कर्नाटक मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू, सीजेआई ने पूछा- विधायकों ने कब दिया इस्तीफा

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बंगलूरू

खास बातें

  • कर्नाटक संकट: विधायकों के इस्तीफों पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई।
  • बी एस येदियुरप्पा का दावा, भाजपा 4-5 दिन में कर्नाटक में सरकार बनाएगी।
  • कर्नाटक-जेडीएस सरकार का 18 जुलाई को होगा शक्ति परीक्षण, अनुपस्थित रह सकते हैं बागी विधायक।
  • आईएमए पोंजी घोटाला : कांग्रेस से निलंबित और बागी विधायक रोशन बेग को एसआईटी ने हिरासत में लिया।
कर्नाटक के बागी विधायकों की याचिका पर उच्चतम न्यायाल में सुनवाई हो रही है। विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) पर सरकार के इशारे पर अपने इस्तीफे स्वीकार न करने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि विधायकों ने कब इस्तीफा दिया था। जिसका जवाब देते हुए विधायकों के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि सभी ने छह जुलाई को इस्तीफा दिया था।

रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि विधायकों को बांधे रखने की कोशिश क्यों हो रही है। स्पीकर यदि चाहते हैं तो फैसला ले सकते हैं। इस्तीफे को अयोग्यता से जोड़ना गलत है और दोनों अलग-अलग मामले हैं। रोहतगी ने उदाहरण देते हुए कहा कि उमेश जाधव ने इस्तीफा दिया और उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया। विधायकों के हवाले से रोहतगी ने अदालत में कहा, ‘हम विधायक बने रहना नहीं चाहते हैं। कोई भी हमें मजबूर नहीं कर सकता। मेरा इस्तीफा स्वीकार किया जाना चाहिए।’

रोहतगी ने कहा, ‘यह उनके इस्तीफे स्वीकार करने में टाल-मटोल का रवैया अपनाने की कोशिश है। स्पीकर इस्तीफे और अयोग्यता दोनों मुद्दों पर एक ही समय पर फैसला लेने की कोशिश कर रहे हैं।’ कांग्रेस और जेडीएस के नेता 15 विधायकों को खुले तौर पर धमकी दे रहे हैं कि सरकार के पक्ष में वोट करो या फिर अयोग्यता का सामना करो। इसपर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने रोहतगी से कहा, ‘यह बताएं कि विधायकों को किन परिस्थितियों और कारणों से दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराया जा सकता है।’

रोहतगी ने कहा, ‘एक बार इस्तीफा देने के बाद उसका निर्णय योग्यता के आधार पर लिया जाना चाहिए। स्पीकर को इस्तीफा स्वीकर कर लेना चाहिए क्योंकि इससे निपटने का कोई और तरीका नहीं है। सरकार को सदन में बहुमत साबित करना है और बागी विधायकों को इस्तीफे के बावजूद व्हिप का पालन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बागी विधायकों के इस्तीफे में भाजपा नेताओं का कोई हाथ नहीं है। विधायकों ने खुद स्पेशल फ्लाइट ली थी और भाजपा का इससे कोई लेना-देना नहीं है। बागी विधायक अयोग्य घोषित होने के बाद भी नई सरकार में मंत्री बन सकते हैं बशर्ते कि वे दोबारा चुने जाएं।’

रोहतगी ने उच्चतम न्यायालय में कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को देखना होगा कि इस्तीफा स्वेच्छा से दिया गया है या नहीं। अयोग्य घोषित करना संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत संक्षिप्त-सुनवाई है, जबकि इस्तीफ अलग है, उसे स्वीकार किया जाना सिर्फ एक मानक पर आधारित है कि वह स्वैच्छिक है या नहीं। मुख्य न्यायाधीश ने रोहतगी से पूछा, ‘क्या विधायक को इस्तीफा देने के बाद अयोग्य ठहराया जा सकता है? क्या इस पहलू को नियंत्रित करने वाले कोई नियम हैं?’

बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई शुरू
उच्चतम न्यायालय में बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई शुरू हो गई है। बागी विधायकों का पक्ष रखते हुए मुकुल रोहतगी ने कहा, सभी 10 याचिकाकर्ताओं ने 10 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था। स्पीकर यदि चाहते हैं तो फैसला ले सकते हैं। चूंकि इस्तीफा स्वीकार करने और अयोग्यता दोनों अलग-अलग निर्णय हैं। उन्होंने अदालत में पूछा कि विधायकों को बांधे रखने की कोशिश क्यों हो रही है। रोहतगी ने कहा कि उमेश जाधव ने इस्तीफा दिया और उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया है।

अदालत ने पूछा कि विधायकों ने कब इस्तीफा दिया। जिसके जवाब में रोहतगी ने कहा कि सभी ने छह जुलाई को इस्तीफा दिया था। बागी विधायकों के हवाले से मुकुल रोहतगी ने अदालत में कहा, हम विधायक बने रहना नहीं चाहते हैं। कोई भी हमें मजबूर नहीं कर सकता। मेरा इस्तीफा स्वीकार किया जाना चाहिए।

आईएमए पोंजी घोटाला : कांग्रेस के बागी विधायक रोशन बेग हिरासत में लिए गए
करोड़ों रुपये के आईएमए ज्वेलर्स पोंजी घोटाला मामले में की जांच कर रही एसआईटी ने कांग्रेस से निलंबित विधायक रोशन बेग को हिरासत में ले लिया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने बताया कि जिस वक्त बेग को हिरासत में लिया गया, वह उस वक्त बंगलूरू अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर से चार्टर्ड विमान में सवार होने वाले थे। कुमार स्वामी ने अरोप लगाया कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा के निजी सहायक संतोष भी बेग के साथ ही थे।

सनद रहे कि सिद्धारमैया सरकार में पूर्व मंत्री रहे बेग पर कंपनी के मालिक मोहम्मद मंसूर खान से 400 करोड़ रुपये लेने का आरोप है। हालांकि विधायक ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। खान पर 42 हजार निवेशकों के साथ 1500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है।

सुनवाई के अध्यक्ष के समक्ष पेश नहीं हो सके दो बागी विधायक
दो बागी विधायक प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार के समक्ष सोमवार को सदन से अपने इस्तीफे पर व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने में विफल रहे। इन विधायकों में कांग्रेस और जेडीएस के एक-एक विधायक शामिल हैं।