मां शब्द ही अपने आप में संपूर्ण ग्रंथ है।

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शशी कुमार केसवानी

माँ के प्यार में एक अद्वितीय शक्ति होती है, जो हमें सबसे बड़ी मुश्किलों का सामना करने की ताकत देती है। हर इंसान की जिंदगी में सबसे खास शख्स यदि कोई होती है, तो उसकी मां होती है। मां की कमी को किसी भी सूरत में पूरा नहीं किया जा सकता है। दुनिया में सिर्फ मां ही होती है, जिससे हम अधिकारपूर्वक किसी चीज की मांग कर सकते है, लेकिन कई बार हम मां के प्रति अपनी भावनाएं या कर्त्तव्य व्यक्त नहीं कर पाते हैं। ऐसे में इसके लिए सबसे अच्छा दिन मदर्स डे ही होता है। हालांकि मां के ऊपर बहुत लिखा और बोला गया है। पर फिर भी पीछे बहुत कुछ छूट जाता है। पर फिर भी हमनें कुछ अपनों से बात की मां के ऊपर उसी के अंश प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं। असल में मां के लिए तो वह शब्द ही नहीं बने हैं कि जिससे उसके बारे में कहा जाय या फिर लिखा जाए। बस मां शब्द ही अपने आप में संपूर्ण ग्रंथ है।

प्यार के साथ डांट डपट भी मिलती है


मैं अपनी मां को एक एक्टर के रूप में नहीं देख सकता। वह मेरी मां हैं। एक एक्टर और परफार्मर के तौर पर देखने की क्षमता रखता हूं, मगर मेरी मां के साथ बहुत इमोशनल रिश्ते हैं। मैं उन्हें हमेशा मां के रूप में ही देखता हूं। उन्हें जज करना या आंकना मेरे लिए बहुत कठिन बात है। घर में मेरे लिए मां ऐसी रहती है जैसे एक छोटे बच्चे के लिए मां होती है। हमेशा लाड़ प्यार के साथ डॉट डपट का दौर भी हमेशा जारी रहता है जिसमें उनका प्यार झलकता है।
जया का बेटा अभिषेक बच्चन,
फिल्म अभिनेता, मुंबई

भोपाल की माटी की तीन बेटिया


व्यंग्य की दुनिया में शरद जोशी का जितना बड़ा नाम था उससे बड़ा हृदय उनकी पत्नी इरफाना शरद का था। शरद जोशी जी को शरद जोशी बनाने में इरफाना जी का बड़ा योगदान था। जिनकी तीन बेटियां है नेहा शरद, वाणी शरद और ऋचा शरद। तीनों अपने काम में माहिर है हमारे विशेष आग्रह पर तीनों अपनी मां के लिए बात करने के लिए राजी हुई। उन्होंने बताया हम तीन बहनों की मां इरफाना शरद (पत्नी शरद जोशी) एक अत्यंत प्रतिभाशाली, सुसंस्कृत और प्रगतिशील महिला थीं, जो गुणों की खान थीं और पापा के बहुत सारे अच्छे मित्र थे, और वे बड़े प्रेम व खुशी से सबकी आवभगत करती थीं तथा सभी के लिए अत्यंत स्वादिष्ट भोजन बनाकर खिलाती थीं। वे बहुत हंसमुख और मेहनती थीं। सदैव सीखना और सिखाना उनके मूल स्वभाव में शामिल था। वे हमें भी हर नई चीज सीखने के लिए बहुत प्रेरित करती थीं। 9-10 वर्ष की उम्र से ही उन्होंने हमें अपना हाथ-खर्च स्वयं कमाने की आदत डाल दी, ताकि कभी किसी पर निर्भर न रहना पड़े। इमरजेंसी के कठिन समय को उन्होंने बड़े आत्मसम्मान और दृढ़ता के साथ पार किया, जिससे हमें भी बहुत शक्ति मिली। उन्हीं की सीख के कारण हमने जीवन की कठिन परिस्थितियों में घबराना नहीं सीखा, बल्कि दृढ़ता और सम्मान के साथ उनका सामना करना सीखा। केवल हमने ही नहीं, बल्कि बहुत सारे लोगों ने उनसे बहुत कुछ सीखा और जाना। कई साहित्यकारों और लेखकों के लिए वे प्रेरणा स्रोत रहीं हैं। जिनकी गिनती करना बहुत ही मुश्किल है। अगर भोपाल के दिनों को याद करूं, तो सुंदर सी हमारी मां, हर और दिखती है. शहर के हर कोने में उनकी छवि है. जो हमारे दिलों दिमाग में हमेशा के लिए बसी रहेगी. हमारी मां सब कुछ कितनी सहजता से कर लेती थी. हमारे घर में रोज मित्रों का जमावड़ा रहता था . लेखकों , कलाकारों, मित्रों और सभी का बहुत आत्मीय संबंध इरफाना जी पत्नी शरद जोशी जी के साथ रहा.
ऐसी मां को हजारों सलाम।



मेरी मां माला तिवारी से मैं बहुत अलग तरह-तरह के इमोशन रखता हूं। न जाने क्यों हमारे साथ ऐसा हुआ कि बिग सी यानि कैंसर चुपके से हमारी लाइफ में घुस आया। हम सब अस्तव्यस्त हो गए पर हमने अपने आप को समेटा। मां ने कैंसर से जंग से जीती पर मैं उस समय बहुत टूट गया था पर मां ने ही हौंसला बढ़ाया। मां ने कहा था.. जाको राखे साइयां मार सके न कोय। मां पर बात करते हुए कार्तिक की आंखे साथ नहीं देती छलक ही पड़ती है। जो हमने भी अपनी बात सीमित रखी और उनकी मां के स्वस्थ्य होने की दुआएं की।
माला का बेटा कार्तिक आर्यन,
फिल्म अभिनेता, मुंबई
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मेरी मां की मां का शुक्रिया


जिन्होंने मेरी मां अमृता सिंह को बनाया। अब मां के लिए तो मेरे पास शब्द ही नहीं होते की कुछ कह सकूं। बस दिल से शुक्रिया ही कह सकती हूं। पर मैं खूब लड़ती भी हूं और प्यार भी उसी हिसाब से करती हूं कि मैं जो भी हूं आज मां की वजह से हूं। मुझे बनाने में मेरी मां का अहम योगदान है। उन्होंने हर चीज मेरी मेरे स्वभाव से मेल खाती हुई बनाई है। इससे ज्यादा मैं मां के लिए कुछ बोल नहीं सकती।
अमृता सिंह की बेटी साराअली खान,
फिल्म अभिनेत्री, मुंबई

मां ममता का सबसे सुंदर रूप है


माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग और ममता का सबसे सुंदर रूप है। जिस घर में माँ की मुस्कान होती है, वहाँ हर मुश्किल आसान लगती है। माँ की दुआएँ जीवन की सबसे बड़ी ताकत होती हैं, जो हर कठिन राह को सरल बना देती हैं। मदर्स डे केवल एक दिन नहीं, बल्कि माँ के अनंत प्रेम और समर्पण को सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन मां से उस तरह का लाड़ प्यार किया जा सकता है जो भागम भाग भरी जिंदगी में समय के अभाव में कहीं खो जाता है।
मेहरूना परवेश की बेटी कढर शिमाला प्रसाद, ऊकॠ महिला सुरक्षा भोपाल



राजनीतिक का पाठ ही नहीं, सामाजिक जीवन जीने की कला के साथ देशहित में भी कार्य करने का जज्बा उन्हीं से मिला। आज मां नहीं हैं, पर उनके बताए उसूलों पर चलने में जो सुकून मिलता है। वह केवल मैं ही महसूस कर सकता हूं। जिंदगी के हर कठिन दौर मेें जब मैं कुछ भी विचार करता हूं तो मां की बताई हुई चीजें याद आती है और एक नया रास्ता निकल आता है। इसलिए आज भी अपनी मां को याद करता हूं फिर दूसरा काम शुरू करता हूं।
शीला दीक्षित का बेटा संदीप दीक्षित, सीनियर नेता, कांग्रेस, दिल्ली



तापसी पन्नू अपनी बहन शगुन के साथ मुंबई में अधिकतर समय रहती हैं, पर मां की सीख हमेशा ध्यान में रखती है। शगुन भी अपनी बहन को ऐसे रखती है जैसे बच्ची को पाला जाता है। इसे प्यार का रिश्ता ही माना जाता है। तापसी सिनेमा में अपनी कामयाबी का श्रेय अपनी मां को देती हैं।
निर्मल जीत कौन पन्नू की बेटी तापसी पन्नू और शगुन, फिल्म अभिनेत्री, मुंबई
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मां सिर्फ त्याग नहीं, एक सपना भी


हर बार जब हम माँ के बारे में लिखते हैं, तो अक्सर उनके त्याग, उनकी कुबार्नी और उनकी मेहनत की बात करते हैं। लेकिन मेरी माँ की कहानी सिर्फ इतनी-सी नहीं है। उनकी कहानी एक ऐसे सपने की है, जो उन्होंने सिर्फ देखा ही नहीं, बल्कि मुझे देकर जीना भी सिखाया। मेरी माँ ने कभी अपने सपनों को बोझ नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें मेरे सपनों का रास्ता बना दिया। उन्होंने मुझे सिर्फ चलना नहीं सिखाया, बल्कि अपनी राह खुद बनाना सिखाया।
श्रीमती पार्वती भसीन की बेटी डॉ. रोमिका बिल्लोरे
फ्रीलेंस पेपर पल्प, भोपाल
Dr. Romika Billore Freelance paper pulp artist Bhopal
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