मनमोहन बोले- पीएम को अपने बयानों से चीन के षड्यंत्रकारी रुख को नहीं देनी चाहिए ताकत

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  • एलएसी पर स्थिति तनावपूर्ण, दोनों सेनाएं पीछे हटने को तैयार नहीं
  • भारत-चीन के बीच मध्यस्थ की भूमिका में रूस, रक्षा मंत्री राजनाथ मॉस्को रवाना

TIO NEW DELHI

पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने बयानों से चीन के षड्यंत्रकारी रुख को ताकत नहीं देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को अपने शब्दों और घोषणाओं द्वारा देश की सुरक्षा एवं सामरिक हितों पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति सदैव बेहद सावधान होना चाहिए। उन्होंने सरकार से कहा कि भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीति तथा मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं हो सकता।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम प्रधानमंत्री और सरकार का आवाह्न करते हैं कि वे इस मौके पर साथ आएं और कर्नल संतोष बाबू और हमारे शहीद जवानों के लिए न्याय सुनिश्चित करें जिन्होंने हमारी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। इससे कुछ भी कम करना लोगों के विश्वास के साथ ऐतिहासिक विश्वासघात होगा।’ पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि यही समय है जब पूरे राष्ट्र को एकजुट और संगठित होकर इस दुस्साहस का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस सर्वोच्च त्याग के लिए हम इन साहसी सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञ हैं लेकिन उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए।

डॉक्टर सिंह ने कहा, ‘आज हम इतिहास के नाजुक मोड़ पर खड़े हैं। हमारी सरकार के फैसले और कदम इस बात को तय करेंगे कि भविष्य की पीढ़ियां हमारा आकलन कैसे करें। जो देश का नेतृत्व कर रहे हैं उनके कंधों पर कर्तव्य का गहन दायित्व है। हमारे प्रजातंत्र में यह दायित्व प्रधानमंत्री का है।’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘प्रधानमंत्री को अपने शब्दों और एलानों द्वारा देश की सुरक्षा एवं समारिक और भूभागीय हितों पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति सदैव बेहद सावधान होना चाहिए। चीन ने अप्रैल से लेकर अब तक लद्दाख की गलवां घाटी और पेंगोंग त्सो झील क्षेत्र में कई बार जबरन घुसपैठ की है। हम न तो उनकी धमकियों एवं दबाव के सामने झुकेंगे और न ही अपनी भूभागीय अखंडता से कोई समझौता स्वीकार करेंगे।’

उन्होंने कहा, ‘हम प्रधानमंत्री एवं केंद्र सरकार से आग्रह करते हैं कि वे वक्त की चुनौतियों का सामना करें और कर्नल बी. संतोष बाबू एवं हमारे सैनिकों की कुर्बानी की कसौटी पर खरा उतरें, जिन्होंने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ एवं ‘भूभागीय अखंडता’ के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मॉस्को में आयोजित विजय दिवस परेड में शिरकत के लिए आज से रूस की तीन दिनों की यात्रा पर रवाना हो गए हैं। यह परेड द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी पर सोवियत की जीत की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित होगी।

राजनाथ इस दौरान भारत-रूस रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर बातचीत करेंगे। वहीं, रक्षा मंत्री की यह दौरा भारत और चीन के बीच बढ़ते सीमा गतिरोध के मध्य में हो रहा है।

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव 23 जून को ‘रूस-भारत-चीन’ त्रिपक्षीय विदेश मंत्री वार्ता की मेजबानी करने वाले हैं। ऐसे में देखा जा सकता है कि मॉस्को भारत और चीन के बीच बढ़े तनाव के दौरान एक बड़े खिलाड़ी के तौर पर उभर रहा है और मध्यस्थता की कोशिश में लगा हुआ है।

पिछले कुछ सप्ताह से मॉस्को नई दिल्ली के साथ वार्ता करने में लगा हुआ है। चीन के साथ बीते कुछ वक्त में रूस के रिश्ते काफी सुधरे हैं क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद चीन उससे व्यापार करता रहा है। वहीं, नई दिल्ली का मॉस्को के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का इतिहास रहा है। 2017 में दोकलम विवाद के दौरान, बीजिंग में रूसी राजनयिकों को चीन सरकार द्वारा इस मुद्दे पर जानकारी दी गई थी।

भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। भारत और चीन दोनों पक्षों की सेनाएं यहां तैनात हैं, एयरबेस को सक्रिय किया जा चुका है। इसके अलावा नौसेना को अलर्ट पर रखा गया है। बता दें कि दोनों सेनाओं के बीच 15-16 जून की दरमियानी रात को गलवां घाटी में हिंसक झड़प हुई थी।

गलवां की घटना के बाद से स्थिति बेशक और ज्यादा खराब नहीं हुई है लेकिन चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने लगातार अपने सैनिकों की संख्या में वृद्धि करके उन्हें स्टैंडबाय पर रखा हुआ है। इस बात की जानकारी भारतीय अधिकारियों ने दी। अधिकारियों ने कहा कि शिनजियांग और तिब्बत क्षेत्रों में पीएलए के निर्माण के जवाब में भारतीय सेना की स्थिति में भी बदलाव किया जा रहा है।

दोनों देश वायुसेना के जरिए एक-दूसरे पर सर्विलांस की मदद से नजर रख रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि भारतीय सैन्य कमांडरों ने बल का उपयोग करने के निर्देश जारी किए हैं यदि पीएलए के सैनिक भारतीय गश्ती पोस्ट 14 पर हमला करने के लिए गलवां नुल्लाह को पार करते हैं। पीएलए ने नुल्लाह पर अपने सैनिकों को तैनात कर रखा है।