दिल्ली हाईकोर्ट ने कारोबारियों को राहत, देर से रजिस्ट्रेशन पाने वाले भी आफलाईन भर सकते हैं रिर्टन

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नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने उन कारोबारियों राहत दी है, जिन्हें जीएसटी लागू होने के समय प्रोविजनल आईडी तो मिल गया था, लेकिन पैन मिसमैच जैसे किसी कारण से रजिस्ट्रेशन नहीं मिल सका था या महीनों बाद मिला था। ऐसे कारोबारी रजिस्ट्रेशन से पहले के रिटर्न 31 दिसंबर तक आॅफलाइन यानी मैन्युअल भी भर सकते हैं और पुराना इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल कर सकते हैं।
Delhi High Court can provide relief to traders, late registrations can also be filled offline
जस्टिस रवींद्र भट्ट और जस्टिस प्रतीक जालान की बेंच ने एक याची को मैन्युअल रिटर्न भरने की छूट दी है और इसके लिए जीएसटीएन सहित संबंधित एजेंसियों को निर्देश भी दिया है। याची की पहले एक पार्टनरशिप फर्म थी, जो डिजॉल्व हो गई और उसने प्रोपराइटरशिप के पैन से जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया और प्रोविजनल आईडी भी ले लिया, लेकिन सिस्टम में उसका पैन प्रोपराइटरशिप की जगह डिजॉल्व फर्म के नाम से आने के चलते मिसमैच में डाल दिया गया। कई कोशिशों के बाद भी जब रजिस्ट्रेशन नहीं मिला तो याची फर्म ने नए सिरे से जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया जो मई 2018 में मिला।

हालांकि उसके सामने 1 जुलाई 2017 से मई 2018 के बीच के कारोबार का इनपुट टैक्स क्रेडिट खोने का संकट आ खड़ा हुआ। हाई कोर्ट ने याची को अनरजिस्टर्ड अवधि के 10 महीनों की रिटर्न भरने की छूट देते हुए यह भी कहा कि अगर सिस्टम में इसे फाइल करना मुमकिन नहीं हो रहा तो वह मैनुअल रिटर्न भी भर सकता है। जीएसटी विभाग और नेटवर्क को इसका इंतजाम करना होगा।

दिल्ली सेल्स टैक्स बार एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट संजय शर्मा ने कहा कि जीएसटी काउंसिल की हालिया बैठक में ऐसे लोगों के लिए पुराना रिटर्न भरने की डेट 31 मार्च 2019 तक बढ़ाने की सिफारिश की गई है, लेकिन आॅफलाइन फाइलिंग और दस्तावेजों की हार्डकॉपी जमा करने की छूट देना अहम है। इससे सिस्टम के सपोर्ट नहीं करने की संभावना खत्म हो जाएगी। उन्होंने बताया कि हालांकि मौजूदा सिस्टम के तहत भी ऐसे लोगों को दो चरणों में 31 दिसंबर तक रिटर्न भरने की छूट दी गई थी, लेकिन सिस्टम में दिक्कतों और कई वजहों से वे फाइलिंग नहीं कर पा रहे थे।