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प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा पर राजनीति, पुलिस की लापरवाही का सरकार को भुगतना होगा नतीजा

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Politics on Pradeep Mishra's Shiv Mahapuran
Politics on Pradeep Mishra's Shiv Mahapuran

TIO खास खबर

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के प्रसिद्ध पंडित प्रदीप मिश्रा की श्री शिव महापुराण कथा पर राजनीति जारी है। जबकि पूरा फेलुयर सीहोर पुलिस का है। लेकिन राजनीति की वजह से ठीकरा सरकार पर फोड़ा जा रहा है। इस मामले में एसपी सीहोर न तो कुछ सही जानकारी दे रहे है न ही डीजी कुछ बोलने को तैयार है। जब पुलिस अधिकारी चुप्पी साध लेते है तो स्वाभाविक है कि मुद्दे पर राजनीति होगी ही, जिसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा। भाजपा के कई नेताओं के अपने तीखे तेवर सरकार को दिखाना शुरू कर दिया है और साथ में कांग्रेस को मौका मिल गया है।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बाद अब भाजपा के एक विधायक नारायण त्रिपाठी ने सीएम को पत्र लिखकर प्रशासन की नाकामी बताई है। कहा प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए जिससे ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो। दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस मामले में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, सीहोर जिला कांग्रेस अध्यक्ष बलवीर सिंह तोमर, पूर्व विधायक रमेश सक्सेना व शैलेंद्र पटेल और अवनीश भार्गव के प्रतिनिधिमंडल को कथावाचक पंडित मिश्रा से मुलाकात करने का फैसला किया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बाद अब भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी ने सीएम को पत्र लिखा है। त्रिपाठी ने जिला प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, इस मुद्दे पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कथा वहां चल रही है। कथा बंद नहीं की गई है। व्यस्थाएं सब ठीक हैं। जो आवश्यक व्यवस्था होगी, वह भी की जाएगी। महाराज से मैंने खुद बात की है और उन्होंने कहा है कि व्यवस्थाएं ठीक हो गई हैं।

किसानों के आसपास घूमती सरकार और सियासत

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Leaders have become addicted to five star habits
Leaders have become addicted to five star habits

राघवेंद्र सिंह

मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों किसानों के आसपास घूम रही है। यह तब और सुर्खियों में आई जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को पिछले दिनों मुलाकात का समय देने के बाद उसे टाल दिया। हालांकि दो दिन बाद श्री सिंह को मुख्यमंत्री ने किसानों के मुददे पर चर्चा के लिये बुलाया। लेकिन सीन थोड़ा बदला हुआ था। मुख्यमंत्री से चर्चा के लिए अब एक नहीं एक नहीं दो पूर्व मुख्यमंत्री थे। एक दस साल मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह और दूसरे पंद्रह महीने मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ। इसे कांग्रेस की आंतरिक कलह के रूप में भी जोड़कर देखा जा रहा है। भेंट का समय मांगा था दिग्विजयसिंह ने और मिलने का समय तय होने के बाद उसे रदद् करने से राजनीति में बबाल पैदा होने के संकेत मिल रहे थे। इसे दिग्विजयसिंह ने किसानों और अपने अपमान से जोड़ कर देखा और इसके बदले नुकसान उठाने की सीएम शिवराजसिंह चौहान चेतावनी भी दे डाली। इसके बाद कमलनाथ की एयरपोर्ट पर इत्तफाक से सीएम के साथ हुई मुलाक़ात के भी सियासी मायने निकाले जाने लगे। कहा जाने लगा कि कमलनाथ सीएम शिवराज सिंह चौहान के साथ मिलकर दिग्विजयसिंह का कद घटाने में लगे हैं। यह भेंट उनके आपस में मिले होने की अफवाहों के पक्ष में बड़े सबूत के रूप में भी देखी और दिखाई जा रही है। इसे कांग्रेस आलाकमान के पास भी भेज दिया गया है। आने वाले दिनों में इसका क्या असर होगा इसकी प्रतीक्षा की जा रही है। कमलनाथ की बंद कमरा पॉलिटिक्स को लेकर पार्टी के भीतर भी दबी जुबान से ही सही खूब बातें होती रहती है।

बहरहाल , कांग्रेस में शिवराजसिंह चौहान की दिग्विजय सिंह को समय देकर रदद् करने की राजनीति का भाजपा को लाभ मिल रहा है। इधर कांग्रेस नेता सफाई दी रहे हैं कि नाथ – दिग्विजय में कोई मनमुटाव और दूरी नही है। लेकिन किसानो की समस्याओं के लिए समय मांगा था दिग्विजय सिंह ने और साथ में गए कमलनाथ भी। बतौर पीसीसी चीफ इसमें कोई एतराज नही होना चाहिए लेकिन जो घटनाक्रम हुआ उससे कांग्रेस और सूबे की सियासत में चर्चाओं का बाजार खूब गर्म है। ठंडे मौसम में इस मुद्दे की आग पर अभी आगे भी खूब हाथ तापे जाएंगे। सबको याद है कि किसानों की फिक्र और उस पर राजनीति करने के मामले में सीएम शिवराज सिंह चौहान का कोई सानी नही है। अभी तो गेंद उनके ही पाले में है और वे उसे चाहे जहां खेल रहे हैं…

चर्चाओं में एसीपी…
भोपाल – इंदौर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद सबकी नजरें को मिले अधिकार और उनके काम काज पर टिकी हुई हैं। चर्चाओं में हैं भोपाल के एसीपी सचिन अतुलकर। दरअसल अतुलकर कभी उज्जैन कप्तान के रूप में जब चर्चाओं में थे। इस दफा वे प्रदेश के तेजतर्रार मंत्री विश्वास सारंग के कारण सुर्खियों में आ गए। बात यह है कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की तैयारी था। जिसमे मंत्री सारंग और अन्य अफसर साथ थे लेकिन एसीपी अपने वाहन से उतरकर तैयारी में शिरकत नही कर रहे थे। प्रोटोकॉल के खिलाफ यह बात मंत्री को नागवार लगी। बताते हैं इस मुद्दे को सारंग ने गरिमा के प्रतिकूल माना और सख्त लहजे में एसीपी को समझाइश दे डाली। नई नई पुलिस कमिश्नर प्रणाली में अधिकारों को लेकर बहुत सी बातें हो रही हैं लेकिन मंत्री सारंग ने कर्तव्य का स्मरण करते हुए जो कुछ कहा उसकी चर्चा भी हो रही है। इससे जनप्रतिनिधियों के मामले में पुलिस के शालीन रवैये की भी दरकार को शिद्दत से महसूस किया जा रहा है। श्री अतुलकर की एसीपी के रूप में तैनाती को लेकर उम्मीद की जा रही है कि वे पुलिस कमिश्नर प्रणाली को सफलता पूर्वक लागू कर बेहतर नतीजे देने में कामयाब होंगे लेकिन उन्हें राजधानी में पॉलिटकल प्रोटोकॉल पर भी फोकस करना होगा। आशा की जानी चाहिए कि इस तरह के मसले दोबारा नही आएंगे वरना पुलिस और सरकार की किरकिरी तय जानिए…


बैंगन भी सुर्खियों में
बैंगन जैसे देशज भाषा में भटा कहा जाता है पिछले दिनों इंदौर में एक निजी दावत समारोह में खूब चर्चाओं में रहा। किस्सा एक न्यायमूर्ति के यहां शादी समारोह का है जिसमे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर बड़े बड़े सियासतदां और अफसरान मौजूद थे। बात चल पड़ी बेचारे बैंगन की। एक समय राजदरबार में राजा और बादशाहों की हां में हां मिलाने के किस्से पर भी बात हुई। बताया गया कि एक बादशाह को बैंगन पसन्द था तो दरबारियों ने उसकी तारीफ में पुल बांधते हुए कहा कि भटा तो सब्जियों का बादशाह है उसके सिर पर ताज भी इस बात की गवाही देता है। उसके रंग रूप और स्वाद की भी प्रशंसा की गई। लेकिन जैसे ही बादशाह ने उसे थोड़ा नापसंद किया तो दरबारियों ने पैंतरा बदला और बैंगन की बुराई करना शुरू कर दिया। किसी ने उसके स्वाद को खराब बताया कोई उसे सेहत के लिए नुकसानदेह बताने लगा। किसी ने फरमाया कि यह भी कोई सब्जी है उसका तो नाम ही बेगुन है याने कोई बिना गुन का। इस दावत में ठहाको बीच यह तो तय हो गया कि दरबारियों से बचके चलना चाहिए। खास बात यह है कि चर्चा के दरम्यान सरकार, सियासत और प्रशासन की कई नामचीन हस्तियां मौजूद थी। बैंगन के किस्से कहानी हर दौर में मौजूं है…

अमित शाह को क्यों कहना पड़ा कि मोदी निरंकुश नहीं हैं !

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Why did Amit Shah have to say that Modi
Why did Amit Shah have to say that Modi

श्रवण गर्ग

देश के किसी सरकारी मीडिया उपक्रम से सम्बद्ध कोई पत्रकार ,जो कितना भी अनुभवी या सीनियर क्यों न हो ,क्या इस आशय के सवाल का जवाब एक शक्तिशाली गृह मंत्री से प्राप्त कर उसे जनता तक पहुँचाने की हिम्मत जुटा सकता है कि प्रधानमंत्री निरकुंश हैं अथवा नहीं ? सवाल को चाहे जितनी सफ़ाई , ख़ूबसूरती ,विनम्रता अथवा घुमा-फिराकर पूछा गया हो ! अगर एक सरकारी प्रतिष्ठान से जुड़े किसी अनुभवी पत्रकार ने वास्तव में ऐसी हिम्मत दिखा दी है तो उसके लिए निश्चित ही तारीफ़ की जानी चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनके गृह राज्य गुजरात और केंद्र में सरकार चलाने के बीस वर्ष पूरे कर लिए जाने के अवसर पर ‘संसद टी वी ‘ चैनल को को दिए गए साक्षात्कार के दौरान एक सवाल के जवाब में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री निरंकुश या तानाशाह नहीं हैं। इस तरह के सभी आरोप निराधार हैं।मोदी सभी लोगों की बात धैर्यपूर्वक सुनने के बाद ही फ़ैसले लेते हैं।’’उन्होंने दशकों के लम्बे जुड़ाव के दौरान नरेंद्र मोदी जैसा कोई श्रोता नहीं देखा। एक छोटे से कार्यकर्ता की भी बात धैर्य से सुनते हैं।’’

अगर गृहमंत्री अपने प्रधानमंत्री के बारे में इस तरह का दावा इतने अधिकारपूर्वक करते हैं तो देश की एक सौ चालीस करोड़ जनता और दुनिया के तमाम प्रजातांत्रिक मुल्कों को भी उसे धैर्यपूर्वक स्वीकार कर लेना चाहिए और आश्वस्त भी हो जाना चाहिए।ऐसा इसलिए कि सत्तावन-वर्षीय अमित शाह प्रधानमंत्री को निजी तौर पर जानने और उनके काम करने के तरीक़े के कोई साढ़े तीन दशक से अधिक समय के साक्षी रहे हैं।

सवाल यह है कि मोदी के गुजरात और दिल्ली में सफलतापूर्वक दो दशकों तक सरकारें चला लेने के बाद अचानक से इस तरह के सवाल के पूछे जाने (या पुछवाए जाने) की ज़रूरत क्यों पड़ गई होगी ? जनता तो इस आशय की संवेदनशील जानकारी की साँस रोककर प्रतीक्षा भी नहीं कर रही थी।सरकार और पार्टी में ऐसे मुद्दों पर बंद शयन कक्षों में भी कोई बातचीत नहीं होती होगी।

केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है कि गृहमंत्री के कानों तक जनता के बीच छुपे बैठे कुछ (या ज़्यादा) ख़ुराफ़ाती राजनीतिक ‘धोबियों’ द्वारा किया गया यह दुष्प्रचार पहुँचा होगा कि प्रधानमंत्री निरंकुश या तानाशाह हो गए हैं। इस तथ्य की किसी खोज की धर्मप्राण जनता को भी विस्तृत जानकारी नहीं होगी कि त्रेतायुग की अयोध्या के एक धोबी द्वारा माता जानकी के बारे में की गई असत्य टिप्पणी भगवान राम के कानों तक कैसे पहुँची होगी ! धोबी के नाम-पते को लेकर भी कोई ज़्यादा जानकारी प्रचारित नहीं हुई है।

यह एक स्थापित सत्य है कि वे तमाम नायक जो सिर्फ़ अपने देश को ही नहीं बल्कि दुनिया को भी नेतृत्व प्रदान करने की महत्वाकांक्षा रखते हैं और उसके लिए ज़रूरी क्षमता भी धारण कर लेते हैं ,इस बात को लेकर लगातार सचेत और चिंतित रहते हैं कि उन्हें किस अवसर पर क्या और कैसा पहनना चाहिए, कैसा नज़र आना चाहिए, फ़ोटो-फ़्रेम में कितना दिखाई पड़ना चाहिए और कैसे चलना और बोलना चाहिए।(पिछली एक सरकार में एक अनुभवी गृह मंत्री की नौकरी तो बार-बार कपड़े बदलने के चक्कर में ही चली गई थी।)

ये महत्वाकांक्षी नायक इस सवाल को लेकर भी परेशान रहते हैं कि अपनी प्राइवेट बातचीत में लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं ! इसका उत्तर प्राप्त करने के लिए वे न तो अपनी गुप्तचर एजेंसियों के फ़ीडबैक पर भरोसा करते हैं और न ही उपकृत किए गए टी वी चैनलों के द्वारा जनता के बीच उनकी लोकप्रियता को लेकर जुटाए जाने वाले आँकड़ों पर। कहा जाता है कि इंदिरा गांधी ने जब आपातकाल को समाप्त कर चुनाव करवाने का फ़ैसला किया तो अपने एक अत्यंत विश्वस्त सहयोगी को आगाह कर दिया था कि गुप्तचर एजेंसियाँ तो उनके फिर से सत्ता में आने के दावे कर रहीं हैं पर वे स्वयं जानती हैं कि हारने वाली हैं।

पुराने जमाने में तो राजा जनता के बीच अपनी लोकप्रियता की सही जानकारी लेने के लिए बजाय चाटुकार दरबारियों की जमात पर भरोसा करने के स्वयं ही वेश बदलकर जनता के बीच निकल जाते थे और स्वयं की बुराई के क़िस्से भी छेड़ देते थे।आज ऐसा करना सम्भव नहीं रहा।जनता और राजा के बीच भक्तों के द्वारा बहुत बड़ी खाई खोद दी गई है। इसीलिए स्पष्टीकरणों के ज़रिए अफ़वाहों से निपटने का काम और आश्वासनों के मार्फ़त शासन को चलाने का कार्य सम्पन्न करना पड़ता है।

हम वर्तमान में ऐसे कालखंड के साक्षी हैं जिसमें एक के बाद एक प्रजातंत्र तालिबानी संस्कृति को प्राप्त हो रहे हैं और उनके शासक तानाशाही अधिकारों से स्वयं को सज्जित कर रहे हैं।कई शासकों (यथा चीन, रूस, ब्राज़ील, तुर्की ,आदि )के बारे में आरोप हैं कि कोरोना महामारी ने उन्हें निरंकुश बनने के भरपूर अवसर प्रदान कर दिए हैं। सत्य यह भी है कि निरंकुश या तानाशाह बनने की कोई लिखित रेसिपी उपलब्ध नहीं है।कोई नायक चाहकर भी निरंकुश नहीं हो सकता और कोई अन्य न चाहते हुए भी तानाशाह बन सकता है।जब ऐसा होने लगता है तब न शासक को पता चल पाता है और न ही उसकी जनता को।25 जून 1975 की रात ऐसा ही हुआ था।उस जमाने के बचे हुए लोग अब अपने हरेक शासक को लेकर उतने ही डरे ,सहमे और आतंकित रहते हैं। ऐसी परिस्थिति में केंद्रीय गृहमंत्री की ओर से प्राप्त एक सर्वथा अनपेक्षित स्पष्टीकरण अथवा आश्वासन कुछ भरोसा उत्पन्न करने वाला माना जा सकता है ।

बिछडे सभी बारी बारी…

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After reading these lines of the poet Kunwar Bachchan
After reading these lines of the poet Kunwar Bachchan

ब्रजेश राजपूत, भोपाल

मौत तो आनी है तो फिर मौत का डर क्यों रखूं,,
जिंदगी आ तेरे कदमों पर मैं अपना सर रखूं,,
कवि कुंवर बैचेन की ये पंक्तियां पढकर थोडी बैचेनी कम होने को ही थी कि खबर मिली कि प्रिय कवि कुंवर बेचैन भी हमें छोड गये। अजीब सा दौर है जो पहले कभी देखा नही कभी सोचा नहीं और कभी भुगता नहीं। जाने क्यों इस अभिशप्त दौर को देखने के लिये हम सब मजबूर हैं। सुबह उठते ही अखबार खोलने से पहले मोबाइल के वाट्सएप पटल पर बुरी खबरें टपकने लगती हैं। ये सूचना मार्का खबरें जो पहले कभी इतनी डरावनी नहीं थीं। एक शोक की खबर पर हम दोस्त हफ्ते भर चर्चा करते थे। अब तो एक दुख भरी खबर को दिल जब्त भी नहीं कर पाता है कि दूसरी खबर सामने आ जाती है। कोरोना त्रासदी के इस दौर में हममें से सभी अपने परिजनों और परिचितों को असमय खो रहे हैं।
अपनी बात करूं तो पिछले एक हफ्ते में ही मेरे परिचितों में फिल्म और कला समीक्षक सुनील मिश्रा, जनसंपर्क के साथी मनोज पाठक, पत्रकार मनोज राजपूत और कवि पत्रकार महेंद्र गगन इस फानी दुनिया से विदा हो चुके हैं। ऐसा गमगीन सप्ताह जिंदगी में पहले कभी नहीं आया। किसी एक मित्र के बारे में सोचने और कुछ लिखने बैठता हूं तो दूसरे की दुखद खबर आ जाती है। थक हार कर अंगुलियां थम जाती हैं दिल बैठ जाता है। मगर इस बार दिल कडा किया है सोचा है मैं नहीं लिखूंगा तो कौन लिखेगा इन प्यारे साथियों के बारे में जिनके साथ भोपाल भोपाल लगता था।
सुनील मिश्रा को भोपाल आने से पहले ही देश भर की पत्रिकाओं में पढकर जान चुका था। फिल्मों पर उन जैसा सीधा और सरल लिखने वाला दूसरा कोई ना था। जितना सरल वो लिखते थे उतने ही सहजता से रिश्ते बनाते और निभाते भी थे। फिल्मों के बारे में कुछ लिखने में यदि आप भटकते थे तो सुनील भाई तुरंत फोन पर पूरी जानकारी कलाकार और उससे जुड़ी घटनाओं की देते थे। बेहद विनम्र और फिल्म से लेकर कला और कलाकार की पूरी कुंडली रखने वाले सुनील जी से भारत भवन और संस्कृति विभाग के कार्यक्रमों में लगातार मुलाकात होती। वो लगातार हमारे लिखने पर नजर रखते और मिलते तो खुशी भी जताते। सुनील भाई इतनी जल्दी साथ छोड जायेंगे ये हमने सोचा ही नहीं था वरना और बहुत सारे किस्से रिकार्ड करवा कर रख लेते उनके जाने के बाद सुनने के लिये।
मनोज पाठक के बिना भोपाल सूना है। वो मेरी नजर में भोपाल के सबसे भले आदमी थे। सबकी भलाई और मदद करने वाले उन जैसे बिरले ही होते हैं। तभी तो भोपाल की पूरी पत्रकार बिरादरी उनके जाने के बाद से ऐसे सदमे में हैं जैसे उनके घर का कोई करीबी ही नहीं रहा। जनसंपर्क कर्मी तो वो नाम के थे दिल से पक्के पत्रकार इसलिये हर पत्रकार के सुख दुख का ख्याल रखने वाले। सन दो हजार में मेरे भोपाल आने के बाद से ही उनसे ऐसे संबंध बने कि वो शहर में मेरे सबसे बडे हितचिंतक थे। अभी पिछले दिनों वो विधानसभा में मिले तो मनोज शर्मा को ताना मारा कि ब्रजेश की नयी किताब आयी है और हम कुछ जश्न ही नहीं मना पा रहे तो चलो लस्सी ही पी लो। और फिर क्या था विधानसभा के गेट पर सांची पार्लर पर वो मुझे और मनोज को लस्सी पिलाने लाये मगर जब तक वो वहां से हटते मनोज भाई पंद्रह बीस पत्रकार और कैमरामैन को लस्सी पिला चुके थे । कोरोना में बीमार पड़ने की खबर करीबियों को ही मालुम थी और जब तक सबको खबर आती लोग प्रयास करते वो किसी की मदद लिये बिना ही अंतहीन सफर पर निकल पडे। और हम कहते ही रह गये कि भगवान भले आदमियों को क्यों बुलाने में इतनी जल्दी करता है।
मनोज राजपूत भी कम ना थे। खासे दबंग और तीखे सवाल पूछने वाले पत्रकार। पिछले सालों में उन्होंने ढेर सारे संस्थानों में काम किया तो एक दिन मैंने बिना मांगे की सलाह दे डाली। भाई जहां जाओ थोडा टिक कर काम किया करो। क्यों संस्थान में जाते ही निकलने की उतावली करने लगते हो। इस पर मनोज ने जो जवाब दिया वो आज के जमाने की कड़वी सच्चाई हैं मनोज ने कहा एक तो सबको आप जैसी सुरक्षित नौकरी नहीं मिलती दूसरी हम जैसों को जो मिलती है तो मालिक पत्रकारिता छोड दूसरे सारे काम करने को कहता है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती ही जा रही थी उस पर बेरोजगारी की मार लगने लगा था कि ये पत्रकार अब अपने अच्छे दिनों में नहीं है। ऐसे में कोरोना ने मनोज को हमसे जल्दी छीन ही लिया।
महेंद्र गगन भी भोपाल में पत्रकारों की उस परंपरा को निभा रहे थे जो पत्रकारिता के साथ लेखन और प्रकाशन में सक्रिय रही है। पहले पहल साप्ताहिक और उससे अलग उनकी कवि की छवि। मेरी एक किताब उनके प्रेस में छपी जिस वजह से लंबा आना जाना उनके प्रेस में रहा और उनको करीब से जाना तो लगा कि जितने सहज इनका व्यवहार है उतना सरल ही उनका लेखन भी है। दुर्भाग्य देखिये कि कोरोना से बचने के लिये उन्होने सुंदर कविता लिखी थी अपने घर में रहो। इस कविता की कुछ पंक्तियां देखिये
इधर उधर न रहो,
न किसी सफर में रहो,
वक्त का तकाजा है,
अपने घर में रहो,
वक्त के तकाजे से लोगों को आगाह करते करते महेंद्र गगन जी हम सबको छोड गये। अपने इन सभी अग्रजों को विनम्र श्रद्धांजलि,,,
ये लेख दो दिन पहले लिखा था सोचा था कुछ फेरबदल करूंगा मगर आज सुबह फिर एक अपने करीबी पवन सिंह की मौत की खबर आ गयी और दिल कांप गया।एबीपी न्यूज भोपाल में मेरे साथ रहे हंसमुख और जिंदादिल पवन को भी कोरोना ने छीन लिया। प्रिय पवन ये भी कोई उम्र होती है जाने की ? अब मैं इस कड़ी को लंबा नहीं करना चाहता..
विचारक अर्सेनी तर्कोवस्की ने सच ही कहा था कि ,,
जीवन चल रहा है हमारी इच्छाओं से अलग ..
मगर कब तक ?

यूएस चुनाव: अमेरिका में चुनाव को लेकर बोले सीनेटर, कहा- मीडिया को ज्यादा दखल नहीं देने देंगे

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वाशिंगटन। अमेरिका में चुनाव और ट्रंप पर गोली चलने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। जहां कुछ सीनेट जहां ट्रंप का समर्थन कर रहे हैं तो वहीं कुछ सांसद मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेसी पीटर एंडरसन सेशंस ट्रंप पर हुए हमले को लेकर कहते हैं शनिवार को पेंसिल्वेनिया में जो हुआ उसने पूरी दुनिया का ध्यान केंद्रित किया है। मुझे लगता है यह किसी लड़ाई के साथ नहीं बल्कि एक संकल्प के साथ हैं। हमको लगता है कि जो लोग हमसे असहमत हैं, वो हमको असफल करने में किसी भी हद तक जा सकते हैं। डोनाल्ड ट्रंप एक मजबूत आवाज हैं। हम चाहते हैं कि हम साथ मिलकर काम करें। प्रेम और भाईचारे के साथ हम पार्टी ही नहीं बल्कि देश और दुनिया को आगे ले जाने के लिए जरूरी काम करेंगे।

‘सांस्कृतिक विविधता अमेरिका को अद्भुत बनाती है’
वहीं मिशेल मॉरो कहती हैं कि हम मीडिया को अब और अनुमति नहीं दे सकते हैं कि वह हमको बताए कि हमको क्या करना चाहिए। हमको हमारे नेताओं के बारे में क्या सोचना चाहिए। जो चीज अमेरिका को इतना अद्भुत बनाती है, वह सांस्कृतिक विविधता है।

‘हर देश को यह निर्धारित करने का आधिकारी है कि किसे प्रवेश करने देना है’
कैलिफोर्निया राज्य के एक प्रतिनिधि ब्लेक कहते हैं, “मैं डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थक हूं और मैं उनका समर्थन इसलिए करता हूं क्योंकि वह सीमा सुरक्षा पर बहुत मजबूत हैं। सीमाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें वापस सत्ता में लाना चाहिए। मेरा मानना है कि प्रत्येक देश को यह निर्धारित करने का अधिकार है कि किसे देश में प्रवेश करने और अंदर रहने में सक्षम होने देना है।

डोनाल्ड ट्रंप को राजनीति में रहने की जरूरत नहीं
सीनेटर मार्को रुबियो कहते हैं, “यह वह व्यक्ति (डोनाल्ड ट्रम्प) है जिसे राजनीति में रहने की जरूरत नहीं है। ट्रंप के पास अकूत संपत्ति है। वह अपने कमाए हुए पैसे बेहतरीन जिंदगी का आनंद लें। फिर भी वह एक सेलिब्रिटी ही रहेंगे।

पिछले कुछ दिन ट्रंप और उनके परिवार के लिए बेहद कठिन गुजरे हैं। उस घटना के दिन वह चाहते तो तुरंत सुरक्षित निकल सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और वह खड़े होकर अपने समर्थकों की तरफ उन्होंने इशारा किया। क्योंकि ट्रंप चाहते थे कि जो लोग घंटों उनका इंतजार कर रहे हैं, उन्हें पता चल जाए कि वह अब ठीक हैं।

भारत अमेरिका के लिए बेहद अहम साझेदार
अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में अधिकारी एलब्रिज ए कोल्बी भारत को लेकर कहते हैं, मुझे लगता है कि पूरे देश में, लेकिन निश्चित रूप से रिपब्लिकन पार्टी में, एक बहुत स्पष्ट भावना है कि भारत एक प्रमुख सहयोगी और भागीदार है। भारत के अपने स्पष्ट विचार हैं। जाहिर सी बात है भारत एक मजबूत शक्ति बनकर उभर रहा है और सारी जिम्मेदारी लेने के लिए भी तैयार है। भारत वास्तव में किसी पर निर्भरता नहीं चाहता है। हमको इस युग में ऐसे साथी की जरूरत है जो पहाड़ों पर चीन जैसे देश के सामने खड़ा होने के लिए तैयार हो।

यहूदियों का पूरा समर्थन ट्रंप को है
इस्राइल 365 के मध्य पश्चिम निदेशक एना का कहना है, “पिछले चुनाव में 80% यहूदियों ने डेमोक्रेट के लिए मतदान किया। हम एक आघात चक्र में हैं। हम यहूदियों को आजाद होने की जरूरत है। यहूदियों को आखिरकार यह समझने की जरूरत है कि हम अस्तित्व के लिए मतदान कर रहे हैं। हम एकमात्र राष्ट्रपति के लिए मतदान कर रहे हैं जो हमें इस विपरीत समय से बाहर निकालेगा, जिसमें हम जी रहे हैं। हम सभी को डोनाल्ड ट्रम्प को वोट देना चाहिए।”

ट्रंप के समर्थकों में दिखा जबरदस्त उत्साह
युवा रिपब्लिकन के लिए डेलावेयर राज्य अध्यक्ष का कहना है, डेलावेयर के युवाओं के रूप में, हम आपको बता सकते हैं कि डोनाल्ड ट्रम्प और जेडी वेंस का संयोजन, जो हमारे देश में उपराष्ट्रपति की पसंद होगी। युवा मतदाताओं के रूप में हम देखते हैं यह वह सरकार बनाने जा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका पहले की नीति के रूप में यह सुनिश्चित करते हैं उनकी जीत से हमको एक ऐसी पार्टी मिलेगी जो देश को और मजबूत करेगी।

बस एक सनम चाहिए आशिकी के लिए

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शशी कुमार केसवानी

नमस्कार दोस्तों आइए आज बात करते हैं एक ऐसे गायक की, जिसके बारे में हमारे प्रिय जगजीत सिंह जी ने बताया था कि और मुलाकात भी उन्होंने ही कराई थी। जब जगजीत भाई ने उनका एक किस्सा सुनाया तो हमे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि वह ऐसा भी कर सकते हैं। हुआ यूं कि जगजीत एक दिन एक बार में गए और वहां पर एक लड़के को गाता हुआ सुना। उसकी आवाज सुनकर किशोर कुमार की याद आ गई। उसकी शक्ल देखकर वह चले गए। फिर उसे एक-दो बार फिर गाते सुना। बाद में रिकॉर्डिंग के समय उसकी आवाज सुनकर अंदर चले गए, देखा तो वही लड़का गा रहा था। उन्होंने लड़के से कहा रिकॉडिंग के बाद हमसे मिलो। लड़का तो गदगद हो गया। जगजीत भाई अपनी गाड़ी में बैठाकर सीधे कल्याणजी भाई के पास लेकर पहुंचे और बोले कच्चा पत्थर है, हीरा आप बना दो। जी हां दोस्तों मैं बात कर रहा सचमुच के हीरे और हर दिल अजीज गायक कुमार सानू की। कलाकार और किस्से में कुमार सानू से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्सो के बारे में जानेंगे। नब्बे के दशक के सबसे मशहूर सिंगर केदारनाथ भट्टाचार्य उर्फ कुमार सानू ने फिल्मी दुनिया में उनके दो अनोखे रिकॉर्ड हैं। पहला तो ये की उन्होने लगातार पांच साल फिल्मफेयर अवॉर्ड अपने नाम किया और दूसरा ये की कुमार सानू ने एक ही दिन में 28 गाने रिकॉर्ड किए है। वहीं उनके व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उन्होंने दो शादिया की थी। उनका परिवार लंदन में रहता है, उनकी बेटियां हैं। हालांकि अधिकतर अपना समय मुंबई में गुजारते हैं।

सानू ने अपने करियर के शुरूआती दौर में किशोर कुमार के गीतों के एल्बम जारी किए हैं, जिनमें किशोर की यादें भी शामिल है। फिर यादें सीरीज आईं जहां उन्होंने गायक अभिजीत भट्टाचार्य और विनोद राठौड़ के साथ किशोर कुमार के कई गाने गाए । शानू ने विभिन्न भारतीय फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया है। उत्थान और ये संडे क्यों आता है उनमें से सबसे उल्लेखनीय हैं। लता मंगेशकर , आशा भोंसले , कविता कृष्णमूर्ति , अनुराधा पौडवाल, सपना मुखर्जी , अलका याग्निक , सोनू निगम , साधना सरगम , सुदेश भोंसले , शान , श्रेया घोषाल , हेमा सरदेसाई , सुनिधि चौहान और कई अन्य लोगों ने उनके संगीत के लिए अपनी आवाज दी। ये कैसा उत्थान है (आशा भोंसले और सोनू निगम द्वारा दो अलग-अलग संस्करणों में गाया गया) और जिसने सपना देखा (स्वयं सानू द्वारा गाया गया) समीक्षकों द्वारा प्रशंसित हैं। उन्होंने गायक उदित नारायण के साथ टीवी शो ये दुनियां गजब की के लिए शीर्षक गीत गाया । 2017 में, सानू ने साधना सरगम के साथ 19 के दशक की कहानी पर आधारित टीवी श्रृंखला ये उन दिनों की बात हैं के शीर्षक ट्रैक के लिए गाया और इसमें कैमियो के लिए एक भाग के रूप में भी दिखाई दिए। 2019 में, उन्होंने स्टार प्लस के कुल्फी कुमार बाजेवाला के लिए थोड़ा सा गाना गाया।फिल्मों के लिए गायन और संगीत रचना के अलावा, उन्होंने फिल्मों के निर्माण में भी रुचि दिखाई है। 2006 में उन्होंने अपनी पहली हिंदी फिल्म उत्थान का निर्माण किया । वर्तमान में, वह अपने साथी निमार्ता राकेश भाटिया के साथ ये संडे क्यों आता है नामक एक नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं । यह फिल्म चार बच्चों के जीवन पर आधारित है जो मुंबई की सड़कों पर रहते हैं और अपनी आजीविका कमाने के लिए रेलवे स्टेशन पर जूते पॉलिश करते हैं। फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती मुख्य भूमिका में होंगे। हाल ही में, सानू ने बांग्लादेशी बंगाली फिल्म हसन राजा के लिए गाना गाया , जिसे यूके स्थित फिल्म निमार्ता रुहुल अमीन ने निर्देशित किया था। यह फिल्म कभी रिलीज नहीं हुई. उन्होंने कुछ बंगाली फिल्मों के लिए भी रचना की है; अमृता और टोबू अपोरिचिटो । शानू सोनी टीवी पर एक गायन घराने (गायकों के परिवार) को एक साथ लाने पर आधारित एक रियलिटी शो, वार परिवार के लिए और जी टीवी पर सा रे गा मा पा नामक एक संगीत रियलिटी शो में जजों के पैनल में थे। 2012 में, उन्होंने जी बांग्ला म्यूजिकल रियलिटी शो सा रे गा मा पा – गाने गाने तोमार मोने को जज किया । वर्तमान में, वह स्टार जलसा के लोकप्रिय म्यूजिकल रियलिटी शो सुपर सिंगर के जजों में से एक हैं ।

अन्य गायकों के साथ काम करें
शानू ने गायिका लता मंगेशकर , आशा भोंसले , केएसचित्रा , अनुराधा पौडवाल , अलका याग्निक , कविता कृष्णमूर्ति , साधना सरगम , अलीशा चिनॉय, सुनिधि चौहान, सपना मुखर्जी , पूर्णिमा , सपना अवस्थी , हेमा सरदेसाई , श्रेया घोषाल , आकृति कक्कड़ के साथ कई हिट युगल गीत गाए । , मोनाली ठाकुर , नेहा कक्कड़ , जसपिंदर नरूला और अन्य। सानू ने अपनी बेटी शैनन के , पॉप गायिका और गीतकार के साथ भी कई युगल गीत गाए, जिन्होंने 2017 में संयुक्त राज्य अमेरिका में अपना करियर शुरू किया है।

पहली बार स्टेज पर भीड़ देख डर गए थे सानू
शुरुआती दौर में कन्याणी आंनदजी के एक शो में कुमार सानू गए और जब वो वहां पहुंचे तो स्टेज खाली जा रहा था। उस वक्त वहां पर 22,000 से ज्यादा लोग मौजूद थे। कुमार सानू को उस स्टेज पर गाना गाने के लिए भेज दिया और जब कुमार सानू स्टेज पर पहुंचे तो इतनी भीड को देखकर डर गए, लेकिन उन्होंने जो पहला गाना गया था वो था किशोर कुमार का गाना वादा तेरा वादा। उस गाने के लिए कुमार सानू को खूब तालियां मिली। फिर क्या था, उस दिन से कुमार सानू का करियर ग्राफ ऊपर उठता चला गया। कुमार सानू कोलकाता में अपनी अवाज में गाने रिकोर्ड करके कैसेट बना कर बड़े-बड़े म्यूजिक डायरेक्टर के पास जाते थे, लेकिन उनको वहां से निकाल दिया जाता था। फिर किस्मत ऐसी पलटी कि उन म्यूजिक डायरेक्टर ने ही उनको मुबंई में आकर गाने दिए और 8-8 दिन बैठ कर गाने रिकॉड किए। कुमार सानू जो किशोर कुमार को अपना आर्दश मानते हैं और उन्हीं के रास्ते पर चलकर अपनी संगीत की कला को जारी रखे हुए है। आपको बता दें, कुमार सानू उनकी आवाज में ही कार्यक्रमों में गीत गाया करते थे।

अमित कुमार की जगह कुमार सानू को चुना गया
80 का दशक खत्म हो रहा था, 90 का शुरू हो रहा था। इसी दौर की बात है। डेविड धवन ‘आंधियां’ बना रहे थे। इसमें बप्पी लाहिड़ी म्यूजिक दे रहे थे। शत्रुघ्न सिन्हा के लिए एक प्लेबैक वॉइस की जरूरत थी। किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार का नाम तय हुआ। रिकॉर्डिंग की तारीख भी तय हो गई। पर अमित कुमार स्टूडियो नहीं पहुंचे। काफी देर इंतजार हुआ। उस समय जगजीत सिंह और उनके साथ कुमार सानू भी स्टूडियो में मौजूद थे। जगजीत सिंह ने कहा एक बार कुमार से गवाकर देखो। तय ये हुआ कि गाना पसंद नहीं आया, तो बाद में उसे अमित कुमार से गवाया जाएगा। पर ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। कुमार की आवाज में गाना पास हो गया। गाना था ‘फिर दिल ने वो चोट खाई’ उसके बाद ‘आशिकी’ आई, फिर तो कुमार सानू चमक गए। ‘आशिकी’ के बनने और उसमें कुमार सानू के गानों के शामिल होने की भी एक कहानी है। जो फिर कभी। फिलहाल के लिए अलविदा।

हाल ही में सानू ने हम और तुम नाम से रिकॉर्ड किया है एल्बम
हाल ही में उन्होंने हम और तुम नाम से एक एल्बम रिकॉर्ड किया है । उन्होंने एक एल्बम के लिए एक स्पेनिश गाना भी रिकॉर्ड किया। एक दिन में सबसे ज्यादा 28 गाने रिकॉर्ड करने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। उन्होंने एक अभिनेता के रूप में फिल्मों सपने साजन के (1992) हम आपके दिल में रहते हैं (1999) और दम लगा के हईशा (2015) में विशेष भूमिका निभाई। शानू विश्व बंधन के ट्रस्टी और ब्रांड एंबेसडर हैं, सेरेब्रल पाल्सी के लिए एक फाउंडेशन। सानू ने दिल्ली के करोल बाग में वंचित बच्चों के लिए एक प्राथमिक विद्यालय, कुमार शानू विद्या निकेतन, खोला। छात्रों को वर्दी और किताबें मुफ्त दी जाती हैं। 2022 में सानू ने संगीत निर्देशक वैभव सक्सेना और दो युवा गायकों के साथ मोहब्बत में तेरे सनम के लिए सहयोग किया, जिसे नए जमाने के रिकॉर्ड लेबल वूसिक रिकॉर्ड्स द्वारा दुनिया भर में रिलीज और वितरित किया गया था।

किशोर कुमार का गाना गाया, 5000 की टिप मिल गईड्ड3
छोटे शहरों के आॅटो वालों का अलग संसार है। हम इक्कीसवीं सदी में हैं। पर उनका मन अभी बीसवीं सदी में कहीं विचर रहा है। आज भी आॅटो में बैठेंगे, तो लगेगा किसी ने 90 के दशक में धक्का दे दिया है। वहां आपको अलका याग्निक, सोनू निगम, उदित नारायण, अभिजीत और ऐसे ही उस दौर के तमाम सिंगर्स के गाने बजते मिलेंगे। इनमें से एक नाम है, जिसकी छाप बहुत गाढ़ी है। लगभग सबने उसे पसंद किया और आज भी करते हैं। जनता के दिलों पर एकक्षत्र राज करने वाले कुमार सानू। उनकी आवाज के जादू ने हजारों फैंस कमाए। एक से एक फैन किसी ने उनकी फोटो से शादी कर ली। किसी ने उनके नाम के टैटू गुदवा लिए। सोचिए कैसा जलवा था कुमार का कि पांच बार लगातार फिल्मफेयर अपने नाम किया। 26 भाषाओं में 20 हजार से ज्यादा गाने गाए। उनकी ऐसी पूछ थी कि एक बार एक ही दिन में उन्होंने 28 गाने रिकॉर्ड किए। खैर, ये तो बात है, जब वो बड़े सिंगर बन गए। बॉलीवुड में स्थापित हो गए। आपको उनके शुरूआती दौर के तीन मजेदार किस्से सुनाते हैं।

कुमार सानू के घर में गाने का माहौल था। पिता पशुपति भट्टाचार्या भी सिंगर-कम्पोजर थे। पर उनकी शास्त्रीय संगीत में पैठ थी। कुमार फिल्मी सिंगर बनना चाहते थे। सानू ने पिता से ही सीखा और खूब सीखा। गाने से पहले वो तबला भी बजाया करते थे। मन में सपना तो सिंगर बनने का ही था। इसलिए मुम्बई आ गए। यहां वाशी इलाके में कुछ लोगों से जान-पहचान हो गई। उन लोगों ने एक मेस में उनके रहने-खाने का इंतजाम कर दिया। बस बदले में कुमार को दो-तीन गाने वहां गाने होते। बात बन गई। उनका मुम्बई में स्ट्रगल करने का इंतजाम हो गया। इसी दौरान वो एक होटल गए। वहां देखा कि एक लड़का गाना गा रहा है। सानू को लगा ये काम तो वो भी कर सकते हैं। होटल मालिक से मुलाकात की। अपनी मंशा जाहिर की। वो राजी भी हो गया। पर मालिक के सामने एक संकट था, जो उनके यहां पहले से गा रहा है, उसका वो क्या करे? फिर भी बड़े मान मनौव्वल के बाद सानू को एक गाना गाने का मौका मिला। किशोर के फैन कुमार ने गाया ‘मेरे नैना सावन भादौ, फिर भी मेरा मन प्यासा’। होटल में आये कस्टमर्स मंत्रमुग्ध हो गए। टिप देने का सिसलिला शुरू हुआ। देखते-देखते पांच हजार रुपए इकठ्ठे हो गए। फिर क्या था। होटल के मालिक ने कहा: आज गाना गाते रहो और कल से तुम्हारे लिए यहां गाने का स्लॉट पक्का।

जगजीत सिंह ने सुना और भाग खुल गए- कुमार को प्लेबैक सिंगर के तौर पर पहला मौका 1986 में आई बांग्लादेशी फिल्म ‘तीन कन्या’ में मिला। बॉलीवुड में इसके ठीक तीन साल बाद ‘हीरो हीरालाल’ से उन्होंने डेब्यू किया। पर बॉलीवुड में उनके लिए एक शख्स मसीहा बनकर आया। उनके जीवन में जगजीत सिंह की आवती हुई। उन्होंने ही सानू को कई बड़े-बड़े कम्पोजर्स से मिलवाया। ऐसा कहते हैं कि कुमार को शुरूआती दौर के गाने जगजीत की वजह से ही मिले। दरअसल कुमार को होटलों में गाने के लिए जो पैसे मिलते। उससे वो गाने रिकॉर्ड करते, उनके कैसेट बनाते। ऐसी ही एक कैसेट के लिए वो किसी स्टूडियो में किशोर कुमार का कोई गाना रिकॉर्ड कर रहे थे। उसी वक़्त जगजीत भी वहां थे। उन्हें सानू की आवाज और गायकी दोनों पसंद आई। उन्होंने सानू को घर बुलाया। एक गाना सिखाया। उसे रिकॉर्ड किया। सानू के साथ कल्याणजी-आनन्दजी के पास पहुंच गए। वो भी सानू की गायकी से प्रभावित हुए। उन्हें अपने शो में ले लिया। सानू अब उनके शोज में गाने लगे। उस समय उनका नाम हुआ करता था केदारनाथ भट्टाचार्य। कल्याणजी-आनन्दजी का मानना था कि इस बंगाली नाम के साथ हिंदी गाने पाना मुश्किल होगा। चूंकि केदार की आवाज और अंदाज किशोर कुमार से मिलती थी। सानू उनके घर का नाम था। उसी वक़्त केदारनाथ भट्टाचार्य कुमार सानू बन गए। आगे चलकर कुमार ने कल्याणजी-आनन्दजी के लिए ‘जादूगर’ फिल्म में गाना भी गाया।

किसान आंदोलन नाजुक दौर में, सिर्फ दो जत्थेदारों के नेतृत्व में चल रहा प्रोटेस्ट पंढेर ने बताई पांच दिनों की योजना

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पटियाला। किसान आंदोलन इस समय नाजुक दौर पर खड़ा है। 21 फरवरी को खनौरी सीमा पर एक युवा किसान की मौत के बाद से आंदोलन में फिलहाल एक ठहराव सा आ गया है। उधर, किसान नेताओं में आपसी मतभेद लगातार बढ़ रहे हैं। इससे आंदोलन में किसानों की आगे की राह आसान नहीं लग रही। यह आंदोलन केवल दो जत्थेबंदियों संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेतृत्व में चलाया जा रहा है, जबकि संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने इससे दूरी बना रखी है, जिसके बैनर तले साल 2020 में पहला किसान आंदोलन चला था।

हाल ही में एसकेएम ने बैठक करके शंभू व खनौरी सीमा पर किसानों पर हुए अत्याचार के खिलाफ संघर्ष के कार्यक्रमों का एलान किया। इससे लगा कि शायद अब किसान नेता सभी आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक मंच पर आएंगे और मांगों के हल के लिए लड़ेंगे, लेकिन अब भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने तल्ख बयान दिया है। उन्होंने कहा, यह किसान आंदोलन केवल दो जत्थेबंदियों से जुड़ा है। इन जत्थेबंदियों का आंदोलन करने का तरीका सही है या गलत, इसकी जवाबदेही हमारी नहीं बनती।

हमारे संगठन ने जब मानांवाली में मोर्चा लगाया था तो उस समय इन जत्थेबंदियों ने हमारा साथ नहीं दिया था। तब हमने तो नहीं कहा था कि साथ क्यों नहीं दिया। फिर अब हम पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं कि दिल्ली कूच में साथ क्यों नहीं दिया। हमारे बीच कितने ही वैचारिक मतभेद हों, लेकिन फिर भी जब सीमा पर किसानों पर गोले फेंके गए, हमारी जत्थेबंदी ने रेल रोको आंदोलन किया, टोल फ्री कराए और भाजपा नेताओं के घरों के बाहर प्रदर्शन किया।

ऐसे में हम पर अंगुली उठाना सही नहीं है। भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के प्रदेश महासचिव एवं एसकेएम के नेशनल को-आॅर्डिनेशन मेंबर जगमोहन सिंह ने कहा, इस आंदोलन में जोश के साथ होश की कमी दिख रही है। उन्होंने माना कि अगर पंधेर व डल्लेवाल के संगठन एसकेएम के साथ मिलकर यह आंदोलन आगे बढ़ाते तो केंद्र पर ज्यादा दबाव बनाया जा सकता था। इसलिए एसकेएम की ओर से छह मेंबरी कमेटी बना दी गई है, जो पंधेर व डल्लेवाल के संगठनों के साथ बैठकर चर्चा करेगी।

पंढेर ने बताई पांच दिनों की योजना
किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि आज शंभू और खनौरी में मोर्चों का 13वां दिन है। आज हम दोनों सीमाओं पर एक सम्मेलन करेंगे क्योंकि डब्ल्यूटीओ पर चर्चा होगी। हमने मांग की है कि कृषि क्षेत्र को डब्ल्यूटीओ से बाहर रखा जाए। हम शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। 26 फरवरी की सुबह विरोध स्वरूप डब्ल्यूटीओ, कॉरपोरेट घरानों और सरकारों की अर्थियां जलाई जाएंगी। दोपहर में दोनों बॉर्डर पर 20 फीट से ज्यादा ऊंचे पुतले जलाए जाएंगे। 27 फरवरी को किसान मजदूर मोर्चा, एसकेएम (गैर राजनीतिक) देश भर के अपने सभी नेताओं की बैठक करेगा। 28 फरवरी को दोनों मंच बैठेंगे और चर्चा करेंगे। 29 फरवरी को अगले कदम पर फैसला किया जाएगा। हम पीएम मोदी से किसानों के साथ जो कुछ भी हो रहा है उस पर बोलने के लिए कह रहे हैं।

किसानों से बर्बरता देश के लिए सही नहीं : बजरंग
किसान आंदोलन-2 में दिल्ली कूच के दौरान युवा किसान की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने को लेकर ओलंपियन पहलवान बजरंग पूनिया ने सोशल मीडिया पर कहा, किसानों के साथ बर्बरता किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए सही नहीं है। विदेश में ओलंपिक की तैयारी में जुटे पहलवान पूनिया ने शनिवार को एक्स पर लिखा, 21 फरवरी को एक नौजवान किसान शहीद हो चुका है और दूसरा गंभीर है। हरियाणा-पंजाब की सीमा पर स्थित दाता सिंह वाला सीमा से दिल्ली कूच के दौरान शुभकरण की मौत हो गई थी और प्रीतपाल सिंह घायल हुए थे।

शाहरुख को सड़क से उठाकर स्टार बनाया इस दिग्गज ने

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शशी कुमार केसवानी

नमस्कार दोस्तों, आइए आज बात करते हैं भारतीय फिल्म उद्योग ऐसी शख्सियत की जिसे बनना तो इंजीनियर था पर बन गया फिल्म डायरेक्टर। डायरेक्टर भी ऐसा बना कि राह चलते लड़के को सुपर स्टार बना दिया है। जी हां दोस्तों मैं बात कर रहा हूं जाने माने फिल्म डायरेक्टर लेख डंटन की, जिन्होंने सड़क से शाहरुख खान को उठाकर किंग खान बना दिया है। हालांकि लेख टंडन को फिल्मों में जोड़ने का मौका पृथ्वी राजकपूर की वजह से मिला था, लेकिन दुखद घटना यह रही की कि वे रणधीर कपूर को लेकर एक फिल्म बनाना चाहते थे, पर वह फिल्म पूरी न हो सकी। यही कारण रहा कि दोनों परिवारों के बीच मनमुटाव कभी खत्म न हो सका। अचानक पृथ्वी राजकपूर की मृत्यु, बाद में राजकपूर और शमी कपूर की मौत के बाद कोई सुलह सफाई का रास्ता ही खत्म हो गया था। हालांकि बाद में लेख टंडन भी नहीं रहे। पर मनमुटाव रह गया। यह बात अलग है कि लेख टंडन ने जो भी काम किया वह बेमिसाल रहा। उनकी कई फिल्मों के लिए उन्हें हमेशा याद किया जएगा। तो आईए आज लेख टंडन के कुछ अनछुए पहलुओं पर बात करते हैं…

लेख टंडन का जन्म 13 फरवरी 1929 में हुआ था। वह एक भारतीय फिल्म निर्माता और अभिनेता थे। उन्होंने कई बॉलीवुड फिल्मों और भारतीय टीवी धारावाहिकों का निर्देशन किया था। उन्होंने अपने निर्देशन में बनी फिल्मों प्रोफेसर (1962 फिल्म) , प्रिंस (1969 फिल्म) , एक बार कहो और अगर तुम ना होते की सफलता के कारण राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की । उनकी वैजंतीमाला अभिनीत आम्रपाली और राजेश खन्ना की मुख्य भूमिका वाली अगर तुम ना होते को क्लासिक्स माना जाता है। बाद में 2000 के बाद, उन्होंने स्वदेस , रंग दे बसंती , चेन्नई एक्सप्रेस और चारफुटिया छोकरे जैसी फिल्मों में अभिनय किया । वह उर्दू नाटककार योगराज टंडन के भाई थे। लेख के पिता फकीर चंद टंडन ने पृथ्वीराज कपूर के साथ खालसा हाई स्कूल ( लायलपुर , पंजाब, ब्रिटिश भारत ) में पढ़ाई की थी और वे दोस्त थे। कपूर ने ही लेख को बॉलीवुड में काम करने के लिए प्रेरित किया। लगभग उसी समय, लेख के भाई योगराज कपूर के सहायक निदेशक और सचिव के रूप में काम कर रहे थे। लेख ने 1950 के दशक में हिंदी फिल्म उद्योग में सहायक निर्देशक के रूप में शुरूआत की और प्रोफेसर (1962 फिल्म) से शुरूआत करके कई हिट फिल्मों के निर्देशक बने । हालांकि राजेंद्र कुमार और सायरा बानो अभिनीत प्रतिष्ठित फिल्म झुक गया आसमान बॉक्स आॅफिस पर सफल नहीं हुई, लेकिन उन्हें क्लासिक्स माना जाता है। बॉक्स आॅफिस पर उनके सफल निर्देशन में प्रिंस (1969 फिल्म) , एक बार कहो , अगर तुम ना होते शामिल हैं । उनकी सबसे चर्चित फिल्म अगर तुम ना होते है जिसमें राजेश खन्ना मुख्य भूमिका में थे। दुल्हन वही जो पिया मन भाये उनकी सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक थी और फिल्म की नायिका रामेश्वरी ने बताया कि टंडन फिल्म के हर पहलू में शामिल थे।

उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म बिना किसी प्रचार के रिलीज हुई थी. अभिनेता विक्टर बनर्जी , जिन्होंने उनकी फिल्म दूसरी दुल्हन में मुख्य भूमिका निभाई, ने उन्हें एक ऐसे निर्देशक के रूप में वर्णित किया, जो “अपनी कला से प्यार करते थे और शालीनता से बताई गई कहानी में व्यावसायिक कोण को चतुराई से बुन सकते थे। इस फिल्म के लिए खन्ना को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला और टंडन को 1983 में फिल्मफैंस एसोसिएशन अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार मिला। फिर वह नवजात टीवी परिदृश्य में चले गए और टीवी धारावाहिकों का निर्देशन करना शुरू कर दिया। उनकी पहली पेशकश भारत के राष्ट्रीय टेलीविजन चैनल दूरदर्शन पर फिर वही तलाश थी । लेख को अपने टीवी धारावाहिक 2दिल दरिया में शाहरुख खान को कास्ट करके उनकी खोज करने का श्रेय दिया जाता है । लेख ने लंकेश भारद्वाज की भी खोज की और उन्हें वर्ष 2001 में उनके साथ लेखन में सहायक के रूप में नियुक्त किया और उन्हें एक आंगन हो गए दो में एक अभिनेता के रूप में मौका दिया । उन्होंने 1990 के दशक की शुरूआत में दूरदर्शन पर प्रसारित टीवी धारावाहिक फरमान का भी निर्देशन किया।

लेखनी में खूब माहिर थे लेख टंडन
एक बातचीत के दौरान लेख टंडन ने हमें बताया था कि ‘अस्सी के दशक में मैं दिल्ली में टीवी सीरियल शूट कर रहा था। एक दिन एक जवान लड़का सेट पर किसी को छोड़ने आया। उसके लंबे-लंबे बाल थे। मैंने उसे रोका और पूछा कि मेरे साथ काम करोगे पर बाल काटने होंगे।’ ‘लड़के ने पूछा अगर मैं बाल कटवा लूं और आपने काम भी नहीं दिया तो? मैंने कहा बाल काटवाओ, काम मिलेगा। वो बाल कटवाकर आया पर मैंने कहा कि इतने से नहीं चलेगा। और काटने पड़ेंगे। वो मान गया और मेरे टीवी सीरियल दिल दरिया में काम करने लगा।’ उन्होंने में आगे बताया कि ‘शाहरुख ने सीरियल में बहुत अच्छा काम किया। मैंने एक और सीरियल में उसका नाम आगे बढ़ाया -फौजी। फौजी टीवी पर पहले टेलीकास्ट हुआ। कुछ साल बाद वो अपने मेहनत के बूते फिल्मों तक पहुंच गए।’ कुंदन शाह और सईद मिर्जा समेत लेख टंडन उन जौहरियों में से थे, जिन्होंने शाहरुख को उस समय तलाशा और तराशा, जब उन्हें कोई नहीं जानता था। लाहौर में रहने वाले लेख टंडन का परिवार कपूर खानदान से काफी करीब था। लेख टंडन ने यूं तो सिविल इंजीनियर बनने के लिए इम्तिहान पास कर लिया था लेकिन उनका मन मुंबई आकर फिल्में करने का ही था। इसलिए जानबूझकर उन्होंने प्रवेश परीक्षा का एक पेपर दिया ही नहीं था।

लेख टंडन 60 के दशक से लेकर नई सदी तक फिल्मों में कई पड़ावों के गवाह रहे हैं। 60 के दशक में जहां उन्होंने शम्मी कपूर के साथ प्रोफेसर और प्रिंस जैसी कॉमर्शियल हिट फिल्में बनाई तो वैजयंतीमाला के साथ आम्रपाली जैसी फिल्म पर भी काम किया। 70 के दशक में उन्होंने राजेश खन्ना को ‘अगर तुम न होते’ के जरिए उस समय हिट फिल्म दी जब राजेश खन्ना का सुपरस्टार वाला दौर खत्म हो रहा था। लेखनी में भी लेख टंडन खूब माहिर थे। वो फिल्मों और टीवी की कहानियां भी लिखते थे। ‘दुल्हन वही जो पिया मन भाए’ के स्क्रीनप्ले के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। 80 के दशक में लेख टंडन ने दर्शकों को फरमान, फिर वही तलाश जैसे सीरियल दिए और दूसरा केवल भी जिसमें दोबारा शाहरुख ने काम किया। शाहरुख और लेख टंडन के बीच गुरु-शिष्य का बेहतरीन रिश्ता बरसों तक बना रहा। शाहरुख की कई फिल्मों में उन्होंने एक्टिंग भी की जैसे स्वदेश और चेन्नई एक्प्रेस।

शाहरुख ने छोड़ दी थी फिल्म की शूटिंग
लेख टंडन ऐसी शख्सियत रहे हैं जिन्होंने शम्मी कपूर, सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार, राजेश खन्ना, विनोद खन्ना जैसे सितारों को लेकर फिल्में बनाईं। लेख टंडन ने शाहरुख खान और जूही चावला को लेकर साल 1993 में एक फिल्म ‘बड़ा आदमी’ भी शुरू की थी लेकिन फिल्म बन नहीं सकी। लेख टंडन का जन्म लाहौर,पंजाब में हुआ। 15 अक्तूबर 2017 को 88 वर्ष की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु से पहले लेख टंडन ने तीन तलाक पर आधरित फिल्म ‘फिर उसी मोड़ पर’ का निर्देशन किया था। यह फिल्म उनकी मृत्यु के बाद 24 फरवरी 2018 को रिलीज हुई। ‘फिर उसी मोड़ पर’ की मुंबई के चांदीवली स्टूडियो में शूटिंग के दौरान लेख टंडन से आखिरी बार हुई बातचीत के दौरान उन्होंने बताया था कि वह शाहरुख खान को लेकर साल 1993 में एक फिल्म ‘बड़ा आदमी’ बना रहे थे जिसके प्रोड्यूसर प्रेम लालवानी थे। शूटिंग के दौरान जूही चावला को कुछ समस्या हुई और शाहरुख खान ने फिल्म छोड़ दी और वह फिल्म ठंडे बस्ते में चली गई। लेख टंडन शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेस’, ‘पहेली’ और ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ में अभिनय कर चुके हैं। लेख टंडन ने बताया था कि शाहरुख खान ने भले ही उनकी फिल्म में काम नहीं किया लेकिन शाहरुख खान की वजह से ही वह अभिनेता बने। लेख टंडन शाहरुख खान का शुक्रगुजार मानते थे कि शाहरुख खान की वजह से वह अभिनेता बने। दिलचस्प बात यह भी रही कि लेख टंडन ने ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ को छोड़कर शाहरुख खान की किसी भी फिल्म में काम करने के बदले पैसे नहीं लिए। वह ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ के लिए भी पैसे नहीं ले रहे थे लेकिन शाहरुख खान ने एक छोटी सी भूमिका के लिए उन्हें 11 लाख रुपये भिजवा दिए थे।

पृथ्वी को बिना राजकपूर लेख को लेकर गए थे केदारनाथ के पास

शायद यह बात बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि राजकपूर अपने पिता को बताए लेख को अपने गुरु केदारनाथ शर्मा के पास असिस्टेंट डायरेक्टर के लिए ले गए। पर उस समय केदारनाथ ने मना कर दिया कि पांच असिस्टेंट मेरे पास पहले से ही हैं और क्या करूंगा। पर राजकपूर की गुजारिश के बाद उन्होंने कहा अभी रुक जा आगे देखूंगा। राजकपूर और लेख टंडन की दोस्ती की मिशाल उस समय दी जाती थी। दोनों अक्सर साथ में हर समय नजर आते थे। सुबह के नाश्ते से लेकर रात की महफिल तक दोनों एक दूसरे का पूरा साथ निभाते थे।

किंग खान के बाल कटवा दिए थे लेख ने, राजेश को भी दिया था सहारा
लेख टंडन ऐसे फिल्ममेकर थे जिसने बॉलीवुड की कई मूवीज और टीवी सीरियल्स बनाए। 13 फरवरी 1929 में जन्में लेख टंडन ने शाहरुख खान को पहली बार काम देकर एक्टिंग की दुनिया में एंट्री करवाई थी। पाकिस्तान के शेखपुरा में जन्में लेख की फैमिली कपूर खानदान के काफी करीब थे। प्रोफेसर, प्रिंस, एक बार कहो, अगर तुम ना होते जैसी फिल्मों के डायरेक्टर ने फरमान, फिर वही तलाश, दूसरा केवल जैसे टीवी धारावाहिक भी बनाए। लाइम लाइट से दूर रहने वाले लेख ने फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज कलाकारों की मदद की थी, जिसमे सुपरस्टार राजेश खन्ना भी थे।

लेख टंडन उन जौहरियों में से थे जिसने शाहरुख खान को तब ब्रेक दिया जब उन्हें कोई जानता नहीं था। इसके अलावा शाहरुख के एक्टिंग कौशल को तराशने में अहम भूमिका निभाई। शाहरुख खान आज अगर बॉलीवुड के सफल एक्टर हैं तो इसकी नीव में लेख जैसे निर्देशक हैं। लेख ने बताया था कि अस्सी के दशक की बात है मैं दिल्ली में एक टीवी सीरियल की शूटिंग कर रहा था। एक दिन एक यंग लड़का शूटिंग सेट पर किसी को छोड़ने आया। मैंने उसे देखा तो पूछा कि क्या मेरे साथ काम करोगे।

लेख टंडन ने कहा कि उस लड़के के बाल लंबे थे तो मैंने एक शर्त रख दी कि पहले बाल काटने होंगे। इस पर उस लड़के ने कहा कि मैं बाल कटवा लूं और आपने काम भी नहीं दिया तो ? मैंने कहा कि नहीं तुम बाल कटवा कर आओ, काम मिलेगा। वो लड़का अपने थोड़े से बाल कटवा कर आया। फिर मैंने कहा इतने से काम नहीं चलेगा और कटवाना पड़ेगा। वो मान गया और बाल कटवा कर आया फिर मैंने अपने टीवी सीरियल दिल दरिया में काम दिया, शाहरुख ने बहुत अच्छा काम किया। फिर मैंने उसके लिए फौजी सीरियल में काम के लिए रिकमंड किया। कुछ सालों बाद तो शाहरुख अपनी मेहनत और लगन की बदौलत फिल्मों में काम करने लगे। शाहरुख लेख को अपना गुरु मानते थे।

India Food & Beverage Awards 2023: Celebrates Culinary Excellence and Digital Influence

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Shashi Kumar Keswani, Special Report

Mumbai: The vibrant and ever-evolving landscape of India’s culinary journey converged in a dazzling celebration at the seventh edition of the India Food & Beverage Awards (IFBA 2023). Held at The Club, Mumbai, this prestigious event, hosted by the Food Bloggers Association of India (FBAI), witnessed the commendable zeal and talent of burgeoning foodpreneurs and enthusiasts.

Acknowledging the profound impact of Indian Content Creators in today’s digital realm, the IFBA 2023 spotlighted their pivotal role as influencers shaping opinions, narratives, and experiences. With over 32 cities contributing entries, including unexpected locales like Ranchi, Chiplun, Bhopal, Surat, Bhubaneshwar, Ahmedabad, and Goa, this year’s edition showcased the diverse and widespread influence of the F&B community.

In collaboration with Godrej Vikhroli Cucina, FBAI orchestrated a glittering Award Ceremony to honor winners across multiple categories, affirming their significant contributions to the food, beverage, hospitality, and lifestyle domains. Seven primary categories, including Facebook, Instagram, Blog, YouTube, Media, Hospitality, and Celebrated Chefs, encompassed sub-categories like Recipe, Review, Regional cuisine, and travel, encapsulating the multifaceted talents prevalent in the industry.A distinguished Jury Panel, featuring luminaries such as Food Writer Rashmi Uday Singh, Master Chef Ajay Chopra, and Celebrity Chef Vicky Ratnani, meticulously evaluated entries, ensuring a comprehensive recognition of excellence across diverse content creation realms.

Co-Founder of The FBAI, Salloni Malkani, shared her enthusiasm about the event’s evolution: “These awards are specific to the various fields of content creators. This year, we’ve introduced exciting new categories within the Content creation and hospitality space, including Media – TV, Print, Radio, and Podcast, Hospitality, and Chefs.”Echoing her sentiments, Co-Founder Sameer Malkani emphasized the event’s commitment to showcasing exceptional talent and innovation within the F&B and hospitality industry, reiterating the dedication and passion of content creators in reshaping the industry landscape.

IFBA serves as a testament to the influential voices and trendsetting prowess of content creators in the ever-evolving realm of content creation. Key brand partners including The Club Mumbai, Godrej Vikhroli Cucina, Godrej Jersey, Godrej Real Good Chicken, Godrej Yummiez, Aspri Spirits, Soulflower, and The Informative Observer contributed to the event’s grandeur.The hosts, Mudra Keswani and Alok Verma, themselves accomplished content creators, charmed the audience with their engaging personalities and adept MCing for the awards.

As the digital storytelling landscape continues to evolve, IFBA 2023 serves as a testament to the positive influence and commitment to excellence of these creators. Their voices resonate not only in culinary spheres but also in shaping lifestyle preferences and fostering a sense of community.

मप्र में करारी हार की गाज गिरेगी नाथ पर, शीर्ष नेतृत्व ने मांगा इस्तीफा

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नई दिल्ली। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद दिल्ली पहुंचे कमलनाथ ने मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात की है। सूत्रों ने बताया कि मंगलवार शाम साढ़े सात बजे दिल्ली में खरगे के आवास पर हुई बैठक में कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल भी शामिल हुए। इस दौरान पार्टी हाईकमान ने कमलनाथ को मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने और नया प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त करने का निर्देश दिया। सूत्रों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ कभी भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे सकते हैं।

मध्यप्रदेश में 17 नवंबर को कुल 230 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हुआ था और रविवार को तीन अन्य राज्यों छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना के साथ नतीजे घोषित किए गए। कांग्रेस की हार के बाद रविवार को मीडिया से बात करते हुए कमलनाथ ने कहा था कि हम मध्यप्रदेश के मतदाताओं के जनादेश को स्वीकार करते हैं। हम विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। साथ ही कमलनाथ ने भाजपा को बड़ी जीत के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि भाजपा राज्य की जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करेगी।

कांग्रेस को मिली हैं सिर्फ 66 सीटें
एमपी विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा ने 163 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस 66 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 114 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि भाजपा 109 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही थी। इसके बाद कमलनाथ ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। लेकिन पार्टी के भीतर बगावत के कारण 15 महीने में ही उनकी सरकार गिर गई थी।

नतीजों से पहले पांच राज्यों के एग्जिट पोल: मप्र-राजस्थान से भाजपा के लिए अच्छी खबर, छग में कांटे की टक्कर, तेलंगाना में केसीआर का किला ढहाएगी कांग्रेस

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नई दिल्ली/भोपाल। मध्यप्रदेश समेत पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर एग्जिट पोल आ चुके हैं। एजेंसियों के सर्वे हिन्दी भाषी राज्यों में जहां भाजपा को राहत देने वाले हैं। वहीं कांग्रेस की टेंशन भी बढ़ा दी है। दअरसल ज्यादातर एग्जिट पोल में भाजपा मप्र में एक बार फिर सरकार बनाती दिख रही है। तो वहीं राजस्थान में भी भगवा की लहर दिखाई दे रही है। जबकि छत्तीसगढ़ में कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। हालांकि तेलंगाना से कांग्रेस के लिए अच्छी खबर आई है। यहां पर केसीआर का किला ढहता दिख रहा है। यानि कुल मिलाकर देखा जाए तो यहां कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने जा रही है। इसके अलावा मिजोरम में किसी भी दल को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है।

मध्यप्रदेश की बात करें तो न्यूज 24-टुडेज चाणक्या एग्जिट पोल के मुताबिक मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार बनाते हुई दिख रही है। आंकड़े के मुताबिक प्रदेश में सत्तासीन बीजेपी बहुमत पार कर चुकी है। तो वहीं कांग्रेस भी बीजेपी का पीछा करते हुए 74 सीटों पर हैं। इसके अलावा टाइम्स नाउ-ईटीजी के मुताबिक, बीजेपी को 105-117, कांग्रेस को 109-125 और अन्य को 1-5 सीटें मिलने का अनुमान है। रिपब्लिक मैट्रिज के सर्वे के मुताबिक, बीजेपी को 118-130, कांग्रेस को 97-107 और अन्य को दो सीटें मिलने का अनुमान।

वहीं इंडिया टीवी-सीएनएक्स के मुताबिक, बीजेपी को 140-159 सीटें, कांग्रेस को 70-89 और अन्य को 14-18 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि टीवी 9 भारतवर्ष-पोलस्ट्रैट के एग्जिट पोल के मुताबिक, मध्यप्रदेश में कांटे की टक्कर होगी। बीजेपी को 106-116 और कांग्रेस को 111-121 सीटें मिल सकती हैं। इसी तरह एबीपी-सी वोटर के मुताबिक, बीजेपी को 88-112, कांग्रेस को 113-137 और अन्य को 2-8 सीटें मिल सकती हैं। रिपब्लिक-पी मार्क के मुताबिक, बीजेपी को 103-122, कांग्रेस को 103-122 और अन्य को 3-8 सीटें मिलने का अनुमान है।

अन्य राज्यों के एक्जिट पोल
राजस्थान:
8 एग्जिट पोल में से 5 में भाजपा की सरकार बन रही है। 1 पोल में कांग्रेस की सरकार बन रही है, जबकि दो में उसे सरकार बनाने के करीब बताया है। पोल आॅफ पोल्स में भाजपा को 102, कांग्रेस 86 और अन्य को 11 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।

छत्तीसगढ़: सभी 8 पोल कांग्रेस की दोबारा सत्ता में वापसी करवा रहे हैं। इनमें से पांच पोल में भाजपा सत्ता से 4 से 6 सीट दूर दिख रही है। पोल आॅफ पोल्स में भाजपा को 39, कांग्रेस को 48 और अन्य को 3 सीटें मिलने का अनुमान है।

तेलंगाना: 6 पोल्स हुए, इनमें 05 पोल कांग्रेस को पहली बार सत्ता में आने का अनुमान जता रहे हैं, जबकि एक में सत्ता के करीब बताया गया है। सत्ताधारी भारत राष्ट्र समिति (इफर) किसी भी पोल में सत्ता में आती नहीं दिख रही है। पोल आॅफ पोल्स में इफर को 44, कांग्रेस 64, भाजपा 07 और अन्य को 7 सीटें मिलने का अनुमान है।

मिजोरम: 5 एग्जिट पोल में से एक में जोरम पीपुल्स मूवमेंट को सरकार बनाते दिखाया गया है। बाकी 4 पोल में हंग असेंबली का अनुमान जताया गया है। पोल आफ पोल्स में सत्ताधारी मिजो नेशनल फ्रंट को 15,जेडपीएम को 16, कांग्रेस को 07 और भाजपा को 01 सीट मिलने का अनुमान है।

मप्र चुनाव: एग्जिट पोल में जादुई आंकड़े से बहुत आगे भाजपा, शिवराज बोले- मैंने पहले ही कहा था यह

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भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के परिणाम से पहले एग्जिट पोल्स के आंकड़े सामने आ गए है। चार एक्जिट पोलों में जहां भाजपा एक बार फिर मप्र में सरकार बनाने जा रही है। वहीं दो में कांग्रेस बढ़त बनाती दिख रही है। इसके अलावा कुछ में कांटे की टक्कर है। हालांकि ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो तीन दिसंबर को पता चलेगा। बता दें कि मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में 230 सीटों के लिए 17 नवंबर को मतदान हुआ था और मतगणना तीन दिसंबर को होगी। चुनाव में इस बार रिकार्ड 77.15 प्रतिशत मतदान हुआ है। विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 116 है। वहीं एग्जिट पोल्स के सामने आने के बाद इस पर बीजेपी-कांग्रेस दोनों ही दल के नेताओं की भी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है।

मध्यप्रदेश चुनाव को लेकर सामने आए एग्जिट पोल को लेकर भाजपा अति उत्साह से लबरेज हो गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि है कि मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाकर लाऊंगा। मैंने जो कहा था वह पूरा होगा, तीन तारीख को आप देखेंगे कि फिर से भाजपा की सरकार बनेगी। इसके कोई संदेह नहीं है, कोई कांटे फांटे की टक्कर नहीं है। उन्होंने हा कि कार्यकर्ताओं ने मेहनत की है, लाड़ली बहनों ने सब कांटे निकाल दिए। जनता का भरपूर प्यार और आशीर्वाद मिलेगा।

देश समेत प्रदेश में भी भाजपा लहर
गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी मीडिया को एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने एग्जिट पोल के आधार पर एवं जनता के आशीर्वाद से एक बार फिर सरकार बनाने का बड़ा दावा किया है। उन्होंने 165 सीटों के आने की बात कही है। वहीं, उन्होंने इस एग्जिट पोल के आधार पर कांग्रेस को एग्जिट बताया है। वहीं कैबिनेट मंत्री विश्वास ने कहा कि देश समेत प्रदेश में बीजेपी की लहर है। प्रदेश की जनता ने विकास को चुना है। बीजेपी ने प्रदेश की तस्वीर बदलने का काम किया है। सभी जाति वर्ग के कल्याण के कारण ही बीजेपी को सर्वाधिक वोट मिला है। दोगुनी गति से 03 दिसंबर के बाद प्रदेश का विकास होगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी की एक ही स्ट्रेटजी एक ही प्लानिंग, विकास और सिर्फ विकास। वहीं उन्होंने कहा कि 3 दिसंबर को एग्जिट पोल के आंकड़े एक्जेक्ट पोल पर बदलेंगे।

विष्णुदत्त शर्मा बोले- एग्जिट पोल बता रहे एमपी के मन में मोदी
एग्जिट पोल में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत दिखाए जाने पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, अधिकांश एग्जिट पोल के नतीजों में भाजपा को मिल रही बढ़त से यह स्पष्ट तौर पर दिखायी दे रहा है कि एमपी के मन में मोदी है। भारतीय जनता पार्टी विधानसभा चुनाव में प्रचंड विजय हासिल कर रही है। शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को मध्यप्रदेश चुनाव में मिल रही ऐतिहासिक जीत का श्रेय पार्टी के देवतुल्य कार्यकर्ताओं को जाता है। भाजपा की यह जीत डबल इंजन सरकार के द्वारा किए गए जनकल्याणकारी कार्यों को जनता की स्वीकार्ययोक्ति को दर्शाता है।

बच्चों की याद में भारत लौटी अंजू फिर सुर्खियों मेंं: गांव के लोग हुए चौकन्ना, बोले-कदम रखा तो मार देंगे जान से

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ग्वालियर। नसरुल्लाह की मुहब्बत में राजस्थान के अलवर जिले से पाकिस्तान पहुंची अंजू एक बार फिर चर्चाओं में आ गई है। दरअसल वह बुधवार को भारत लौट आई है। फिलहाल वह अटारी बार्डर में बीएसएफ की हिरासत में है। अंजू बच्चों के खातिर भारत लौटी है। जैसे ही अंजू उर्फ फातिमा के भारत लौटने की खबर गांव में फैली तो लोग चौकन्ना हो गए हैं। बता दें कि अंजू का परिवार मध्य प्रदेश के ग्वालियर में रहता है।वहीं जिले के टेकनपुर में स्थित बोना गांव में अंजू के पिता गयाप्रसाद थामस रहते हैं।

अंजू की घर वापसी को लेकर उसके पिता गया प्रसाद थॉमस मीडिया के सामने कुछ भी बोलने से इनकार कर रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने ने खुद को घर में बंद कर लिया। उनका कहना है कि मैंने पहले भी कहा था वह मेरे लिए मर चुकी है। वहीं ग्रामीणों ने बातचीत में कहा कि गांव में अंजू उर्फ फातिमा पर बैन है। वहीं बच्चों की याद 5 महीने बाद आना ग्रामीणों ने संदिग्ध माना है। उनका कहना है कि अंजू को पाकिस्तान में दुर्दशा होने के बाद भारत की याद आ गई है। गांव वालों का कहना है कि अंजू के पिता पहले ही मना कर चुके हैं कि वह मेरे लिए मर चुकी है। अगर वह यहां पर आई तो हम अंजू के पिता को भी गांव से बाहर कर देंगे। अगर इस गांव में अंजू ने गांव में कदम रखा तो उसे जान से मार देंगे। क्योंकि अंजू ने अपने परिवार का ही नहीं बल्कि भारत का नाम और इस गांव का नाम बदनाम किया है।

पिता ने घर के दरवाजे किए बंद
वहीं टेकनपुर में स्थित बेना गांव में अंजू के पिता गया प्रसाद ने अपनी घर के दरवाजे बंद कर लिए हैं। वह किसी से कुछ बात नहीं करना चाह रहे हैं, तो वहीं, अंजू के भारत आने की जानकारी जैसे ही गांव वालों को लगी तो वह भी अंजू के घर पहुंच रहे हैं। बता दें नसरुल्लाह की मुहब्बत में अंजू जुलाई के महीने में भारत से पाकिस्तान पहुंची थी। अंजू पहले से शादीशुदा थी, लेकिन फेसबुक से हए प्यार ने उसे सरहद पार पाकिस्तान जाने के लिए मजबूर कर दिया लेकिन अंजू को उसके बच्चों की मोहब्बत ने वापस अपने वतन लौटने पर विवश कर दिया। वे बच्चों के खातिर फिर से भारत लौटी है।

गांव आने की नहीं आवश्यकता
गांव के सरपंच का रवि गुर्जर कहना है कि सभी गांव वालों ने पहले ही अंजू के पिता और माता से मना कर दिया था कि गांव में आने की कोई आवश्यकता नहीं है। अगर वह आएगी तो हम उसे आने नहीं देंगे। उनका कहना है कि अभी वह घर के अंदर हैं जब वह निकलेंगे तो उनसे पूरा गांव बात करेगा कि अंजू को आप पूरी तरह नकार दीजिए। इसके साथ ही गांव के सरपंच रवि गुर्जर का कहना है कि संबंधित थाने में भी इसकी शिकायत करेंगे और एक आवेदन भी देंगे और इस परिवार की जांच करें। क्योंकि यहां बीएसएफ ट्रेनिंग का एक बड़ा केंद्र है और इसी के बीच में गांव आता है।

देश से बढ़कर कोई नहीं
इसके अलावा गांव के रहने वाले धर्मेंद्र गुर्जर का कहना है कि अंजू मेरे साथ पढ़ी है और मेरी क्लासमेट रही है। अंजू ने महिलाओं का बदनाम किया है। ऐसी महिला को यहां रहने का कोई हक नहीं है। हम सब अपने देश को प्यार करते हैं और देश से बढ़कर कोई नहीं है। अंजू ने पाकिस्तान में जाकर इस गांव का नाम बदनाम किया है इसलिए उसे यहां रहने का कोई हक नहीं है। अगर वह गांव में आती है तो उसको मारा जाएगा। वहीं, गांव में रहने वाले वीर सिंह का कहना है कि अंजू के पिता को घर के अंदर से निकलकर बाहर मीडिया के सामने आना चाहिए वह अंदर क्यों छुपा है इससे तो यह अंदाजा लगा सकते हैं कि वह चुप रहकर अंजू से बात कर रहा होगा। उनका कहना है कि हम तो यह मानते हैं कि अंजू के पिताजी संदिग्ध हैं, इसकी भी जांच की जानी चाहिए।

सूबे में बदला मौसम का मिजाज: मप्र के कई जिलों की सुबह रही कोहरे के आगोश में, हुई रुक-रुककर बारिश भी

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भोपाल। मध्यप्रदेश में बीते एक हफ्ते से मौसम ने करवट ले रखा है। एक ओर जहां सूबे के कई जिलों में रुक-रुकर हल्की बारिश का दौर जारी है। इसमें राजधानी भोपाल भी शामिल है। वहीं दूसरी ओर भोपाल से लेकर कुछ जिलों की सुबह लगातार कई दिनों से कोहरे के आगोश में रहती है। ऐसा ही शुक्रवार की सुबह भी देखने को मिला। भोपाल, मालवा-निमाड़, ग्वालियर-चंबल में शुक्रवार की सुबह घना कोहरा छाया रहा। जिसकी वजह से प्रदेश का तापमान भी तेजी से गिरता जा रहा है। भोपाल में दिन का तापमान 22 डिग्री तक पहुंच गया हैं। मौसम विभाग ने आज कई जिलों में गरज चमक के साथ तेज बारिश होने की संभावना जताई है।

गौरबलत है कि मध्यप्रदेश में अमूमन दिसंबर से कड़ाके की ठंड की शुरूआत हो जाती है। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। ठंड के साथ बारिश और गर्मी का ट्रेंड भी है। शुक्रवार सुबह भोपाल, ग्वालियर, नर्मदापुरम और खंडवा में बारिश हुई। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो अबकी बार वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ), चक्रवात और ट्रफ लाइन एक्टिव है, जिससे बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम बना हुआ है। मौसम विभाग ने प्रदेश के 42 जिलों में 1 दिसंबर तक बारिश की संभावना जताई है। राजधानी भोपाल, जबलपुर, नर्मदापुरम के संभाग के जिलों के साथ, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, बुरहानपुर, खंडवा जिले में गरज चमक के साथ बारिश होने के आसार है।

गरज चमक के साथ यहां होगी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार रीवा, सिंगरौली, सीधी, शहडोल, पन्ना, खरगोन, अनूपपुर, इंदौर, देवास, बड़वानी, अलीराजपुर, उज्जैन, धार, आगर मालवा, गुना ,अशोकनगर ,शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर और नीमच में कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना है। जिसके चलते प्रदेश में अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रीवा और न्यूनतम तापमान 10.2 डिग्री सेल्सियस रायसेन से दर्ज किया गया।

बारिश के साथ ओले
मौसम विभाग की मानें तो अगले दो दिनों तक प्रदेश में ऐसा ही मौसम बना रहेगा। भोपाल के साथ साथ कई शहरों में 1 दिसंबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस, साइक्लोनिक सिस्टम और राजस्थान के रास्ते टर्फ लाइन गुजरने के कारण मौसम का मिजाज बदल गया है।