आम चुनाव से पहले शिवराज, रमन व राजे की हार से बढ़ेगा मोदी और योगी का कद

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नई दिल्ली। बीजेपी ने हिंदी हार्टलैंड के तीन अहम राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की सत्ता कांग्रेस के हाथों गंवा दी है। आम चुनावों से कुछ महीने पहले लगे इस झटके ने बीजेपी की 2019 की दावेदारी पर भी ग्रहण लगाने का काम किया है। हालांकि बीजेपी की इस हार में भी पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ के लिए गुड न्यूज छिपी हुई है।
Modi and Yogi’s height will increase by the defeat of Shivraj, Raman and Raje before the general elections
बीजेपी के लिए मोदी पहले से ज्यादा जरूरी
बीजेपी के तीन मुख्यमंत्रियों (शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह और वसुंधरा राजे) की हार हुई है। 2014 से पहले ये तीनों नेता चुनावों में पार्टी को नेतृत्व देने लायक समझे जाते थे। अब इनकी हार के बाद बीजेपी में मोदी ऐसे अकेले नेता बचे हैं। राहुल गांधी की तरफ से चुनौती मिलने के बाद 2019 में दोनों के बीच प्रेजिडेंशियल स्टाइल के चुनाव कैंपेन की संभावनाओं में बीजेपी की जीत की निर्भरता भी मोदी पर ही है।

यूपी का महत्व और भी ज्यादा
बीजेपी जिन तीन राज्यों में हारी है वहां से लोकसभा की 65 सीटें आती हैं। 2014 के चुनावों में बीजेपी ने इसमें से 62 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अगर इस बार के विधानसभा चुनावों के परिणाम संसदीय सीटों के हिसाब से बांट कर देखे जाएं तो बीजेपी 2019 में 31 सीटें हार सकती है। ऐसे में पड़ोसी प्रदेश उत्तर प्रदेश की अहमियत और बढ़ गई है जहां बीजेपी ने 71 और उसके सहयोगियों ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की थी। यूपी के साथ-साथ यहां के सीएम योगी आदित्यनाथ का महत्व भी बीजेपी की 2019 योजना में बढ़ जाता है।

राम मंदिर का आंदोलन तेज होगा
ऐसे समय में जब 2019 की लड़ाई जीतने के लिए बीजेपी का यूपी जीतना अनिवार्य शर्त बन गया है और योगी सरकार के विकास का रिकॉर्ड कुछ खास नहीं दिख रहा तो नजरें राम मंदिर मुद्दे की तरफ उठेंगी। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मंदिर आंदोलन और तीखा हो सकता है। संसद में इस मुद्दे पर प्राइवेट मेंबर बिल भी देखने को मिल सकता है। अखिलेश और मायावती के साथ आने (शायद कांग्रेस भी) से प्रदेश में द्विध्रुवीय लड़ाई का स्टेज सेट हो रहा है। ऐसे में राम मंदिर का मुद्दा लोगों के ध्रुवीकरण में कामयाब हो सकता है। बीजेपी इस मुद्दे से सरकार विरोधी लहर और हिंदू जातियों के वोट बंटवारे को रोकने में कामयाब हो सकती है। जब मंदिर मुद्दे के लिए कैंपने की बात आएगी तो इसके लिए योगी आदित्यनाथ से बेहतर चेहरा और कौन होगा?

क्षत्रपों की अहमियत, नए दोस्तों की तलाश
वैसे तो बीजेपी के अपने तीन सबसे अहम क्षत्रपों को हार का सामना करना पड़ा है लेकिन केसीआर जैसे क्षत्रप और मजबूत हुए हैं। तेलंगाना में केसीआर हों या ओडिशा में नवीन पटनायक, बीजेपी के लिए ये क्षत्रप काफी अहम हैं। वह 2019 के लिए इनमें अपने नए दोस्तों की तलाश में भी जुटी है।