मेरी याद

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तु श्यामल रंग में रंग जाना
तेरा कान्हा मिलने आए तो
इक शूल चुभोना आँचल में
जब याद मेरी छू जाए तो
एक छोर बाँध लो हाथों में
एक छोर मेरे हाथों में दो
मत छोड़ो मेरा साथ प्रिये
एक डोर से जुड़े रहने दो
तुम बन जाना पत्थर जैसी
कोई बेहतर तुम्हें रिझाए तो
एक शूल चुभोना आँचल में
जब याद मेरी छू जाए तो
मैं धूप सही तुम छांव सही
हम दोनो साँझ में मिल लेंगे
जो खिलने होंगे फूल प्रिये
तो पतझड़ में भी खिल लेंगे
मत आँखो में पानी भरना
जो  मेरी बात ना भाए तो
एक शूल चुभोना आँचल में
जब याद मेरी छू जाए तो
-मंजरी
 मिताली राज तिवारी
 आगरा