छत्तीसगढ़: जोड़-तोड़ से डरी पार्टियां, राजनीतिक दलों को सता रही खरीद फरोख्त की चिंता

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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव को लेकर आए एक्जिट पोल के बाद अब राजनीतिक दलों को विधायकों के खरीद-फरोख्त की चिंता सता रही है। ‘हार्स ट्रेडिंग” की चिंता में सहमे दलों ने प्रत्याशियों को निर्देश दिया है कि जीत का प्रमाण पत्र लेकर सीधे पार्टी द्वारा निर्धारित किए गए स्थल पर पहुंचे।
Chhattisgarh: Junk parties are afraid of buying and selling parties, harboring political parties
एक्जिट पोल में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर दिखाई जा रही है। वहीं, जकांछ-बसपा गठजोड़ को तीन से पांच सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है। ऐसा होने पर नौबत त्रिशंकु विधानसभा की बनेगी। जादूई आंकड़ा पाने के लिए दलों को जोड़-तोड़ भी करना पड़ सकता है। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा ने अपने विधायकों को बचाने का प्लान तैयार कर लिया है। भाजपा ने सभी उम्मीदवारों को निर्देश दिया है कि वे जीत का प्रमाण पत्र लेकर सीधे भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर पहुंचे। वहीं, कांग्रेस ने भी सभी विधायकों को रायपुर आने का फरमान दिया है।

भाजपा के आला नेताओं की मानें तो पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता है, तो ठीक। नहीं तो विधायकों को भाजपा शासित राज्यों में भेजने के लिए पहले से ही संगठन के आला नेता तैयारी कर रहे हैं। संभावना है कि भाजपा विधायकों को गोवा या महाराष्ट्र भेजा जा सकता है। दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है और यह छत्तीसगढ़ से ज्यादा दूरी पर भी नहीं है। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो बहुमत से कम सीट आने पर भाजपा के केंद्रीय नेताओं की टीम भी सक्रिय होगी। केंद्रीय संगठन ने प्रदेश प्रभारी डॉ अनिल जैन और अन्य नेताओं की टीम बनाई है। वहीं, कांग्रेस ने भी प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया के नेतृत्व में केंद्रीय टीम तैयार की है।

निर्दलीय अगर जीते तो रहेंगे महत्वपूर्ण भूमिका में
चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बहुमत तक नहीं पहुंचने की स्थिति में निर्दलीय विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। एक्जिट पोल में दो से तीन निर्दलीय विधायकों की जीत का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में इन निर्दलीय को अपने पाले में करने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने करीबी नेताओं को जिम्मा सौंप दिया है। जीतने की संभावना वाले निर्दलीय उम्मीदवारों से अभी से आला नेताओं ने संपर्क करना शुरू भी कर दिया है।