पुणे। प्याज एक बार फिर आंसू निकाल सकता है। महाराष्ट्र के लासलगांव मंडी में थोक प्याज की कीमत पिछले कुछ दिनों में 50 पर्सेंट की वृद्धि हो गई है। व्यापारियों का दावा है कि राज्य में सूखे जैसे हालात के चलते इस साल प्याज की पैदावार कम रहेगी। लासलगांव एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी है। दिवाली के मौके पर थोक मार्केट बंद रहेगा, जिससे प्याज की खुदरा कीमत बढ़कर 40 से 45 रुपये तक जा सकती है।
Preparation to remove tears, onions, retail price may be 40 to 45 rupees
देशभर में प्याज की कीमतें लासलगांव एपीएमसी के हिसाब से तय होती हैं। पिछले शुक्रवार को प्याज की औसत थोक कीमत 12 रुपये प्रति किलो थी, जो सोमवार और मंगलवार को 50 पर्सेंट बढ़कर 18 रुपये प्रति किलो हो गई। फिलहाल बाजार में पहले का प्याज आ रहा है। इस पर किसानों को 40 पर्सेंट का स्टोरेज लॉस उठाना पड़ा है। अभी देश भर के ज्यादातर इलाकों में प्याज की खुदरा कीमतें 15 से 20 रुपये प्रति किलो के बीच चल रही हैं।
व्यापारियों का दावा है कि लंबे समय तक बारिश नहीं होने और गर्मी बढ़ने से प्याज की खरीफ पैदावार में काफी कमी आ सकती है। सिर्फ एक पखवाड़े पहले तक व्यापारी कीमतों में मामूली बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे थे क्योंकि महाराष्ट्र में खरीफ प्याज की फसल में तीन हफ्ते की देरी हो रही थी। हालांकि, राज्य में इसका पिछला स्टॉक काफी ज्यादा है।
प्याज का निर्यात करने वाले दानिश शाह ने बताया, नवरात्र पर भी इस बार बारिश नहीं हुई। कुछ जगहों पर प्याज के पौधे मुरझा गए हैं। इससे इसका साइज घट जाएगा और खरीफ पैदावार में कमी आएगी। ट्रेड इनसाइडर्स का मानना है कि थोक मार्केट में प्याज की कीमतें बढ़कर 25 रुपये प्रति किलो तक जा सकती हैं। इसका मतलब है कि खुदरा मार्केट में प्याज 40 से 45 रुपये प्रतिकिलो तक बिक सकता है।
महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और प्याज की अधिक खेती वाले दूसरे राज्यों और बाजारों में प्याज का भाव अभी 9 से 10 रुपये प्रति किलो के बीच है। हालांकि, राजस्थान के अलवर में ऐसा नहीं है। वहां के व्यापारी काफी करीब से लासलगांव एपीएमसी में कीमतों के उतार-चढ़ाव पर नजर रखते हैं। नासिक जिले की मंडी दिवाली के मौके पर 7 से 8 दिनों तक बंद रहेगी। इसे भी प्याज की कीमतों में हुई अचानक बढ़ोतरी की मुख्य वजह बताया जा रहा है। व्यापारियों ने दावा किया कि पाकिस्तानी प्याज की इंटरनैशनल मार्केट में एंट्री और घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी के चलते निर्यात में कमी आई है।

