– इंटरव्यू के बाद भी रिजल्ट की घोषणा नहीं, जिम्मेदार कौन ? – एसीएस वर्णवाल को जांच की जिम्मेदारी, तीन साल से अटका है परिणाम – आईएएस नीरज सिंह, डीन डॉ. धाकड़ और पूर्व डीन डॉ. निगम की भूमिका कटघरे में ग्वालियर (ईएमएस)। गजराराजा मेडिकल कॉलेज में इंटरव्यू होने के बाद भी प्रोफेसर (बाल एवं शिशु रोग विभाग) पदों का रिजल्ट घोषित न करने के मामले में हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। डॉ.आरडी दत्त की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने वर्तमान डीन डा. आरकेएस धाकड़, पूर्व डीन डा. अक्षय निगम और गवर्निंग बाडी के अध्यक्ष नीरज सिंह के खिलाफ प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला बनना माना है, और अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को जांच के निर्देश दिए हैं। उन्हें ये बताना है कि आईएएस नीरज सिंह (समिति अध्यक्ष) डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ और तत्कालीन डीन डॉ. अक्षय निगम में से देरी के लिए जिम्मेदार कौन है? आठ सप्ताह में रिपोर्ट पेश करनी होगी। अगली सुनवाई पर तीनों को हाई कोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का भी आदेश दिया है। दरअसल जीआरएमसी के पीडियाट्रिक्स विभाग में प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए इंटरव्यू हुए। इस प्रक्रिया में पहले से ही महाविद्यालय में कार्यरत डॉ. आरडी दत्त ने भाग लिया। काफी समय बाद भी जब महाविद्यालय ने परिणाम घोषित नहीं किया तो डॉ. दत्त ने याचिका दायर की। 1 अगस्त 2024 को हाई कोर्ट ने कॉलेज में पदस्थ एक अन्य डॉक्टर के केस में जो आदेश दिया, उसी आदेश के तहत याची के प्रकरण का निराकरण करने के लिए कहा। जब आदेश का पालन नहीं हुआ तो अवमानना याचिका दायर की गई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भर्ती प्रक्रिया का परिणाम जारी नहीं किया गया, जो गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और न्यायालय की अवमानना को दर्शाता है। कोर्ट ने माना कि संबंधित अधिकारियों का रवैया जानबूझकर निष्क्रियताÓ और प्रशासनिक उदासीनताÓ को दर्शाता है। यह है पूरा मामला जीआरएमसी में विभिन्न विभागों में प्रोफेसर पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसी क्रम में पीडियाट्रिक्स विभाग में प्रेफेसर पद के लिए 20 मई 2023 को इंटरव्यू आयोजित किए गए थे। इसमें सभी पात्र उम्मीदवारों ने भाग लिया और विषय विशेषज्ञ भी इंटरब्यू बोर्ड में मौजूद थे। इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया का परिणाम घोषित नहीं किया गया। दूसरी ओर अन्य विभागों के परिणाम जारी कर दिए गए, लेकिन पीडियाट्रिक्स विभाग का परिणाम लंबित रखा गया। इसको लेकर डा.आरडी दत्त ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने आठ जनवरी 2024 को आदेश देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जिन विभागों में इंटरव्यू हो चुके हैं, वहां परिणाम घोषित किए जाएं। इसके बाद भी आदेश का पालन नहीं हुआ। कोर्ट में दलील दी : सुनवाई के दौरान शासन की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल, चिकित्सा शिक्षा संचालक डा. अरुणा कुमार, वर्तमान डीन डा. आरकेएस धाकड़ और पूर्व डीन डा. अक्षय निगम उपस्थित हुए। प्रशासन की ओर से कहा गया कि पीडियाट्रिक्स विभाग में विषय विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। वहीं यह भी दलील दी गई कि कुछ दस्तावेज और नोटशीट उपलब्ध नहीं थे, इसलिए परिणाम जारी नहीं हो पाया। लेकिन कोर्ट ने रिकार्ड का परीक्षण करने के बाद इन तर्कों को असंगत माना। अदालत ने कहा कि जब इंटरव्यू 20 मई 2023 को हो चुके थे और विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे, तब परिणाम रोकने का कोई वैध कारण नहीं था । डा. धाकड़ ने सिर्फ पत्राचार किया कोर्ट ने विशेष रूप से वर्तमान डीन डा. आरकेएस धाकड़ की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पद संभालने के बाद उन्होंने केवल पत्राचार किया, लेकिन आदेश के पालन के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए। अदालत ने यह भी कहाकि पुराने अधिकारियों पर जिम्मेदारी डालना या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना न्यायालय के आदेश की अवहेलना का बचाव नहीं हो सकता । कैंटीन घोटाले में लोकायुक्त जांच, डीन घिरे वही दूसरी और जेएएच के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कैंटीन मामले में जीआरएमसी के डीन डा. आरकेएस धाकड़ पहले से आरोपों के घेरे में थे लेकिन अब लोकायुक्त भोपाल ने जांच प्रकरण पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, संभागीय आयुक्त ने कलेक्टर को डीन डा. आरकेएस धाकड़ के संबंध में मिली शिकायत की जांच करने पत्र लिखा है। यह वही कैंटीन है जो छठवीं मंजिल पर स्थापित की गई और इसके टैंडर से लेकर फर्नीचर तक में शिकायतों का देर लगा हुआ है। वहीं संभाग के आयुक्त मनोज खत्री ने कलेक्टर रुचिका चौहान को शिकायत की जांच कर कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में डीन डा. आरकेएस धाकड़ के पास फिलहाल कोई जवाब नहीं है, उनके अनुसार मामला जानकारी में ही नहीं है। उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता और मीसाबंदी केपी सिंह ने इस मामले में जीआरएमसी डीन डा. धाकड़ पर आर्थिक भ्रष्टाचार और शासकीय धन की लूट का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी सिंह के आवेदन पर लोकायुक्त भोपाल ने मामले को जांच में ले लिया है। इधर संभाग आयुक्त ने 21 अप्रैल को कलेक्टर को एक पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि शिकायत में उल्लेख बिंदुओं की जांच कर कार्रवाई से अवगत कराया जाए। बंदरबांट का आरोप : शिकायत में वित्तीय अनियमितता को लेकर कहा गया कि 48 रुपए के विरुद्ध 175.90 की अत्यधिक दर पर आफलाइन टेंडर के जरिए आवंटित कर दिया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह टेंडर जेम पोर्टल पर आनलाइन किया जाना चाहिए था, लेकिन जानबूझकर नियमों का उल्लंघन कर प्रक्रिया को आफलाइन रखा गया। इतने खुलेआम इन नियमों का ध्यान नहीं रखा गया इसके बाद भी चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कोई संज्ञान ही नहीं लिया गया। बॉक्स शिकायतकर्ता ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान हुई प्रक्रिया में कमियों को विस्तार से बताया। विज्ञापनों का अभाव: निविदा के लिए उचित विज्ञापन जारी नहीं किए गए। तारीखों का हेरफेर: निविदा फार्म जमा करने की अंतिम तिथि एक जनवरी 2025 थी और खोलने का समय दो जनवरी दोपहर 12:30 बजे तय था, लेकिन उस समय निविदा पेटी नहीं खोली गई। समिति का गठन: टैंडर प्रक्रिया शुरू होने के बाद तीन जनवरी को क्रय समिति बनाई गई और चार जनवरी को बैठक हुई। रिकार्ड के अनुसार केवल आठ फार्म बिके थे, लेकिन जब निविदा पेटी खोली गई तो उसमें 11 फार्म निकले। • 11 में से नौ फार्मों को तकनीकी आधार पर रिजेक्ट कर दिया गया और केवल दो फार्म मान्य किए गए ताकि पसंदीदा फर्म को ठेका दिया जा सके। डीन डा. धाकड़ कीं भूमिका संदेह में लोकायुक्त की जांच शुरू होने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच हुआ है। शासकीय प्रक्रिया का पालन नही कराना और आफलाइन टेंडर के जरिए आर्थिक लाभ पहुंचाने के आरोपों ने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। वहीं जीआरएमसी अधिष्ठाता की भूमिका पर लोकायुक्त ने आयुक्त चिकित्सा, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा के माध्यम से डा. धाकड़ को पांच मार्च तक अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था पर जवाब देने पर अंतिम जवाब देने के लिए आठ जून का समय निर्धारित किया है।