क्या सोनिया गांधी कांग्रेस में फिर जान डाल पाएंगी

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नई दिल्ली

खास बातें

  • राहुल के इस्तीफे के 77वें दिन हुई कांग्रेस कार्यसमिति बैठक में फैसला
  • नए अध्यक्ष के चुनाव होने तक सोनिया ही देंगी पार्टी को संजीवनी
  • तीन प्रस्ताव पारित, राहुल के नेतृत्व की तारीफ

लगातार चुनावों में मिल रही हार से कांग्रेस हताश हो चली है उसे नया अध्यक्ष चुनने में काफी मशक्कत करनी पड़ी अब सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया है क्या वह कांग्रेस पार्टी को फिर से सक्रिय कर पाएंगी यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा। गांधी परिवार से इतर मुखिया चुनने की कवायद के बीच कांग्रेस कार्यसमिति ने एक बार फिर सोनिया गांधी के नेतृत्व पर ही भरोसा जताया है।

शनिवार को दो दौर में हुई मैराथन बैठकों के बाद 1998 से 2017 तक पार्टी की कमान संभालने वालीं सोनिया को अंतरिम अध्यक्ष चुना गया। पार्टी नए मुखिया के चुनाव तक वही पार्टी की कमान संभालेंगी। इससे पहले सोनिया और राहुल गांधी पहले दौर की बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए थे। उनका कहना था कि वे अध्यक्ष की चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं होना चाहते। ताकि किसी पर राय पर उनका प्रभाव न पड़े।

दिनभर चली बैठक के बाद देर रात राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने बताया कि कार्यसमिति के पांच समूहों की रिपोर्ट और नेताओं से रायशुमारी में सोनिया का नाम ही अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर सामने आया। पहले तो उन्होंने इनकार कर दिया था, मगर वरिष्ठï नेताओं के बेहद आग्रह पर उन्होंने पार्टी की कमान संभालने के लिए हामी भर दी।

राहुल का इस्तीफा मंजूर, तीन प्रस्ताव पास
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि बैठक में तीन प्रस्ताव पास किए गए। पहला प्रस्ताव यह था कि राहुल गांधी ने पार्टी को शानदार नेतृत्व दिया। उनसे अध्यक्ष पद पर बने रहने की गुजारिश की गई, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। दूसरे प्रस्ताव में कार्यसमिति ने सोनिया से अंतरिम अध्यक्ष बनने की मांग की, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। तीसरा प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर को लेकर है, जिसमें राज्य के मौजूदा हालात को लेकर चिंता जताई गई।

दिन की रायशुमारी के बाद रात 8 बजे कार्यसमिति की बैठक दोबारा शुरू हुई। इसमें सोनिया, प्रियंका गांधी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और एके एंटनी समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। काफी कहने के बाद राहुल भी बैठक में पहुंचे। सभी पांचों समूहों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अधिकतर नेताओं ने राहुल को ही कमान सौंपने की बात कही है।

अध्यक्ष के नाम को लेकर पांच समूहों ने देश भर से आए प्रदेश अध्यक्ष, विधानसभाओं में दल के नेता, सांसद आदि से राय जानी।

राहुल आए बोले, कश्मीर पर स्थिति साफ करे सरकार और लौट गए

जब कार्यसमिति की बैठक चल ही रही थी, तभी अचानक राहुल ने मीडिया के सामने आकर पार्टी के अध्यक्ष पद के चयन पर कुछ न बोलकर उल्टे जम्मू-कश्मीर में हो रही हिंसा को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, सरकार को बताना चाहिए कि वहां क्या चल रहा है। इतना कहकर राहुल चले गए। जब उनसे पूछा गया कि अध्यक्ष के चयन का क्या हुआ तो उन्होंने कहा जम्मू-कश्मीर पर चर्चा की वजह से बैठक रोकनी पड़ी।

राहुल ने कहा, कश्मीर में हालात बहुत खराब हैं। कुछ रिपोर्टों में जम्मू-कश्मीर में हिंसा की खबरें चल रही हैं। यह बेहद चिंताजनक है। सरकार को यह बताना चाहिए कि वहां क्या हो रहा है। कार्यसमिति की बैठक रोक दी गई और यह रिपोर्ट आई कि जम्मू-कश्मीर में हालात बदतर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार को पारदर्शिता के साथ देश को यह बताना चाहिए कि वहां क्या हो रहा है।

राहुल का दावा बेबुनियाद साबित
लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद आलोचकों के निशाने पर आए राहुल गांधी ने 25 मई को इस्तीफा दे दिया था। उस वक्त राहुल ने साफ तौर पर कहा था कि गांधी परिवार का कोई व्यक्ति अध्यक्ष नहीं बनेगा और वह इसकी चयन प्रक्रिया में भी शामिल नहीं होंगे।