नाराज दत्तीगांव ने कांग्रेस पर बोला हमला, कहा- पार्टी में वंशवाद और जातिवाद हावी

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इंदौर/बदनावर। क्या वंशवाद, पूंजीवाद, जातिवाद ही हमारे देश में हावी रहेगा। कांग्रेस में आज भी वंशवाद व गुटीय राजनीति हावी है। मेरे पिताजी या मेरे परिवार में पहले कोई मंत्री या उपमुख्यमंत्री नहीं रहा, इसलिए मेरी उपेक्षा की गई है। ऐसे ही लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल कि या गया है, जिनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि सत्ता में रहने की रही है। क्या मेरा यह कसूर रहा कि मतगणना के बाद निर्वाचन का प्रमाण पत्र लेते ही में इस अल्पमत की सरकार के लिए दो निर्दलीय विधायकों को लेकर आया। ये बिंदू हो सकते हैं, जिनके कारण मुझे अयोग्य समझा गया।
Angry Dattigaon talked about Congress Attack, said dynasty and racism dominate in the party
उन्होंने कहा कि जनतंत्र में सत्ता या पद महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है जनादेश, जनाकांक्षा। मैं उनकी चोखट पर जनमत रखूंगा और पूछूंगा कि इस अल्पमत की सरकार में मेरा इतना तो योगदान था कि मेरे मतदाताओं का सम्मान होता। उन्होंने कहा कि मंत्री बनने का आश्वासन अब मेरे और सिंधिया के बीच का मामला है। मैं इस बारे में उनसे बात करूंगा। किसी को इस्तीफा देने जरूरत नहीं है, यदि देना होगा तो सबसे पहले मैं दूंगा। अपने कार्यकतार्ओं को शहीद नहीं होने दूंगा और न ही उन पर कोई आंच आने दूंगा।

उन्?होंने कहा कि मंत्रिमंडल में शामिल नहीं कि या जाना मतदाताओं का अपमान है। यहां विजय जुलूस तभी निकलेगा, जब सभी कार्यकतार्ओं की भावनाए या इच्छाएं पूरी होगी। मालूम हो कि मंत्रिमंडल गठन के पहले दत्तीगांव का नाम मंत्रीपद की दौड़ में सबसे आगे था। लेकिन गुटीय, जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के नाम पर एन वक्त पर उनका नाम हटा दिया गया। इससे क्षेत्र के कार्यकतार्ओं के साथ-साथ दत्तीगांव भी खासे नाराज हैं।

आक्रोशित कार्यकतार्ओं ने जब इस्तीफा देने की बात कही तो उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो आपके पहले मैं इस्तीफा दूंगा और लोकसभा चुनाव के साथ फिर उपचुनाव लड़ूंगा। नाराज दत्तीगांव ने कहा कि हाईकमान को अपना वादा पूरा करना चाहिए या फिर वादा नहीं करना चाहिए। इससे मेरे लिए क्षेत्र में विचित्र स्थिति बन गई है। मेरी जवाबदेही अपने मतदाताओं के प्रति पहले है, उन्हें मैं क्या जवाब दूं।

सिंधिया ने अपना वादा नहीं निभाया
सम्मेलन में मौजूद कार्यकर्ता बार-बार इस बात का जिक्र कर रहे थे कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बिड़वाल की सभा में साफ कहा था कि दत्तीगांव की जरूरत प्रदेश को ज्यादा है। जीतने पर मंत्री बनाया जाना तय है फिर क्यों शामिल नहीं किया गया।