर निर्माण को लेकर सवाल करती रहेगी और राम मंदिर मुद्दे को संघ परिवार से चुराने की कोशिश करेगी।

महाराष्ट्र और यूपी में है ‘दूरी’
यह बात अलग है कि यूपी के लाखों लोगों को मुंबई और आसपास के इलाकों में रोजगार मिलता है लेकिन यूपी ने चुनावों के मामले में शिवसेना का साथ नहीं दिया है। यहां तक कि महाराष्ट्र कई साल से यूपी दिवस मना रहा है लेकिन इस साल पहली बार यूपी ने महाराष्ट्र दिवस मनाया है। राज्यपाल राम नाईक के कहने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस ओर कदम बढ़ाया।

अयोध्या पहुंचने लगे रामभक्त
बता दें कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही रामभक्त अयोध्या पहुंचने लगे हैं। कुछ की तैयारी शनिवार और रविवार को पहुंचने की है। वीएचपी और आरएसएस ने रविवार को होने वाली धर्म सभा के लिए ढाई लाख से ज्यादा रामभक्तों को अयोध्या पहुंचाने की योजना तैयार कर ली है। जिलों में मोहल्ले-मोहल्ले बसें लगाई गई हैं। वहीं, शनिवार को होने वाले शिवसेना के संत सम्मान समारोह के लिए शिवसैनिकों की ट्रेन देर रात अयोध्या पहुंच गई।