कर्नाटक में स्पीकर केआर रमेश को हटाने के लिए बीजेपी उठा सकती है ये कदम

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बंगलूरू

  • कर्नाटक में येदियुरप्पा सरकार को बाहर से समर्थन देगी जेडीएस!, मंथन जारी

भारतीय जनता पार्टी (BJP) कर्नाटक में विधानसभा स्पीकर के. आर. रमेश (KR Ramesh) को हटाने के लिए कदम उठा सकती है। कर्नाटक के तीन बागी विधायकों को गुरुवार को अयोग्य घोषित करने और कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार को गिराने में मदद करनेवाले 14 अन्य विधायकों में खौफ पैदा करने वाले स्पीकर के खिलाफ बीजेपी विधानसभा में प्रस्तावना (Motion) ला सकती है। पूरे मामले से भलीभांति वाकिफ सूत्र ने इस बात की जानकारी दी।

वहीं खबर है कि जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) विधायकों ने एचडी कुमारस्वानी से बाहर से भाजपा को समर्थन देने की बात की है। इस मामले पर शुक्रवार रात बैठक भी हुई। हालांकि आखिरी फैसला कुमारस्वामी ही लेंगे। इस बैठक के बाद जेडीएस नेता और पूर्व मंत्री जीटी देवेगौड़ा ने कहा, “हम सभी ने पार्टी के साथ बने रहने का फैसला लिया है। कुछ जेडीएस विधायकों ने कुमारस्वामी को बाहर से भाजपा को समर्थन देने का सुझाव दिया है और कई अन्य विधायकों ने विपक्ष में बने रहकर पार्टी को मजबूत बनाने का सुझाव दिया है।”

कांग्रेस पार्टी से ताल्लुक रखने वाले स्पीकर को हटाने के लिए जल्द प्रस्तावना का नोटिस दिया जा सकता है, ताकि अन्य बागी विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के किसी भी कदम को रोका जा सके। ऐसा माना जा रहा है कि इन विधायकों में से कुछ को येदियुरप्पा सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है।

सूत्र ने बताया- “बागी विधायक इसलिए गुस्से में थे क्योंकि बीजेपी ने सरकार बनाने के फैसले करने में काफी समय लगाया और दूसरा गुरुवार को तीन बागी विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने का स्पीकर का फैसला।” उन्होंने आगे बताया-“स्पीकर को हटाने के लिए नोटिस का समय हम तय करेंगे। यह मौके के संभावना को देखते हुए जल्द किया जा सकता है।”

स्पीकर ने गुरुवार को यह कहा था कि उनके पास लंबित पड़े 14 अन्य विधायकों के इस्तीफे और अयोग्यता पर वे अगले कुछ दिनों में फैसला करेंगे।

संविधान के आर्टिकल 179 (सी) यह अधिकार देता है कि किसी भी विधानसभा स्पीकर को सदन में प्रस्तावना लाकर उसे बहुमत से पास करवा कर पद से हटाया जा सकता है। इसके लिए, किसी भी मौजूदा स्पीकर को हटाने के लिए 14 दिन दिन पहले प्रस्तावना को नाटिस देने की आवश्यकता होती है। जैसे ही प्रस्तावना लाया जाता है, उसके बाद स्पीकर किसी को अयोग्य नहीं ठहरा सकता है।

अरुणाचल प्रदेश में 14 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साल 2016 में यह कहा था- “किसी भी स्पीकर के लिए संवैधानिक तौर पर यह संभव नहीं है कि जब उनके खिलाफ अयोग्यता के प्रस्तावना का नोटिस दिया गया हो तो फिर वे किसी और को अयोग्य ठहराए।”